बोस्टन/नई दिल्ली: अमेरिका में वीजा धोखाधड़ी के एक चौंकाने वाले मामले में 10 भारतीय नागरिकों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बोस्टन की एक फेडरल ग्रैंड जूरी ने इन सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं, जिन पर संगठित साजिश के तहत फर्जी सशस्त्र लूट की घटनाएं रचकर अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम को धोखा देने का आरोप है। इस पूरे मामले में सामने आया है कि आरोपी सुविधा स्टोर्स और फास्ट फूड आउटलेट्स में नकली लूट की घटनाएं अंजाम दिलवाते थे, ताकि वहां मौजूद कर्मचारी खुद को अपराध का शिकार बताकर U-वीजा के लिए आवेदन कर सकें।
आरोपियों की पहचान जितेंद्रकुमार पटेल (39), महेशकुमार पटेल (36), संजयकुमार पटेल (45), दीपिकाबेन पटेल (40), रमेशभाई पटेल (52), अमिताबहेन पटेल (43), रोनक्कुमार पटेल (28), संगीताबेन पटेल (36), मिंकेश पटेल (42) और सोनल पटेल (42) के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से अधिकांश आरोपी अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे थे, जबकि एक आरोपी को पहले ही भारत डिपोर्ट किया जा चुका है। दो अन्य को इमिग्रेशन हिरासत में लिया गया है।
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अमेरिकी अभियोजन पक्ष के मुताबिक, यह पूरा मामला 2023 में शुरू हुई एक विस्तृत जांच से जुड़ा है, जिसमें इस रैकेट के मुख्य संचालक रामभाई पटेल और गेटअवे ड्राइवर बलविंदर सिंह की भूमिका सामने आई थी। दोनों को दिसंबर 2023 में आरोपित किया गया था और बाद में मई 2025 में दोषी ठहराया गया। अब जिन 10 आरोपियों पर आरोप तय किए गए हैं, वे या तो इन नकली लूट की घटनाओं को आयोजित करने में शामिल थे या खुद अथवा अपने परिजनों को ‘पीड़ित’ के रूप में पेश करने के लिए भुगतान करते थे।
जांच दस्तावेजों के अनुसार, मार्च 2023 के दौरान इस गिरोह ने मैसाचुसेट्स और अन्य इलाकों में कम से कम छह सुविधा स्टोर्स, शराब की दुकानों और फास्ट फूड रेस्टोरेंट्स में फर्जी सशस्त्र लूट की घटनाएं अंजाम दीं। इन घटनाओं में एक व्यक्ति ‘लुटेरे’ की भूमिका निभाता था, जो नकली या दिखावटी हथियार के साथ दुकान में घुसकर कर्मचारियों को धमकाता और कैश काउंटर से पैसे लेकर भाग जाता था।
पूरा घटनाक्रम दुकान के सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड किया जाता था, जिससे यह असली घटना लगे। इसके बाद क्लर्क या दुकान मालिक जानबूझकर कुछ मिनटों का इंतजार करते और फिर पुलिस को सूचना देते थे, ताकि मामला वास्तविक लगे। बाद में यही लोग U-वीजा के लिए आवेदन करते, जिसमें यह दावा किया जाता कि वे हिंसक अपराध के शिकार हुए हैं और उन्होंने जांच में सहयोग किया है।
बताया गया है कि इस योजना में शामिल ‘पीड़ित’ बनने वाले लोग रामभाई पटेल को पैसे देते थे, जबकि वह दुकान मालिकों को उनके स्टोर के इस्तेमाल के लिए भुगतान करता था। इस तरह एक संगठित नेटवर्क के जरिए पूरी साजिश को अंजाम दिया जा रहा था, जिसमें हर व्यक्ति की भूमिका पहले से तय होती थी।
अमेरिकी कानून के अनुसार, U-वीजा उन लोगों को दिया जाता है जो किसी गंभीर अपराध के शिकार हुए हों और जिन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद की हो। लेकिन इस मामले में आरोपियों ने इसी प्रावधान का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से वीजा हासिल करने की कोशिश की।
अभियोजन पक्ष ने कहा है कि वीजा धोखाधड़ी की साजिश के आरोप में दोषी पाए जाने पर आरोपियों को अधिकतम पांच साल की जेल, तीन साल की निगरानी (सुपरवाइज्ड रिलीज) और 2.5 लाख डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा सजा पूरी होने के बाद उन्हें अमेरिका से डिपोर्ट भी किया जा सकता है।
फिलहाल सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है। इस मामले ने अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में संभावित खामियों और उसके दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अन्य संभावित कनेक्शनों और इससे जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी हैं, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
