हैदराबाद: तेज कमाई के लालच में लोगों को फंसाने वाले एक कथित ‘QNet-स्टाइल’ मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) फ्रॉड का बड़ा खुलासा हुआ है। ई-कॉमर्स बिजनेस के नाम पर चल रहे इस नेटवर्क में पीड़ितों से लाखों रुपये निवेश करवाए गए, जिसके बाद मामला गंभीर होता देख इसे सेंट्रल क्राइम स्टेशन (CCS) को सौंप दिया गया है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुट गई हैं।
शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने पीड़ित को एक आकर्षक बिजनेस मॉडल का झांसा दिया, जिसमें हर महीने ₹1 लाख तक कमाई का दावा किया गया। भरोसा दिलाने के लिए आरोपियों ने अपनी कथित सफलता की कहानियां सुनाईं—महंगे मोबाइल खरीदने और पुराने कर्ज चुकाने जैसे उदाहरण देकर स्कीम को विश्वसनीय बनाया गया।
‘सपनों की मीटिंग’ से शुरू हुआ दबाव का खेल
जांच में सामने आया कि पीड़ित को बंजारा हिल्स स्थित एक मीटिंग में बुलाया गया, जहां कई लोग खुद को “टीम लीडर” बताकर मौजूद थे। यहां स्कीम को पेशेवर अंदाज में प्रस्तुत किया गया और निवेश के लिए माहौल तैयार किया गया।
FCRF Launches Premier CISO Certification Amid Rising Demand for Cybersecurity Leadership
जब पीड़ित ने आर्थिक असमर्थता जताई, तो आरोपियों ने उसे बैंक से लोन लेने के लिए राजी किया। उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर कर्ज दिलवाया गया और पूरी रकम स्कीम में लगा दी गई। यह तरीका केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि कई लोगों के साथ इसी पैटर्न पर काम किया गया।
कैसे काम करता है यह ‘बाइनरी’ MLM जाल
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क एक ‘बाइनरी स्ट्रक्चर’ पर आधारित था। इसमें हर सदस्य को कम से कम दो नए लोगों को जोड़ना होता था, जिससे एक चेन बनती जाती थी—ऊपर ‘अपलाइनर’ और नीचे ‘डाउनलाइनर’ का नेटवर्क।
कमाई का आधार किसी प्रोडक्ट की बिक्री नहीं, बल्कि नए सदस्यों की भर्ती था। जितने ज्यादा लोग जुड़ते, उतना अधिक कमाई का वादा किया जाता। लेकिन जैसे ही नए लोगों की भर्ती रुकती, यह सिस्टम ढह जाता—और अधिकतर निवेशकों को भारी नुकसान झेलना पड़ता।
ऑनलाइन मीटिंग, कॉल और धमकियों से बनाया जाता था दबाव
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी केवल ऑफलाइन मीटिंग तक सीमित नहीं थे। वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लगातार संपर्क में रहते थे—वीडियो कॉल, मैसेज और सेमिनार के माध्यम से पीड़ितों पर दबाव बनाया जाता था।
कुछ मामलों में, जब लोग निवेश से पीछे हटने की कोशिश करते, तो उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाता और नए लोगों को जोड़ने के लिए मजबूर किया जाता था। इस तरह यह नेटवर्क मनोवैज्ञानिक दबाव और लालच दोनों का इस्तेमाल कर रहा था।
देशभर में फैले नेटवर्क के संकेत
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब इसी तरह के कई नेटवर्क पर कार्रवाई तेज हुई है। हाल के अभियानों में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में जुड़े मामलों में कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क केवल एक शहर तक सीमित नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला भी बना आधार
जांच के दौरान 2008 में आए सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले—‘Kuriachan Chacko बनाम State of Kerala’—का भी हवाला दिया गया है। इस फैसले में ऐसे MLM मॉडल को “गणितीय रूप से असंभव” बताया गया था, क्योंकि यह केवल नए लोगों की भर्ती पर निर्भर करता है और अंततः अधिकांश लोग नुकसान में रहते हैं।
किन लोगों को बनाया जा रहा है निशाना
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस तरह की स्कीमें खासतौर पर आईटी कर्मचारियों, नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं और गृहिणियों को निशाना बनाती हैं। इन्हें जल्दी अमीर बनने का सपना दिखाया जाता है और स्कीम की असली प्रकृति छुपाई जाती है।
कई मामलों में पीड़ितों को अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को जोड़ने के लिए भी दबाव डाला जाता है, जिससे यह जाल तेजी से फैलता है।
कानूनी चेतावनी और आगे की कार्रवाई
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की बाइनरी और पोंजी स्कीमें ‘Prize Chits and Money Circulation Schemes (Banning) Act, 1978’ के तहत प्रतिबंधित हैं। ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है।
फिलहाल, CCS इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की पहचान होने की संभावना है। यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि आसान पैसे का लालच किस तरह लोगों को बड़े आर्थिक जाल में फंसा सकता है।
