प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने GST चोरी, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े एक मामले में आरोपी स्क्रैप डीलर को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ FIR में कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है और न ही उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य मौजूद है, जो उसे सीधे तौर पर कथित अपराध से जोड़ सके। कोर्ट ने यह भी माना कि केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं है।
मामले में आरोपी रamesh Patel, जो M/s Kapeshwar Enterprises के मालिक हैं, को एक ऐसे केस में गिरफ्तार किया गया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक फर्जी कंपनी M/s Sharma Enterprises के जरिए GST की चोरी और नकली इनवॉइस जारी किए गए। अभियोजन पक्ष का दावा था कि आरोपी का संबंध इस कथित घोटाले से दूसरे आरोपी दिलशाद के जरिए जुड़ा है, जिनके कार्यालय से उन्हें अन्य लोगों के साथ पकड़ा गया था।
हालांकि बचाव पक्ष ने अदालत में जोरदार दलील दी कि आरोपी को गलत तरीके से फंसाया गया है और उसका इस फर्जी फर्म से कोई सीधा संबंध नहीं है। यह भी बताया गया कि उनके सभी व्यापारिक लेनदेन वैध बिलों के आधार पर किए गए हैं, जिन्हें GST पोर्टल पर विधिवत दर्ज किया गया है, जिससे किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी साबित नहीं होती।
कोर्ट ने सबूतों और FIR की जांच की
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए सबूतों की विस्तृत समीक्षा की। अदालत ने पाया कि FIR में आरोपी का नाम दर्ज नहीं है और न ही जांच के दौरान उसके पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष का पूरा मामला केवल एक सह-आरोपी के बयान पर आधारित है, जिसके समर्थन में कोई अन्य दस्तावेजी या ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस तरह के बयान अकेले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने या हिरासत में रखने का आधार नहीं बन सकते।
आपराधिक इतिहास नहीं होने का लाभ
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से यह प्रथम दृष्टया साबित नहीं होता कि आरोपी कथित GST घोटाले में प्रत्यक्ष रूप से शामिल था।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने माना कि आरोपी को हिरासत में रखना उचित नहीं है और उसे जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।
जमानत की शर्तें तय
हाईकोर्ट ने रamesh Patel को व्यक्तिगत मुचलके और दो जमानतदारों के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने शर्त रखी कि आरोपी जांच और मुकदमे की कार्यवाही में पूरा सहयोग करेगा, गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा और आवश्यकतानुसार अदालत में उपस्थित रहेगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश प्रारंभिक (prima facie) प्रकृति का है और इसका असर ट्रायल के अंतिम निर्णय पर नहीं पड़ेगा।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने GST चोरी और जालसाजी के मामले में आरोपी स्क्रैप डीलर को जमानत दी। कोर्ट ने कहा कि केवल सह-आरोपी के बयान पर हिरासत में रखना गलत है।
अभियोजन पक्ष का विरोध
राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध किया गया था, जिसमें कहा गया कि मामला गंभीर है और इसमें फर्जी फर्मों के जरिए बड़े पैमाने पर GST चोरी की गई है। हालांकि अदालत ने कहा कि केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर किसी को हिरासत में रखना उचित नहीं है, जब तक उसके खिलाफ प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद न हों।
जांच जारी, नेटवर्क की तलाश
मामले की जांच अभी जारी है और अधिकारियों द्वारा उस बड़े नेटवर्क की जांच की जा रही है, जिसके तहत फर्जी इनवॉइस जारी कर GST चोरी को अंजाम देने का आरोप है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
फैसले का महत्व
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि जमानत मामलों में व्यक्तिगत साक्ष्य और प्रत्यक्ष भूमिका का होना जरूरी है। केवल किसी अन्य आरोपी के बयान या संबंध के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
यह फैसला आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक विवेक और साक्ष्य की अनिवार्यता को भी रेखांकित करता है, विशेषकर GST जैसे जटिल कर ढांचे में, जहां हर लेनदेन का दस्तावेजी सत्यापन महत्वपूर्ण होता है।
मामले की आगे की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी, जहां सभी साक्ष्यों की विस्तृत जांच के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
