नोएडा: अवैध निर्माण और उगाही के गंभीर आरोपों में नोएडा प्राधिकरण ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए वर्क सर्किल-10 के वरिष्ठ प्रबंधक केवी सिंह को उनके पद से हटा दिया है। उन्हें उनके मूल विभाग उत्तर प्रदेश सेतु निगम वापस भेज दिया गया है। इस फैसले के बाद प्राधिकरण के अंदरूनी तंत्र में हलचल तेज हो गई है और इसे जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, यमुना डूब क्षेत्र में फार्म हाउस के लिए जमीन कब्जाने और अवैध वसूली से जुड़ी शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। एक पीड़ित किसान ने सीधे मुख्यमंत्री स्तर तक शिकायत पहुंचाई थी, जिसके बाद मामला गंभीर हो गया। इसके बाद गठित आश्वासन समिति ने मौके का निरीक्षण किया और प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर संबंधित अधिकारी पर आरोप लगाए।
बताया जाता है कि निरीक्षण के दौरान शीर्ष अधिकारी बैठक के लिए मौजूद नहीं थे, जिससे समिति ने नाराजगी जताते हुए कार्यालय से बाहर निकलने का निर्णय लिया। इसके बावजूद केवी सिंह और उनके करीबी कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतों का सिलसिला थमा नहीं। आरोप है कि उनके प्रभाव का हवाला देकर अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा था और लोगों से धन उगाही की जा रही थी।
पिछले एक महीने के दौरान जनसुनवाई में बड़ी संख्या में लिखित शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें यह आरोप लगाया गया कि जो लोग अवैध निर्माण के लिए रकम नहीं देते, उनके निर्माण कार्य को जबरन रुकवाया जाता है या उसे ध्वस्त कर दिया जाता है। इन शिकायतों में फार्म हाउस कब्जा, स्थानीय आरडब्ल्यूए की अनदेखी और अवैध निर्माण को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप शामिल थे।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए प्राधिकरण ने एक विशेष जांच समिति गठित की, जिसे सैटेलाइट इमेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच करने का निर्देश दिया गया। जांच रिपोर्ट में आरोपों को सही पाया गया, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ।
देर शाम जारी आदेश में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने केवी सिंह को वर्क सर्किल-10 से हटाकर उनके मूल विभाग भेजने का निर्देश जारी किया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई संस्थागत पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
हालांकि, केवी सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि उन्हें इस पद पर तैनात हुए अभी एक माह ही हुआ था और उन्हें आधिकारिक रूप से कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई तथ्यों पर आधारित नहीं है।
यह पहला मौका नहीं है जब केवी सिंह विवादों में आए हों। इससे पहले भी उन्हें वर्क सर्किल-10 से हटाकर सर्किल-6 में तैनात किया गया था, जहां उन पर अवैध निर्माण को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे। उस दौरान भी कुछ विवाद सामने आए थे, जिनमें किसान संगठनों के बीच टकराव और मारपीट की घटनाएं शामिल थीं।
प्राधिकरण के भीतर इस कार्रवाई को एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि अवैध गतिविधियों और भ्रष्टाचार के मामलों में अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण और अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि यह एक व्यापक तंत्र की ओर इशारा करता है, जिसमें निगरानी और नियंत्रण की कमी का फायदा उठाया जाता है। ऐसे मामलों में नियमित ऑडिट, पारदर्शी प्रक्रिया और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।
फिलहाल, प्राधिकरण इस पूरे प्रकरण की विस्तृत समीक्षा कर रहा है और यह भी जांच की जा रही है कि कहीं अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल तो नहीं थे। आने वाले दिनों में और सख्त कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
यह घटनाक्रम एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में प्रशासनिक निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत क्यों है, ताकि सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके और नागरिकों का भरोसा कायम रखा जा सके।
