पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय के खुलासे ने बिहार में अपहरण नेटवर्क, पुलिस प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी।

बिहार में अपहरण का गहरा जाल: पूर्व DGP का IPS अधिकारी पर सनसनीखेज आरोप

Team The420
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पटना: राज्य के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने पटना एयरपोर्ट पर एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि आंध्रप्रदेश कैडर के एक आईपीएस अधिकारी ने बिहार में अपहरण की घटनाओं को संगठित रूप से शुरू कराया। पांडेय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह जानकारी वह ऑन रिकॉर्ड साझा कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह अधिकारी बिहार में प्रतिनियुक्ति पर आए थे और बेतिया जिले में एसपी के पद पर तैनात थे।

पूर्व डीजीपी ने बताया कि उस समय बगहा और बेतिया में डकैती सबसे बड़ी समस्या थी। बड़े-बड़े डकैत गिरोह सक्रिय थे और पुलिस मुख्यालय पर दबाव रहता था कि डकैती रोकी जाए। इसी दबाव के चलते उक्त आईपीएस अधिकारी ने डकैतों के साथ समझौता किया। उन्होंने डकैतों को कहा कि डकैती बंद करें और अगर वे नहीं मानते, तो पैसे वालों को पकड़ कर फिर पैसे लेकर छोड़ दें। इसी सुझाव के बाद बिहार में अपहरण की घटनाओं की शुरुआत हुई, जो धीरे-धीरे पूरे राज्य में फैल गई।

गुप्तेश्वर पांडेय ने यह भी कहा कि राज्य के कई वरिष्ठ पुलिस अफसरों को इस मामले का पहले से पता था। उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस अवैध धंधे को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए। पांडेय ने नीतीश कुमार के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में राज्य की विधि-व्यवस्था मजबूत हुई और अपहरण का यह नेटवर्क नियंत्रित हुआ।

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पूर्व डीजीपी ने वर्तमान डीजीपी की भी तारीफ की और कहा कि वह बेदाग अफसर हैं। उन्होंने बताया कि वे कई पदों पर उनके साथ काम कर चुके हैं और सिस्टम में कुछ कमियां हो सकती हैं, लेकिन उनकी नीयत साफ और ईमानदार है। पांडेय ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है, लेकिन सही दिशा में कार्रवाई करने से राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस अधिकारियों के गलत या लापरवाहीपूर्ण कदम न केवल कानून व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी संकट खड़ा कर सकते हैं। बिहार जैसे बड़े राज्य में अपराध के नेटवर्क का विस्तार स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर सीधा असर डालता है।

पूर्व डीजीपी ने मीडिया से बातचीत के दौरान चेतावनी दी कि अगर ऐसे मामलों की जांच और रोकथाम समय पर नहीं हुई, तो युवा और समाज दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अपहरण और अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त नीतियों का पालन करना आवश्यक है और सिस्टम में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

बता दें कि बिहार में अब भी अपहरण, डकैती और रंगदारी जैसी अपराध की घटनाएं sporadic रूप से सामने आती रहती हैं। इन घटनाओं को रोकने के लिए न केवल पुलिस बल्कि समाज और प्रशासनिक एजेंसियों का सहयोग भी आवश्यक है। पांडेय के खुलासे से यह साफ हो गया कि पुराने मामलों में भी शीर्ष स्तर के अधिकारियों की भूमिका और निर्णय जनता के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

पूर्व डीजीपी के आरोपों ने राज्य में कानून व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और गवर्नेंस के स्तर पर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब यह देखना बाकी है कि सरकार और पुलिस विभाग इस खुलासे के बाद क्या कार्रवाई करेंगे और पुराने मामलों की जांच को आगे बढ़ाएंगे या नहीं।

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