अमेरिका के जॉर्जिया राज्य में एक बड़े मेल फ्रॉड मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें दो भारतीय मूल के व्यक्तियों—मिहिर पटेल और हिमांशुभाई बारोट—पर लगभग $116,000 (करीब ₹9.6 करोड़) की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि दोनों ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों या अन्य आधिकारिक संस्थाओं के प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराया और उनसे नकद धनराशि भेजने के लिए मजबूर किया।
कोर्ट रिकॉर्ड्स के अनुसार, यह पूरा घोटाला वर्ष 2021 में केवल 15 दिनों की अवधि (1 मार्च से 15 मार्च) के भीतर संचालित किया गया था। इस दौरान दोनों आरोपियों ने अमेरिका के विभिन्न राज्यों के लोगों को फोन कर दावा किया कि उनके खिलाफ कानूनी या वित्तीय कार्रवाई हो सकती है, और उनसे “अपने कानूनी और वित्तीय हितों की सुरक्षा” के नाम पर पैसे भेजने को कहा गया।
जांच में सामने आया कि पीड़ितों से $10,000 से $30,000 तक की नकद राशि डाक के माध्यम से जॉर्जिया के विभिन्न शहरों—जैसे पेरी, वार्नर रॉबिन्स, काथलीन और मैकॉन—में भेजने के लिए कहा गया। यह पैसा अलग-अलग राज्यों जैसे ओरेगन, नेवादा, मैरीलैंड, न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया और मिनेसोटा से भेजा गया था।
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अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी स्कीम एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें सभी पैकेज एक ही नाम “David Williams” को संबोधित किए गए थे। आरोप है कि मिहिर पटेल फर्जी पहचान पत्र का उपयोग कर खुद को “David Williams” बताकर उन पैकेजों को प्राप्त करता था।
जांच एजेंसियों ने बताया कि पैकेज हासिल करने के बाद आरोपी उनके खोलने की तस्वीरें और वीडियो बनाकर अन्य सह-आरोपियों को भेजते थे, जिससे यह साबित हो सके कि नकद राशि सफलतापूर्वक प्राप्त हो चुकी है। इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।
कोर्ट दस्तावेजों के अनुसार, इस घोटाले के दौरान प्राप्त कुल धनराशि लगभग $116,000 रही, जो भारतीय मुद्रा में करीब ₹9.6 करोड़ के बराबर है। अधिकारियों ने बताया कि यह रकम विभिन्न राज्यों से छोटे-छोटे हिस्सों में भेजी गई थी, जिससे इसे ट्रैक करना मुश्किल हो सके।
जांच में यह भी सामने आया कि हिमांशुभाई बारोट उस समय अमेरिका में अवैध रूप से रह रहा था। अधिकारियों ने इस मामले को अंतरराज्यीय संगठित धोखाधड़ी करार दिया है और कहा है कि इसमें और भी लोगों की भूमिका हो सकती है।
अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने दोनों आरोपियों पर “conspiracy to commit mail fraud” का मामला दर्ज किया है। साथ ही, अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि इस स्कीम से अर्जित किसी भी संपत्ति या धन को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
अधिकारियों का कहना है कि यह घोटाला इस बात का उदाहरण है कि किस तरह डिजिटल और पारंपरिक माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को डराकर ठगी की जाती है। पीड़ितों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे बड़ी रकम वसूली गई।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन जुड़े हो सकते हैं और क्या इस तरह की अन्य स्कीमें भी सक्रिय हैं। मामले की सुनवाई अभी जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
