बरेली: ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग के नाम पर देशभर में ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य सरगना अभी फरार है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह 16 राज्यों में सक्रिय था और अब तक इसके खिलाफ 18 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नवाबगंज के आदर्शनगर निवासी सूर्यभान और भुता क्षेत्र के कमुआ गांव निवासी विनीत के रूप में हुई है। दोनों आरोपी साझेदारी में कॉल सेंटर चला रहे थे। पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया कि गिरोह का सरगना अहलादपुर निवासी शिवम है, जो फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर है और उसकी तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से जुड़े एक मोबाइल नंबर की जानकारी एनसीआरपी और प्रतिबिंब पोर्टल के जरिए मिली थी। तकनीकी जांच में यह नंबर बरेली के आशुतोष सिटी क्षेत्र में सक्रिय पाया गया। इसके आधार पर पुलिस ने वहां छापेमारी की। टीम को देखकर तीन युवक मौके से भागने लगे, लेकिन घेराबंदी कर दो को पकड़ लिया गया, जबकि एक फरार हो गया।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने आशुतोष सिटी में पूरा मकान किराये पर ले रखा था, जहां से कॉल सेंटर संचालित किया जाता था। मकान मालिक को उन्होंने खुद को बैंक से जुड़ा कर्मचारी बताया था, जिससे उन्हें आसानी से मकान मिल गया। यह सेटअप वर्ष 2022 से चल रहा था और यहीं से देशभर के लोगों को निशाना बनाया जाता था।
गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित थी। आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए “कम समय में ज्यादा कमाई” के विज्ञापन चलाते थे। इन विज्ञापनों के जरिए लोगों को फंसाया जाता था और फिर कॉल सेंटर से उन्हें फोन कर विभिन्न ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग वेबसाइट्स पर पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था। इन साइट्स में वन एक्स बेट, एविएटर, फेयरप्ले, सिल्वरभाई, क्रिक्सबेट99, महादेव और महाकाल समेत करीब 15 से 16 वेबसाइट शामिल थीं।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
आरोपियों ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति कम रकम जीतता था, तो उसे भुगतान कर दिया जाता था ताकि विश्वास बना रहे। लेकिन जैसे ही कोई बड़ी रकम जीतता, उसका डेटा सिस्टम से हटा दिया जाता और उसका नंबर ब्लॉक कर दिया जाता था। इस तरह उसकी पूरी राशि हड़प ली जाती थी। इसी धोखाधड़ी के चलते इस गिरोह के खिलाफ विभिन्न राज्यों में लगातार शिकायतें दर्ज होती रहीं।
पुलिस ने कॉल सेंटर से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें सात मोबाइल फोन, तीन वाई-फाई राउटर, सात डिजिटल क्यूआर डिवाइस, एक क्यूआर कोड, 12 सिम रैपर, सात चेकबुक, सात चेक, पांच पासबुक, सात बैंक अकाउंट किट, 13 डेबिट कार्ड और साइबर अपराध से जुड़े 353 पन्नों के दस्तावेज शामिल हैं। बरामद सामग्री से अंदाजा लगाया जा रहा है कि गिरोह का संचालन बड़े पैमाने पर किया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि एक शिकायत में ₹2.05 लाख की ठगी दर्ज थी, जिसकी जांच के दौरान मोबाइल नंबर की लोकेशन ट्रेस कर पुलिस इस कॉल सेंटर तक पहुंची। तकनीकी जांच में यह भी पता चला कि इस्तेमाल किया जा रहा नंबर एक टैबलेट से जुड़ा हुआ था, जो सरगना के पास था।
पुलिस का कहना है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, झारखंड, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, पंजाब, असम, गुजरात, ओडिशा, मध्य प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सक्रिय था। अभी और शिकायतें सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल पुलिस फरार सरगना की तलाश में जुटी है और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
