कोलकाता: बहु-करोड़ रुपये के साइबर ठगी नेटवर्क में बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी Pawan Ruia को अदालत ने सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। जांच में सामने आया है कि यह मामला केवल एक ठगी तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित और बहु-स्तरीय साइबर सिंडिकेट की ओर इशारा करता है, जिसमें फर्जी कंपनियों, बैंक खातों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सुनियोजित इस्तेमाल किया गया।
अदालत में पेशी के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है, जहां कई शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इन कंपनियों में ऐसे व्यक्तियों को डायरेक्टर बनाया गया, जिनके पास न तो कोई व्यावसायिक अनुभव था और न ही संबंधित योग्यता। अधिकारियों का मानना है कि यह पूरी संरचना केवल पैसों के प्रवाह को छिपाने और जांच एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए तैयार की गई थी।
मामले की शुरुआत एक बुजुर्ग व्यक्ति की शिकायत से हुई, जिन्हें एक मोबाइल ऐप के जरिए निवेश का लालच दिया गया। आरोप है कि पीड़ित को हाई रिटर्न का भरोसा दिलाकर ऐप डाउनलोड कराया गया और धीरे-धीरे उनसे ₹93 लाख की रकम ठग ली गई। शुरुआती दौर में फर्जी लाभ दिखाकर भरोसा कायम किया गया, लेकिन जब पीड़ित ने रकम निकालने की कोशिश की, तो उसे तकनीकी कारणों का हवाला देकर टाल दिया गया।
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जांच एजेंसियों ने पाया कि ठगी की रकम सीधे व्यक्तिगत खातों में नहीं गई, बल्कि कॉर्पोरेट चालू खातों और शेल कंपनियों के जरिए घुमाई गई। इस प्रक्रिया में कई स्तरों पर लेन-देन किए गए, जिससे मनी ट्रेल को ट्रैक करना मुश्किल हो गया। अधिकारियों का कहना है कि यह तरीका पेशेवर साइबर गिरोहों द्वारा अपनाया जाता है, ताकि जांच को जटिल बनाया जा सके और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपी रहे।
प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिला है कि गिरोह ने डिजिटल तकनीकों और सोशल इंजीनियरिंग का व्यापक उपयोग किया। निवेश ऐप्स को वैध और आकर्षक प्लेटफॉर्म की तरह पेश किया गया, जिसमें यूजर्स को नियमित रिटर्न और बोनस का लालच दिया गया। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए संभावित शिकारों तक पहुंच बनाई गई और उन्हें योजनाबद्ध तरीके से जाल में फंसाया गया।
इस तरह के मामलों पर टिप्पणी करते हुए, प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं, “आज के साइबर अपराधी केवल तकनीकी खामियों का फायदा नहीं उठाते, बल्कि वे लोगों के व्यवहार और भरोसे को निशाना बनाते हैं। फर्जी ऐप्स और निवेश प्लेटफॉर्म्स के जरिए ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां शुरुआती लाभ दिखाकर लोगों को बड़े निवेश के लिए प्रेरित किया जाता है।”
जांच के दौरान कई बैंक खातों की पहचान हुई है, जिन्हें ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में इस्तेमाल किया गया। इन खातों के जरिए पैसे को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर किया गया, जिससे ट्रांजैक्शन का वास्तविक स्रोत और गंतव्य छिपा रहे। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क में कई राज्यों के लोग शामिल हो सकते हैं और इसकी पहुंच राष्ट्रीय स्तर तक फैली हो सकती है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि उससे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा सके। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं, कितनी शेल कंपनियां बनाई गईं और कुल कितनी रकम का लेन-देन हुआ।
साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और मल्टी-लेयर बैंकिंग ट्रांजैक्शन के इस्तेमाल को देखते हुए अधिकारियों को आशंका है कि इसमें विदेशी कनेक्शन भी हो सकते हैं।
यह मामला एक बार फिर डिजिटल निवेश के नाम पर हो रही ठगी के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान ऐप या प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की पूरी जांच जरूरी है। केवल अधिकृत और भरोसेमंद माध्यमों का ही उपयोग करें, और किसी भी तरह के “गारंटीड रिटर्न” के दावों से सतर्क रहें
