कटक पुलिस ने IAS अधिकारी अराधना दास के खिलाफ ₹95 लाख के कथित जमीन सौदा फ्रॉड मामले में कार्रवाई की अनुमति मांगी है।

ओडिशा में ₹95 लाख फ्रॉड केस में IAS अधिकारी पर कार्रवाई की सिफारिश, कटक पुलिस ने पेश किए मजबूत साक्ष्य

Team The420
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भुवनेश्वर/कटक: ओडिशा में एक वरिष्ठ IAS अधिकारी से जुड़ा बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें कटक पुलिस ने ₹95 लाख के कथित धोखाधड़ी मामले में आगे की कार्रवाई के लिए वरिष्ठ प्रशासन से अनुमति मांगी है। यह मामला अब प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तर पर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें आरोप है कि अधिकारी ने कटक के CDA क्षेत्र में जमीन दिलाने के नाम पर पैसे लिए और बाद में शिकायतकर्ता को धमकियां भी दीं।

अधिकारी की पहचान अराधना दास के रूप में की गई है, जो राज्य गृह विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। कमिश्नरेट पुलिस ने इस मामले में विस्तृत जांच के बाद राज्य गृह विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र भेजकर कार्रवाई की अनुमति मांगी है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्य जुटाए गए हैं, जो आरोपों की पुष्टि की ओर संकेत करते हैं।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह मामला जनवरी 2026 में दर्ज किया गया था, लेकिन मार्च में सामने आए नए तथ्यों के बाद जांच को गति मिली। प्रारंभिक चरण में शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई थी, लेकिन बाद में नए साक्ष्यों के आधार पर मामले की दोबारा विस्तृत जांच शुरू की गई।

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कटक के CDA फेज-2 थाना प्रभारी द्वारा तैयार जांच रिपोर्ट 21 मार्च को पुलिस उपायुक्त (DCP) को सौंपी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि प्राथमिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि जमीन आवंटन के आश्वासन के बदले शिकायतकर्ता और IAS अधिकारी के बीच ₹95 लाख का वित्तीय लेन-देन हुआ।

शिकायतकर्ता बीना भब्सिंका ने आरोप लगाया है कि ₹85 लाख सीधे अधिकारी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए, जबकि ₹10 लाख नकद में दिए गए। जांच के दौरान बैंक स्टेटमेंट, लिखित समझौते और अन्य दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में पेश किया गया है।

पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि जांच के दौरान अधिकारी ने सहयोग नहीं किया और डाक के माध्यम से भेजे गए कई नोटिसों को स्वीकार नहीं किया। जांच में इस असहयोग को एक गंभीर बाधा के रूप में दर्ज किया गया है।

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कटक DCP ने 1 अप्रैल को राज्य गृह सचिव और पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर सूचित किया कि इस मामले में FIR पहले ही दर्ज की जा चुकी है। इसके बाद 6 अप्रैल को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को विस्तृत रिपोर्ट भेजते हुए सभी दस्तावेज संलग्न किए।

अधिकारियों के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और अन्य आर्थिक अपराधों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। जांच एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या इस मामले में धमकी देने और पद के दुरुपयोग के आरोप भी साबित होते हैं।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ IAS अधिकारी शामिल हैं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है और कानून सभी के लिए समान है।

फिलहाल अधिकारी से संपर्क करने के प्रयास असफल रहे हैं। इससे पहले 18 मार्च को उन्होंने आरोपों और FIR की जानकारी से अनभिज्ञता जताई थी।

इस बीच, प्रशासनिक स्तर पर अब यह निर्णय लिया जाना बाकी है कि आगे कार्रवाई की अनुमति दी जाए या नहीं। जांच जारी है और आने वाले दिनों में वित्तीय लेन-देन से जुड़े और दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी।

यह मामला ओडिशा प्रशासन में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है, जो कथित तौर पर सत्ता के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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