दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भुवनेश्वर से 22 वर्षीय युवक को कथित रूप से एक ‘रेडिकल ऑनलाइन नेटवर्क’ से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चल रही संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों की जांच के बाद की गई।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान शेख इमरान के रूप में हुई है, जिसे भुवनेश्वर के यूनिट VI इलाके से स्थानीय पुलिस की मदद से पकड़ा गया। अधिकारियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा चल रही उस जांच का हिस्सा है, जिसमें एन्क्रिप्टेड और बंद सोशल मीडिया ग्रुप्स के जरिए चल रहे ऑनलाइन नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि इमरान कथित तौर पर कुछ प्रतिबंधित ऑनलाइन कम्युनिटीज का सक्रिय सदस्य था और वह ऐसे कंटेंट को साझा कर रहा था, जिसे संवेदनशील और वैचारिक रूप से प्रभावित करने वाला माना जा रहा है। जांच में सामने आया है कि वह इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय था, जहां बंद ग्रुप्स के जरिए सामग्री का आदान-प्रदान किया जा रहा था।
अधिकारियों ने बताया कि इस मामले का खुलासा तब हुआ जब राष्ट्रीय राजधानी में पहले हुई कुछ गिरफ्तारियों के बाद जांच टीम ने कई व्यक्तियों के ऑनलाइन कनेक्शन खंगालने शुरू किए। डिजिटल ट्रेल्स की जांच के दौरान कुछ सुराग ओडिशा की ओर मिले, जिसके बाद दिल्ली पुलिस और भुवनेश्वर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की।
सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने आरोपी को उसके आवासीय क्षेत्र से हिरासत में लिया और बाद में उसे भुवनेश्वर की SDJM अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली भेजने की अनुमति दी, जहां आगे की पूछताछ की जाएगी।
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प्रारंभिक जांच में पुलिस ने बताया कि यह नेटवर्क एक संगठित ढांचे में काम करता है, जिसमें नए सदस्यों को धीरे-धीरे बंद ग्रुप्स में शामिल किया जाता है और उन्हें उनकी भूमिका के अनुसार काम सौंपा जाता है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआत में इसमें सामान्य ऑनलाइन गतिविधियां जैसे मैसेजिंग और कंटेंट शेयरिंग शामिल होती हैं, जो बाद में गंभीर रूप ले सकती हैं।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी की भूमिका केवल एक सामान्य सदस्य की थी या वह किसी सक्रिय संचालन का हिस्सा था। पुलिस का कहना है कि डिजिटल सामग्री, ग्रुप लिंक और चैट रिकॉर्ड की सत्यता की जांच की जा रही है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि ऐसे मामलों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, चैट हिस्ट्री और मेटाडेटा की फोरेंसिक जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है, ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल जांच टीम पूरे नेटवर्क की संरचना और अन्य जुड़े व्यक्तियों की पहचान पर काम कर रही है।
पुलिस के अनुसार, हाल के मामलों में कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल इस तरह की गतिविधियों के लिए किया गया है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए क्रॉस-प्लेटफॉर्म ट्रैकिंग चुनौतीपूर्ण हो गई है।
यह कार्रवाई उन बढ़ती घटनाओं का हिस्सा है, जिनमें कानून प्रवर्तन एजेंसियां बंद ऑनलाइन ग्रुप्स और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन पर नजर बढ़ा रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे नेटवर्क अक्सर परतों में काम करते हैं ताकि उनकी पहचान छिपी रहे।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं, क्योंकि पूरे नेटवर्क की कड़ियां अलग-अलग राज्यों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी हो सकती हैं।
