हैदराबाद: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने पति पर दुष्कर्म, जबरन धर्मांतरण, ब्लैकमेल और करीब ₹30 लाख की आर्थिक ठगी के आरोप लगाए हैं। पीड़िता का दावा है कि उसे पहले झूठी पहचान के जरिए जाल में फंसाया गया और फिर महीनों तक उसका शोषण किया गया।
महिला के अनुसार, घटनाक्रम की शुरुआत मई 2021 में हुई, जब आरोपी नवाज, जिसने खुद को “नवदुर्गा” बताकर हिंदू होने का दावा किया, उसके संपर्क में आया। उसने किराए पर दुकान लेने के बहाने पीड़िता से नजदीकियां बढ़ाईं और धीरे-धीरे विश्वास हासिल कर लिया। कुछ ही दिनों में आरोपी ने किराया और अग्रिम राशि देकर भरोसे का माहौल बना लिया।
पीड़िता का आरोप है कि 24 मई को आरोपी उसे एक रिसॉर्ट में अपने परिवार से मिलवाने के बहाने ले गया, जहां उसे खाने-पीने की चीजों में कुछ मिलाकर बेहोश कर दिया गया। महिला का कहना है कि होश में आने पर उसे अपने साथ दुष्कर्म का एहसास हुआ। जब उसने इसका विरोध किया, तो आरोपी ने कथित तौर पर आपत्तिजनक तस्वीरें दिखाकर उसे ब्लैकमेल किया और शादी के लिए मजबूर किया।
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महिला के मुताबिक, दबाव में आकर उसने 28 जुलाई 2021 को आरोपी से शादी कर ली। इसके बाद उसका जीवन और अधिक कठिन हो गया। उसने आरोप लगाया कि शादी के बाद उसे जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया। अगस्त 2021 में एक धार्मिक व्यक्ति को बुलाकर उससे कलमा पढ़वाया गया और उसका नाम बदलकर “नजीरा” रख दिया गया।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध खान-पान की आदतें बदलने के लिए मजबूर किया गया। मना करने पर उसके साथ मारपीट की गई और मानसिक दबाव बनाया गया। इसके अलावा, उसे अपने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने से भी रोका गया।
आर्थिक शोषण के आरोप भी इस मामले में गंभीर हैं। महिला का दावा है कि आरोपी और उसके सहयोगियों—मुनव्वर, शाहरुख, सोहेल, समीर, इस्माइल, रेशमा और नसीमा—ने मिलकर उससे करीब ₹16.7 लाख की राशि ट्रांसफर करवाई। इसके अलावा उसके नाम पर लोन लिया गया, क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया गया और शमशाबाद स्थित उसकी जमीन बिना अनुमति के बेच दी गई। कुल मिलाकर पीड़िता ने लगभग ₹25 से ₹30 लाख के नुकसान का दावा किया है, जिसमें सोना भी शामिल है।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसे कई बार नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया गया और उसके साथ लगातार शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न किया गया। उसने जब भी विरोध करने की कोशिश की, उसे धमकाया गया कि उसकी निजी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दी जाएंगी और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाया जाएगा।
पीड़िता के अनुसार, उसे हैदराबाद के अलग-अलग इलाकों—जैसे बेगमपेट और कुंदन बाग—में ले जाकर रखा गया और उस पर लगातार नजर रखी गई। इस दौरान उसकी स्वतंत्रता पूरी तरह सीमित कर दी गई थी।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि महिला ने जनवरी में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उसके मुताबिक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उसने दावा किया कि उसकी शिकायत को गंभीर धाराओं में दर्ज करने के बजाय सामान्य गुमशुदगी के मामले के रूप में लिया गया, जिससे न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
इस मामले ने कानून-व्यवस्था और पीड़ितों को मिलने वाले न्याय पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी होती है, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और दोषियों को सजा।
फिलहाल, मामला गंभीर आरोपों और जांच की मांग के बीच खड़ा है। आगे की कार्रवाई और जांच की दिशा ही तय करेगी कि इस पूरे प्रकरण में सच्चाई क्या है और पीड़िता को न्याय कब और कैसे मिल पाएगा।
