नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पंजाब नेशनल बैंक, नजफगढ़, दिल्ली से जुड़े एक मामले में फरार आरोपी विपिन राठी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि वह बैंक को लगभग ₹4.11 करोड़ का नुकसान पहुँचाने वाले घोटाले में शामिल था। विपिन राठी 2017 से फरार था और अब उसे पकड़ लिया गया है।
CBI ने 2015 में इस मामले में निजी व्यक्तियों राजेंद्र भूषण शर्मा, मीरा शर्मा, कृष्ण कुमार और M/s RBM Developers Pvt. Ltd. समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप है कि इन आरोपियों ने सांठ‑गांठ कर पंजाब नेशनल बैंक को धोखा दिया, और जांच में बाद में विपिन राठी की भूमिका भी सामने आई।
मुकदमे की कार्रवाई के दौरान, विपिन राठी अदालत में हाजिर नहीं हुए, और लगातार प्रयासों के बावजूद उनकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी। सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, 18 सितंबर 2017 को उन्हें Proclaimed Offender घोषित किया गया।
जांच में यह खुलासा हुआ कि विपिन राठी दिल्ली के शाहदरा, बलबीर नगर में किराए के घर में रह रहा था और राधु पैलेस मॉल, स्वास्थ्य विहार में MCD पार्किंग में कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था। आरोपी ने कई बार अपना पता बदल लिया था ताकि उसे ट्रेस न किया जा सके।
CBI अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया पूरी कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह गिरफ्तारी मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, क्योंकि आरोपी लंबे समय से फरार था।
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विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे घोटालों में सार्वजनिक बैंक और निजी निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सतर्कता और लगातार निगरानी जरूरी है। साथ ही, डिजिटल लेनदेन में असामान्य गतिविधियों का तुरंत पता लगाना और जांच करना भी अहम है।
इस गिरफ्तारी से यह संदेश गया कि कानून और जांच एजेंसियां किसी भी समय अपराधियों को पकड़ने में सक्षम हैं, चाहे वह लंबे समय से फरार क्यों न हों।
CBI ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित बैंक या साइबर क्राइम शाखा को दें। यह कदम ऐसे घोटालों की रोकथाम और वित्तीय सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है।
यह गिरफ्तारी न केवल फरार आरोपी की पहचान और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करती है, बल्कि अन्य संभावित अपराधियों के लिए भी सावधान करने वाला संदेश देती है।
CBI और अन्य जांच एजेंसियां इस मामले की पूरी जांच कर रही हैं ताकि सभी आरोपी और उनके अपराध अदालत में साबित किए जा सकें और वित्तीय संस्थानों में भरोसा कायम रहे।
