हैदराबाद: साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच पीड़ितों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। Telangana में आयोजित पहली लोक अदालत 2026 के दौरान 4,627 साइबर अपराध पीड़ितों को कुल ₹24.91 करोड़ की राशि वापस दिलाई गई। यह कार्रवाई साइबर फ्रॉड मामलों में तेजी से न्याय और रिकवरी सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
यह विशेष लोक अदालत 28 मार्च को आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न साइबर इकाइयों, बैंकों, डिजिटल पेमेंट सेवा प्रदाताओं और न्यायिक तंत्र के बीच समन्वय स्थापित कर लंबित मामलों का तेजी से निपटारा किया गया। इस प्रक्रिया में पीड़ितों के खातों से धोखाधड़ी के जरिए निकाली गई राशि को ट्रेस कर वापस दिलाने पर फोकस रखा गया।
आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा रिकवरी राज्य की केंद्रीय साइबर इकाई के जरिए हुई, जहां ₹5.64 करोड़ की राशि 87 पीड़ितों को लौटाई गई। इसके अलावा मल्काजगिरी यूनिट ने ₹4.79 करोड़ 832 पीड़ितों को वापस दिलाए, जबकि हैदराबाद यूनिट ने ₹3.99 करोड़ की राशि 553 लोगों को लौटाई। वहीं साइबराबाद और संगारेड्डी इकाइयों ने भी अहम भूमिका निभाते हुए क्रमशः ₹1.52 करोड़ की रिकवरी कर सैकड़ों पीड़ितों को राहत पहुंचाई।
साइबर ठगी के मामलों में इस तरह की सामूहिक कार्रवाई को विशेषज्ञ एक प्रभावी मॉडल मान रहे हैं। इसमें पुलिस इकाइयों, बैंकिंग सिस्टम और डिजिटल पेमेंट नेटवर्क के बीच रियल-टाइम समन्वय बेहद अहम साबित हुआ है। इससे न सिर्फ रकम की ट्रैकिंग आसान हुई, बल्कि उसे समय पर फ्रीज कर वापस करने की प्रक्रिया भी तेज हुई।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
राज्य में साइबर अपराध पीड़ितों को राहत पहुंचाने की यह पहल लगातार मजबूत होती दिख रही है। स्थापना के बाद से अब तक कुल ₹399.06 करोड़ की राशि 53,434 पीड़ितों को लौटाई जा चुकी है। पिछले तीन वर्षों के आंकड़े इस दिशा में तेज प्रगति को दर्शाते हैं।
साल 2023 में जहां केवल ₹8.3 करोड़ की रिकवरी हुई थी, वहीं 2024 में यह आंकड़ा तेजी से बढ़कर ₹183.9 करोड़ तक पहुंच गया। इसके बाद 2025 में भी लगभग ₹183 करोड़ की राशि पीड़ितों को वापस दिलाई गई। यह लगातार वृद्धि बताती है कि साइबर अपराधों के खिलाफ राज्य की रणनीति अब अधिक प्रभावी होती जा रही है।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम भूमिका समय पर शिकायत दर्ज कराने की मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, साइबर फ्रॉड के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। अगर पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कराता है, तो ट्रांजैक्शन को ट्रैक कर रकम को फ्रीज करने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए आम लोगों से अपील की गई है कि किसी भी तरह के साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। साथ ही, संबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं ताकि कार्रवाई तेजी से शुरू हो सके।
साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे के बीच इस तरह की लोक अदालतें पीड़ितों के लिए राहत का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही हैं। इससे न केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई संभव हो रही है, बल्कि लोगों में सिस्टम के प्रति भरोसा भी मजबूत हो रहा है।
आने वाले समय में इस मॉडल को और मजबूत करने की तैयारी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा मामलों में तेजी से रिकवरी हो सके और साइबर अपराधियों पर लगाम लगाई जा सके।
