साइबर थाना पुलिस ने एपीके फाइल, कॉल फॉरवर्डिंग और व्हाट्सएप क्यूआर कोड के जरिए बढ़ रही ठगी से बचने के लिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

21 डायल कराना पड़ सकता है भारी, कॉल फॉरवर्डिंग से साइबर ठग बना रहे शिकार

Team The420
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पटना: साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं और अब ठगी के लिए तकनीकी माध्यमों का दायरा और अधिक खतरनाक हो गया है। हाल के दिनों में साइबर थानों के समक्ष ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें एपीके फाइल, कॉल फॉरवर्डिंग और व्हाट्सएप क्यूआर कोड स्कैनिंग के जरिए लोगों के मोबाइल और बैंक खातों तक पहुंच बनाकर ठगी को अंजाम दिया गया। पुलिस का कहना है कि अपराधी अब सिर्फ लिंक भेजकर ही नहीं, बल्कि मोबाइल की सेटिंग, मैसेजिंग ऐप्स और कॉलिंग सिस्टम का दुरुपयोग कर लोगों की निजी और वित्तीय जानकारी पर कब्जा जमा रहे हैं।

साइबर थाना पुलिस के अनुसार, एक आम तरीका एपीके फाइल के जरिए ठगी करना है। अपराधी आरटीओ चालान, बिजली बिल, पीएम किसान योजना या किसी जरूरी सरकारी सूचना के नाम पर संदिग्ध फाइल भेजते हैं। जैसे ही पीड़ित इन फाइलों को अपने मोबाइल में डाउनलोड या इंस्टॉल करता है, अपराधियों को फोन के कई हिस्सों तक अनधिकृत पहुंच मिल जाती है। इसके बाद वे व्हाट्सएप, मैसेज, बैंकिंग ऐप्स और अन्य संवेदनशील डेटा का दुरुपयोग कर खातों से रकम निकाल सकते हैं।

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इसी तरह कॉल फॉरवर्डिंग तकनीक का भी गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। अपराधी किसी बहाने से पीड़ित को 21 डायल करने के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसा करते ही उसके मोबाइल पर आने वाली कॉल्स किसी अन्य नंबर पर फॉरवर्ड हो जाती हैं। इसके बाद ठग पीड़ित के परिचितों, परिवारजनों या बैंकिंग सेवाओं से जुड़े नंबरों पर संपर्क स्थापित कर धोखाधड़ी को आगे बढ़ाते हैं। कई बार इसी तकनीक का इस्तेमाल ओटीपी और सत्यापन कॉल्स को नियंत्रित करने के लिए भी किया जाता है।

व्हाट्सएप क्यूआर कोड स्कैनिंग भी अब एक नया खतरा बनकर उभरी है। अपराधी किसी व्यक्ति को व्हाट्सएप वेब का क्यूआर कोड भेजकर उसे स्कैन करने के लिए कहते हैं। जैसे ही पीड़ित ऐसा करता है, उसका व्हाट्सएप अकाउंट किसी दूसरे डिवाइस पर सक्रिय हो जाता है। इसके बाद उसके संपर्क, चैट और निजी जानकारियां अपराधियों की पहुंच में चली जाती हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी या प्रतिरूपण के लिए किया जा सकता है।

पुलिस उपाधीक्षक सह थानाध्यक्ष साइबर थाना नीतीश चंद्र धरिया ने लोगों से सतर्कता और डिजिटल अनुशासन बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान या अविश्वसनीय स्रोत से प्राप्त एपीके फाइल डाउनलोड न करें, मोबाइल में ऑटो-डाउनलोड सुविधा बंद रखें, व्हाट्सएप में 2-स्टेप वेरिफिकेशन अवश्य सक्रिय करें और किसी भी अज्ञात क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें। यदि किसी कारणवश कॉल प्राप्त नहीं हो रही हो, तो तुरंत ##002# डायल कर कॉल फॉरवर्डिंग सेवा निष्क्रिय करें या मोबाइल सेटिंग्स के माध्यम से उसे बंद करें।

पुलिस ने लोगों से यह भी कहा है कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या निकटतम साइबर थाने से संपर्क करें। विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल सावधानी, समय पर शिकायत और तकनीकी जागरूकता ही इस तरह की ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

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