CERT-In ने Apple प्रोडक्ट्स में गंभीर सुरक्षा खामियों को लेकर अलर्ट जारी किया है और iPhone, iPad व Mac यूजर्स से तुरंत सॉफ्टवेयर अपडेट करने को कहा है।

Apple डिवाइस में हाई-सीवेरिटी बग: एक क्लिक में हैक हो सकता है आपका iPhone और Mac

Team The420
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नई दिल्ली: देश की शीर्ष साइबर सुरक्षा एजेंसी Indian Computer Emergency Response Team (Cert-In) ने Apple डिवाइस यूजर्स के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी के मुताबिक Apple के कई प्रोडक्ट्स में हाई-सीवेरिटी खामियां पाई गई हैं, जिनका फायदा उठाकर साइबर अपराधी यूजर्स के डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच बना सकते हैं।

Cert-In की एडवाइजरी के अनुसार, इन कमजोरियों के जरिए हमलावर “रिमोट कोड एक्सीक्यूशन” कर सकते हैं—यानी बिना यूजर की जानकारी के डिवाइस में घुसकर उसे पूरी तरह कंट्रोल कर सकते हैं। इससे न केवल संवेदनशील डेटा चोरी हो सकता है, बल्कि डिवाइस की सुरक्षा और कार्यक्षमता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

कौन से डिवाइस और वर्जन हैं सबसे ज्यादा जोखिम में

एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि iOS और iPadOS के पुराने वर्जन, खासकर 26.4 से पहले के सिस्टम, इन खामियों से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे डिवाइस जिनमें लेटेस्ट सिक्योरिटी अपडेट इंस्टॉल नहीं हैं, वे साइबर हमलों के लिए आसान निशाना बन सकते हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि इन कमजोरियों के जरिए हैकर्स डिवाइस की सिक्योरिटी लेयर्स को बायपास कर सकते हैं। इसके बाद वे यूजर की निजी फाइल्स, फोटो, बैंकिंग डिटेल्स, लॉगिन क्रेडेंशियल्स और पासवर्ड तक आसानी से पहुंच बना सकते हैं। यही वजह है कि समय पर अपडेट करना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है।

डेटा चोरी से लेकर डिवाइस क्रैश तक का खतरा

Cert-In ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ये कमजोरियां कई तरह के साइबर हमलों को जन्म दे सकती हैं। इनमें डेटा चोरी, डिनायल-ऑफ-सर्विस (DoS) अटैक, स्पूफिंग और मेमोरी करप्शन जैसे खतरे शामिल हैं।

साइबर अपराधी इन खामियों का इस्तेमाल कर यूजर के डिवाइस को स्लो कर सकते हैं, ऐप्स को बार-बार क्रैश करा सकते हैं या फिर पूरे सिस्टम को ठप कर सकते हैं। इससे न सिर्फ व्यक्तिगत डेटा खतरे में पड़ता है, बल्कि कॉर्पोरेट और प्रोफेशनल यूजर्स के लिए भी बड़ा जोखिम पैदा होता है, जहां संवेदनशील जानकारी का दुरुपयोग संभव है।

Chrome और Mozilla यूजर्स भी रहें सतर्क

Cert-In ने सिर्फ Apple ही नहीं, बल्कि Google Chrome और Mozilla के प्रोडक्ट्स में भी कई गंभीर खामियों की पहचान की है। खासतौर पर डेस्कटॉप ब्राउजर्स में पाए गए ये बग्स यूजर्स को साइबर हमलों के प्रति और अधिक संवेदनशील बना सकते हैं।

इसका मतलब साफ है कि खतरा केवल एक कंपनी या डिवाइस तक सीमित नहीं है, बल्कि इंटरनेट का उपयोग करने वाला हर व्यक्ति संभावित जोखिम में है। ऐसे में मल्टी-डिवाइस यूजर्स को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

स्पाइवेयर अटैक का भी बढ़ता खतरा

इससे पहले भी Apple ने दुनियाभर के कुछ यूजर्स को चेतावनी दी थी कि वे “मर्सनरी स्पाइवेयर” हमलों का शिकार हो सकते हैं। कंपनी के मुताबिक ये हमले बेहद एडवांस्ड होते हैं और आम साइबर फ्रॉड से कहीं ज्यादा जटिल और खतरनाक होते हैं।

Apple ने कहा था कि ऐसे हमलों में हमलावर भारी संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं और खासतौर पर चुनिंदा व्यक्तियों को निशाना बनाते हैं। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकांश आम यूजर्स इन हाई-एंड हमलों के दायरे में नहीं आते, लेकिन फिर भी सतर्कता जरूरी है।

क्या कहते हैं साइबर एक्सपर्ट

इस तरह की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं, “आज के दौर में साइबर अपराधी केवल सोशल इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर सीधे डिवाइस में घुसपैठ कर रहे हैं। यूजर्स को नियमित अपडेट और साइबर हाइजीन को अपनी आदत का हिस्सा बनाना होगा, तभी ऐसे हमलों से बचाव संभव है।”

यूजर्स क्या करें—तुरंत अपनाएं ये कदम

  • साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने यूजर्स को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है:
  • अपने iPhone, iPad और Mac को तुरंत लेटेस्ट सॉफ्टवेयर वर्जन पर अपडेट करें
  • किसी भी अनजान लिंक, ईमेल या फाइल्स पर क्लिक करने से बचें
  • केवल भरोसेमंद ऐप्स और आधिकारिक वेबसाइट्स का ही इस्तेमाल करें
  • डिवाइस में मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्षम करें
  • समय-समय पर सिक्योरिटी सेटिंग्स और अपडेट्स की जांच करते रहें

बढ़ते साइबर खतरे के बीच सतर्कता ही बचाव

डिजिटल युग में जहां स्मार्ट डिवाइस हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, वहीं उनकी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। Cert-In की यह चेतावनी इस बात का संकेत है कि तकनीकी खामियां कभी भी बड़े साइबर हमले का कारण बन सकती हैं।

ऐसे में यूजर्स के लिए सबसे बड़ा बचाव यही है कि वे जागरूक रहें, अपने डिवाइस को समय पर अपडेट करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करें।

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