2,600 फर्जी फर्मों और संगठित नेटवर्क के जरिए ₹20,000 करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी, अधिकारियों की निगाहें खुली की खुली रह गईं

स्क्रैप सेक्टर में फर्जी इनवॉइस और सर्कुलर ट्रेडिंग का खेल, UP में टैक्स चोरी का नया रिकॉर्ड

Roopa
By Roopa
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उत्तर प्रदेश का स्क्रैप सेक्टर अब टैक्स चोरी का नया हॉटस्पॉट बन गया है। हालिया जांच में सामने आया है कि इस सेक्टर में की गई टैक्स चोरी पान मसाला उद्योग से तीन गुना अधिक है। केंद्रीय एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, लोहा, तांबा और अन्य स्क्रैप व्यापार में लगभग ₹20,000 करोड़ की धोखाधड़ी हुई, जबकि पान मसाला और तंबाकू उद्योग में यह आंकड़ा लगभग ₹6,000 करोड़ ही था। प्रदेश स्तर पर भी इसी तरह के पैटर्न देखे गए हैं।

अधिकारियों का मानना है कि पान मसाला सेक्टर पर फोकस बनाए रखने के बहाने स्क्रैप लदे ट्रकों को हाईवे पर बिना रोक-टोक गुजरने दिया गया। इसके चलते बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की गतिविधियाँ आसानी से हो सकीं। जांच में यह भी पता चला है कि संगठित गिरोह ने नियामक खामियों का भरपूर फायदा उठाया।

मामलों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी

Directorate General of GST Intelligence (DGGI) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में स्क्रैप सेक्टर में 1,976 मामले दर्ज किए गए, जिनमें लगभग ₹16,806 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी गई। वहीं, पान मसाला और तंबाकू सेक्टर में 212 मामले सामने आए, जिनमें केवल ₹5,794 करोड़ की चोरी हुई। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों सेक्टरों में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, और प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि प्रदेश की कुछ बड़ी इस्पात कंपनियाँ भी स्क्रैप नेटवर्क में शामिल हो सकती हैं।

स्क्रैप माफिया का बड़ा सिंडिकेट

जीएसटी चोरी के खिलाफ चल रही कार्रवाइयों में स्क्रैप माफिया के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। हाल ही में गाजियाबाद में STF ने ₹100 करोड़ की जीएसटी धोखाधड़ी पकड़ी। इसी तरह, नोएडा पुलिस ने फर्जी कंपनियां चलाने वाले व्यापारियों को गिरफ्तार किया, जिनका घोटाला करोड़ों रुपये का था। जांच में सामने आया कि लगभग 2,600 फर्जी फर्में इस नेटवर्क में सक्रिय थीं। मेरठ और गाजियाबाद केंद्र बनाकर चल रहे ₹500 करोड़ के फर्जी इनवॉइस रैकेट को भी ध्वस्त किया गया।

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कैसे हो रहा है खेल

टैक्स चोरी मुख्यतः फर्जी इनवॉइसिंग और सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए होती है। प्रवासी मजदूरों और आम नागरिकों के आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर कागजी कंपनियां बनाई जाती हैं। ये कंपनियां केवल कागज पर लेन-देन दिखाती हैं, जबकि वास्तविक माल की सप्लाई नहीं होती।

व्यापारी छोटे कबाड़ियों से नकद में स्क्रैप खरीदकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) बढ़ाने के लिए फर्जी बिल बनाते हैं। एक ही स्क्रैप के बिलों को कई कंपनियों के बीच बार-बार घुमाया जाता है, जिससे नकली टर्नओवर बनता है। इस प्रक्रिया के जरिए कोटि-कोटि रुपये के फर्जी टैक्स क्रेडिट या रिफंड हासिल किए जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरे नेटवर्क GST निगरानी और प्रवर्तन तंत्र की खामियों को उजागर करता है। अब अधिकारी कड़ाई से सत्यापन, डिजिटल ऑडिट और वास्तविक समय में निगरानी पर जोर दे रहे हैं ताकि इस तरह की धोखाधड़ी रोकी जा सके।

प्रदेशव्यापी और क्रॉस‑सेक्टर प्रभाव

अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क गहराई तक फैला हुआ है, कई शहरों में फैला है और छोटे-बड़े व्यापारियों को इसमें शामिल किया गया है। STF की तेज कार्रवाई का मकसद न केवल अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाना, बल्कि व्यापारियों और करदाताओं को सतर्क करना भी है।

राज्य और केंद्र एजेंसियां मिलकर इस तरह के नेटवर्क का पता लगाने और अन्य वस्तु क्षेत्रों में इसी तरह की धोखाधड़ी रोकने की कोशिश कर रही हैं। UP मामला साफ दर्शाता है कि जबकि पान मसाला जैसी हाई‑प्रोफाइल इंडस्ट्री पर निगरानी रहती है, स्क्रैप जैसी कम-देखी जाने वाली इंडस्ट्री संगठित वित्तीय अपराध का अड्डा बन सकती है।

इसलिए विशेषज्ञ और अधिकारी सख्त निगरानी, डिजिटल ऑडिट और मजबूत प्रवर्तन ढांचे की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

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