SEBI ने Trdez Investment Pvt Ltd से जुड़े कथित ₹2,950 करोड़ के Ponzi-जैसे निवेश नेटवर्क में broking licence misuse, fake dashboards और crypto-linked transactions पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

₹2,950 करोड़ का निवेश घोटाला: ब्रोकिंग लाइसेंस के दुरुपयोग पर सेबी की बड़ी कार्रवाई

Team The420
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मुंबई: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा किया है, जिसमें Trdez Investment Pvt Ltd पर अपने ब्रोकिंग लाइसेंस का दुरुपयोग कर लगभग ₹2,950 करोड़ की निवेश योजना चलाने का आरोप है। सेबी के अनुसार यह पूरा ढांचा एक पोंजी जैसी संरचना पर आधारित था, जिसमें निवेशकों को असामान्य रूप से निश्चित मासिक रिटर्न का लालच देकर फंसाया गया।

सेबी द्वारा 9 अप्रैल 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि कंपनी ने अपने ब्रोकिंग कारोबार के साथ-साथ कई अन्य संस्थाओं का निर्माण किया, जिनमें Infinite Beacon, IB Prop Desk और Sispay TFS शामिल हैं। इन संस्थाओं को ब्रोकिंग कंपनी से जुड़ा हुआ बताकर निवेशकों का विश्वास जीतने की कोशिश की गई और इसी आधार पर बड़े पैमाने पर धन जुटाया गया।

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जांच में सामने आया कि एजेंटों ने निवेशकों को 10 से 12 प्रतिशत तक मासिक रिटर्न का वादा किया, जो बाजार आधारित निवेशों की वास्तविक प्रकृति से पूरी तरह असंगत है। शुरुआती चरण में कुछ निवेशकों को आंशिक निकासी की अनुमति दी गई, जिससे उन्हें यह विश्वास हो गया कि योजना वैध और लाभकारी है। बाद में अचानक निकासी पर प्रतिबंध लगने से निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।

सेबी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि निवेशकों के धन को ब्रोकिंग खाते में न लेकर संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। कई मामलों में फर्जी डैशबोर्ड दिखाकर निवेशकों को काल्पनिक लाभ दर्शाए गए, जिससे उन्हें लगातार निवेश बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया।

जांच के दौरान यह भी पाया गया कि Trdez Investment Pvt Ltd के निदेशकों की भूमिका अन्य संबंधित कंपनियों में भी रही है। कई निदेशकों के व्यक्तिगत बैंक खातों और इन संस्थाओं के बीच वित्तीय लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा एक ही पते और संपर्क विवरण का उपयोग कई कंपनियों द्वारा किए जाने की बात भी सामने आई है, जिससे नेटवर्क की जटिलता स्पष्ट होती है।

सेबी ने यह भी संकेत दिया है कि इस पूरे ढांचे में क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन का उपयोग भी किया गया। कुछ निवेशकों के बयान के अनुसार धन को USDT जैसे डिजिटल एसेट्स में स्थानांतरित किया गया, जिससे लेन-देन को ट्रेस करना मुश्किल हो गया। एक निदेशक द्वारा भी क्रिप्टो से जुड़े लेन-देन में संलिप्तता स्वीकार किए जाने की जानकारी मिली है।

आंकड़ों के अनुसार, यह ब्रोकिंग कंपनी लगभग निष्क्रिय स्थिति में पाई गई, जहां क्लाइंट ट्रेडिंग लगभग शून्य थी और स्वयं के खाते में भी बेहद सीमित लेन-देन हुआ। इसके बावजूद समूह से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से हजारों निवेशकों से भारी धन जुटाया गया, जिसकी कुल राशि ₹2,950 करोड़ से अधिक बताई जा रही है।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए संगठित एजेंट नेटवर्क का उपयोग किया गया, जो विभिन्न शहरों में सेमिनार, ऑनलाइन मीटिंग और सोशल मीडिया प्रचार के जरिए लोगों को जोड़ते थे। कई निवेशकों को यह विश्वास दिलाया गया कि यह योजना पूरी तरह से सेबी-रेगुलेटेड ब्रोकिंग सिस्टम के तहत सुरक्षित है, जबकि वास्तविकता में धन को अलग-अलग खातों में डायवर्ट किया जा रहा था।

सेबी ने कहा कि ऐसे मामलों में नियामक ढांचे के दुरुपयोग से निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है और बाजार की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। ऐसी योजनाएं अक्सर शुरुआती लाभ दिखाकर निवेश आकर्षित करती हैं, लेकिन बाद में निकासी रोककर पूरी संरचना अस्थिर हो जाती है। नियामक ने निवेशकों को फिक्स्ड हाई रिटर्न स्कीम से सावधान रहने की सलाह दी है।

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