ग्रेटर नोएडा: बहुप्रतीक्षित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान सेवाएं शुरू होने की राह में एक नया प्रशासनिक और कानूनी पेंच सामने आया है। एयरपोर्ट का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और उद्घाटन भी हो चुका है, लेकिन अब सुरक्षा मंजूरी से जुड़ी जटिलताओं के कारण इसकी शुरुआत में देरी होती दिख रही है। विवाद की जड़ एयरपोर्ट के CEO की विदेशी नागरिकता और उससे जुड़े सुरक्षा नियम हैं।
जानकारी के मुताबिक, एयरपोर्ट संचालन से पहले सबसे अहम प्रक्रिया ‘एयरपोर्ट सिक्योरिटी प्लान’ (ASP) को मंजूरी दिलाना होती है। यह मंजूरी ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) द्वारा दी जाती है। लेकिन इस मामले में BCAS ने सुरक्षा योजना को अंतिम स्वीकृति नहीं दी है, जिससे पूरे प्रोजेक्ट की टाइमलाइन प्रभावित हो रही है।
अधिकारियों के अनुसार, समस्या का मुख्य कारण यह है कि एयरपोर्ट संचालित करने वाली कंपनी में CEO की भूमिका के साथ-साथ ‘सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर’ की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। वर्तमान ढांचे में यह पद एक विदेशी नागरिक के पास है, जबकि गृह मंत्रालय के नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण पद पर केवल भारतीय नागरिक ही नियुक्त हो सकता है।
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बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट का संचालन करने वाली निजी कंपनी को 40 वर्षों के लिए संचालन का अधिकार मिला हुआ है। कंपनी के CEO ने निर्माण और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन उनकी विदेशी नागरिकता अब संचालन के अंतिम चरण में बाधा बनती दिख रही है।
सूत्रों के अनुसार, BCAS ने अपने मूल्यांकन के दौरान यह मुद्दा उठाया और स्पष्ट किया कि सुरक्षा प्रोटोकॉल से जुड़े संवेदनशील फैसले किसी विदेशी नागरिक को सौंपना नियमों के अनुरूप नहीं है। यही कारण है कि एयरपोर्ट सिक्योरिटी प्लान को अभी तक मंजूरी नहीं मिल सकी है।
इस स्थिति को सुलझाने के लिए राज्य सरकार, एयरपोर्ट प्राधिकरण और संचालन कंपनी के बीच लगातार बातचीत चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि एक ‘मिडल पाथ’ निकालने की कोशिश की जा रही है, जिसमें सुरक्षा से जुड़े निर्णयों के लिए किसी भारतीय अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जबकि CEO अपनी प्रशासनिक भूमिका में बने रह सकते हैं।
हालांकि, यदि यह समाधान गृह मंत्रालय और BCAS को स्वीकार्य नहीं होता है, तो कंपनी पर CEO स्तर पर बदलाव करने का दबाव बन सकता है। इससे न केवल संचालन संरचना प्रभावित होगी, बल्कि परियोजना की समयसीमा भी आगे खिसक सकती है।
एयरपोर्ट से उड़ान शुरू होने के लिए ASP की मंजूरी अनिवार्य है। इसके बिना न तो एयरलाइंस अपने संचालन की तैयारी कर सकती हैं और न ही ग्राउंड स्टाफ को एंट्री पास जारी किए जा सकते हैं। BCAS द्वारा जारी किए जाने वाले ये पास सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं, और इनके बिना एयरपोर्ट पर कोई भी गतिविधि शुरू नहीं हो सकती।
विशेषज्ञों का मानना है कि ASP मंजूरी मिलने के बाद भी उड़ान सेवाएं शुरू होने में कम से कम चार से छह सप्ताह का समय लगेगा। इस दौरान स्टाफ की तैनाती, सुरक्षा जांच और अन्य संचालन संबंधी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में केवल निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि नियामकीय और सुरक्षा मंजूरी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। खासकर एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील सेक्टर में नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होता है।
फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संबंधित एजेंसियां इस गतिरोध का समाधान निकाल पाती हैं या नहीं। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यात्रियों को इस बहुप्रतीक्षित एयरपोर्ट से उड़ान भरने के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है।
यह मामला न केवल एक प्रोजेक्ट में आई बाधा को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों में किसी भी प्रकार की ढील संभव नहीं है—चाहे प्रोजेक्ट कितना ही बड़ा या महत्वपूर्ण क्यों न हो।
