एटीएम मशीनों को निशाना बनाकर किए जा रहे ‘जैकपॉटिंग’ साइबर हमलों में तेजी आई है, जिससे बैंकिंग सिस्टम के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है। Federal Bureau of Investigation (FBI) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि इस तरह के हमलों से केवल पिछले वर्ष ही करीब 20 मिलियन डॉलर (लगभग ₹166 करोड़) का नुकसान हुआ है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, साल 2020 से अब तक अमेरिका में लगभग 1,900 एटीएम साइबर हमले हो चुके हैं, जिनमें से करीब 700 हमले केवल पिछले वर्ष दर्ज किए गए। यह आंकड़ा इस तेजी से बढ़ते साइबर अपराध की गंभीरता को दर्शाता है।
क्या है ATM Jackpotting और कैसे होता है हमला
‘ATM Jackpotting’ एक ऐसा साइबर हमला है, जिसमें अपराधी एटीएम मशीन को सीधे नियंत्रित कर उससे नकदी निकलवाते हैं। इसके लिए वे पहले मशीन को शारीरिक रूप से खोलते हैं और फिर उसके कंप्यूटर सिस्टम में मैलवेयर इंस्टॉल कर देते हैं।
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इसके बाद एटीएम को इस तरह प्रोग्राम किया जाता है कि वह बिना किसी वैध लेन-देन के अंदर मौजूद सारा कैश बाहर निकाल दे। इस पूरी प्रक्रिया में मशीन के सुरक्षा तंत्र को बायपास कर दिया जाता है, जिससे बैंक को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमले ज्यादातर उन एटीएम पर होते हैं जो शहरों से दूर या कम निगरानी वाले क्षेत्रों में लगे होते हैं। ऐसे स्थानों पर अपराधियों के लिए मशीन तक पहुंच बनाना अपेक्षाकृत आसान होता है।
पुराने सॉफ्टवेयर बन रहे सबसे बड़ी कमजोरी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, एटीएम मशीनों में इस्तेमाल हो रहे पुराने सॉफ्टवेयर इस खतरे की सबसे बड़ी वजह हैं। कई एटीएम अभी भी पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम पर चल रहे हैं, जिन्हें लंबे समय से अपडेट नहीं किया गया है।
इसी कमजोरी का फायदा उठाकर अपराधी मशीन के सिस्टम में घुसपैठ कर लेते हैं। एक साइबर सुरक्षा प्रोफेसर के अनुसार, “पुराने सॉफ्टवेयर के कारण हमलावर मशीन के अंदर मौजूद कंप्यूटर तक पहुंच बना लेते हैं और उसे नकदी निकालने के निर्देश दे देते हैं।”
संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह की भूमिका
FBI ने इस मामले में अब तक 93 लोगों पर आरोप तय किए हैं, जिन्हें एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है। यह गिरोह वेनेजुएला से जुड़े एक कुख्यात संगठन ‘Tren de Aragua’ से संबंधित माना जा रहा है, जो बड़े स्तर पर इस तरह के हमलों को अंजाम दे रहा है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित आपराधिक गतिविधि का हिस्सा हैं, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञता का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या ग्राहकों का डेटा भी खतरे में?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मैलवेयर में तकनीकी रूप से ग्राहकों के कार्ड डेटा को चोरी करने की क्षमता भी हो सकती है। हालांकि, अधिकतर मामलों में अपराधियों का मकसद केवल मशीन से नकदी निकालना होता है, न कि डेटा चोरी करना।
फिर भी सुरक्षा के लिहाज से यह खतरा पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, जिससे ग्राहकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
ATM इस्तेमाल करते समय बरतें ये सावधानियां
विशेषज्ञों ने एटीएम इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है:
- एटीएम के कार्ड स्लॉट को ध्यान से देखें—यदि वह ढीला या असामान्य लगे तो इस्तेमाल न करें
- कीपैड अगर दबाने पर अलग महसूस हो या ठीक से फिट न हो तो सतर्क रहें
- मशीन पर किसी भी तरह की छेड़छाड़ के संकेत दिखें तो तुरंत वहां से हट जाएं
- संदिग्ध एटीएम की जानकारी तुरंत बैंक या संबंधित अधिकारियों को दें
- अपने बैंक खाते पर SMS या ईमेल अलर्ट सक्रिय रखें
बढ़ती लागत का असर आम ग्राहकों पर
विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के साइबर अपराधों से होने वाला नुकसान अंततः आम ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। बैंक अपनी सुरक्षा लागत और बीमा खर्च को कवर करने के लिए सेवाओं की कीमत बढ़ा सकते हैं।
यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि डिजिटल और बैंकिंग ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए लगातार तकनीकी अपग्रेड और निगरानी जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय मजबूत नहीं किए गए, तो ऐसे साइबर हमलों का दायरा और भी बढ़ सकता है।
