लखनऊ: नवाबगंज और इटौंजा टोल प्लाजा पर ओवरलोड ट्रकों को फर्जी नंबर से पास कराने का खुलासा हुआ है। जांच में पता चला कि गिट्टी, बालू और मौरंग लदे ट्रकों के मामले में सक्रिय गिरोह ने टोल कर्मियों की मिलीभगत से दो महीने के दौरान लगभग 8 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व की चपत लगाई। इस खेल में ओवरलोड ट्रक 500 से 700 रुपये की रसीद कटा कर निकल जाते हैं, जबकि सही नंबर पर उन्हें 1 से 1.25 लाख रुपये का चालान कटता।
फास्टैग प्रणाली में भी धांधली का खुलासा हुआ है। टोल प्लाजा से कोई भी वाहन पार होता है तो उसका शुल्क वाहन पर लगे फास्टैग से कटता है, जो वाहन के नंबर से जुड़ा होता है। शुक्रवार को पकड़े गए ट्रक में टोल शुल्क वास्तविक नंबर के आधार पर नहीं कटा था। इससे जाहिर होता है कि टोल कर्मियों की मिलीभगत के कारण फास्टैग की अनदेखी की जाती है या अन्य तरीकों से शुल्क काटा जाता है।
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ओवरलोड ट्रकों से यदि हाईवे पर कोई हादसा होता है, तो वह पकड़ में नहीं आते। पुलिस घटना के समय टोल से गुजरे ट्रकों की जांच वहां लगे सीसीटीवी से करती है। MA सीरीज के फर्जी नंबरों का प्रयोग करके टोल पार करने वाले ट्रक वास्तविक नंबर दोबारा लगा लेते हैं, जिससे उनका पता नहीं चलता और वे बिना चालान कटे निकल जाते हैं।
एआरटीओ प्रवर्तन आलोक कुमार यादव की तहरीर पर सरोजनी नगर थाने में ट्रक नंबर UP-32-ZN-8925 के चालक मनीष और नवाबगंज टोल प्लाजा के अज्ञात कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पाण्डेय का कहना है कि ओवरलोड ट्रकों को पास कराने की यह गिरोहबंदी अब जांच के दायरे में है।
जांच के अनुसार नवाबगंज टोल से पकड़ा गया ट्रक ही इस खेल का पहला प्रमाण नहीं था। आलोक कुमार यादव ने इटौंजा टोल से प्राप्त दो महीने की सूची का विश्लेषण किया, जिसमें यह सामने आया कि 1,600 ट्रकों में से लगभग आधे ट्रक MA नंबर से पास कराए गए हैं। प्रत्येक ओवरलोड ट्रक पर औसतन 1 से 1.25 लाख रुपये का चालान कटना चाहिए था। यदि सही नंबरों का डेटाबेस उपलब्ध होता, तो दो महीने में 8 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना बनता।
पकड़े गए ट्रक पर भी चालान 1,08,600 रुपये का लगाया गया। इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि फर्जी नंबर का खेल केवल टोल शुल्क में ही नहीं, बल्कि ओवरलोडिंग के नियंत्रण और रोड सुरक्षा पर भी प्रभाव डालता है। ओवरलोड ट्रकों से सड़क हादसों का जोखिम बढ़ जाता है, और यदि इन्हें ट्रैक न किया जाए, तो कानूनी कार्रवाई भी संभव नहीं होती।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला टोल प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक खामियों का प्रतीक है। फास्टैग और नंबर प्लेट के सत्यापन में लापरवाही ने गिरोहों को ओवरलोड ट्रकों के जरिए बड़े पैमाने पर राजस्व चोरी करने का अवसर दिया। अधिकारी अब इस प्रक्रिया में सुधार और निगरानी बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
आरटीओ और पुलिस का कहना है कि भविष्य में टोल कर्मियों और चालक दोनों की जवाबदेही तय करने के लिए अधिक कड़ा निरीक्षण किया जाएगा। डिजिटल रिकॉर्डिंग और वास्तविक नंबर की पुष्टि के लिए नई तकनीक अपनाई जाएगी ताकि फर्जी नंबरों और ओवरलोड ट्रकों की चपत को रोका जा सके।
निष्कर्षतः नवाबगंज और इटौंजा टोल प्लाजा का यह खुलासा ओवरलोडिंग और राजस्व चोरी के मामलों में प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह मामला आम जनता, परिवहन विभाग और पुलिस अधिकारियों के लिए चेतावनी है कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो बड़े पैमाने पर वित्तीय और सड़क सुरक्षा जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं
