लोकसभा में वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman का बयान; 150 गिरफ्तार, भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर भी कड़ी कार्रवाई

बैंक फ्रॉड पर बड़ा खुलासा: 1,105 मामलों की जांच, ₹64,920 करोड़ की संपत्ति जब्त

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By Roopa
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नई दिल्ली: देश में बढ़ते बैंक धोखाधड़ी मामलों के बीच केंद्र सरकार ने सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत अब तक 1,105 बैंक फ्रॉड मामलों की जांच की है और ₹64,920 करोड़ की अपराध से अर्जित संपत्ति जब्त की गई है। यह खुलासा संसद में उस समय हुआ जब आर्थिक अपराधों और दिवालियापन कानून में संशोधन पर चर्चा चल रही थी।

वित्त मंत्री ने अपने बयान में कहा कि इन मामलों में अब तक 150 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 277 अभियोग शिकायतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, आठ आरोपियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि बड़े आर्थिक अपराधों में शामिल लोग विदेश भागकर कानून से बचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अब उन पर शिकंजा कसता जा रहा है।

उन्होंने बताया कि भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA), 2018 को इसी उद्देश्य से लागू किया गया था, ताकि ₹100 करोड़ या उससे अधिक के आर्थिक अपराध करने वाले आरोपी विदेश में रहकर भारतीय कानून से बच न सकें। इस कानून के तहत दोषियों की संपत्तियों की जब्ती, बेनामी संपत्तियों को कुर्क करना, लुकआउट नोटिस जारी करना और पूंजी बाजार में उनकी भागीदारी पर रोक जैसे कड़े प्रावधान लागू किए जाते हैं।

संसद में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि अब तक ₹15,186 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है, जिसमें से ₹15,183 करोड़ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वापस कर दिए गए हैं। यह राशि बैंकों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है और इससे बैंकिंग सिस्टम में भरोसा मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में भी कार्रवाई तेज हुई है। मंत्री के अनुसार, तीन आरोपियों को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत दोषी ठहराया जा चुका है। यह दर्शाता है कि जांच एजेंसियां न केवल मामलों की जांच कर रही हैं, बल्कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया तक भी पहुंचा रही हैं, जिससे दोषियों को सजा मिल सके।

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पीएमसी बैंक धोखाधड़ी का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि इस मामले में भी ईडी की मदद से ₹104 करोड़ की राशि बरामद की गई है। इसके साथ ही भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत ₹725 करोड़ की संपत्तियां जब्त की गईं। यह कार्रवाई उन मामलों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां बड़े पैमाने पर जमाकर्ताओं का पैसा फंसा हुआ था।

लोकसभा में यह बयान उस समय आया जब दिवालियापन और दिवालिया संहिता (IBC) में संशोधन से जुड़े विधेयक पर चर्चा हो रही थी। कई सदस्यों ने बहस के दौरान आर्थिक अपराधों और देश से फरार आरोपियों का मुद्दा उठाया था, जिसके जवाब में सरकार ने अपनी कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा पेश किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक अपराधों पर सख्ती से निपटना जरूरी है, क्योंकि ऐसे मामलों का सीधा असर बैंकिंग प्रणाली, निवेशकों के भरोसे और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। बड़े पैमाने पर की गई संपत्ति जब्ती और आरोपियों की गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि सरकार अब इस तरह के अपराधों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने, जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने और समय रहते धोखाधड़ी की पहचान करने की व्यवस्था भी जरूरी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन सख्त कदमों का बैंकिंग सेक्टर पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और क्या इससे बड़े आर्थिक अपराधों पर प्रभावी रोक लग पाती है।

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