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फर्जी फर्म से ₹2.5 करोड़ का खेल’: पंचायत कार्यों में घोटाले पर खंड प्रेरक बर्खास्त, 25 सचिवों का वेतन रोका

Team The420
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कानपुर। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर फर्जी फर्म बनाकर ₹2.5 करोड़ से अधिक का भुगतान लेने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए घाटमपुर ब्लॉक के खंड प्रेरक ऋत्विज त्रिवेदी को बर्खास्त कर दिया है। जिला स्वच्छता समिति की बैठक में लिए गए इस फैसले के साथ ही पंचायत स्तर पर चल रहे कार्यों और वित्तीय लेनदेन पर सख्त निगरानी के संकेत मिल गए हैं।

जांच में सामने आया कि आरोपित खंड प्रेरक ने अपनी ही फर्म ‘एवी कंस्ट्रक्शन’ के नाम से ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराए और वर्षों के दौरान करोड़ों रुपये का भुगतान हासिल किया। यह फर्म ऋत्विज त्रिवेदी के नाम से पंजीकृत थी और इसे विभिन्न पंचायतों से बड़े पैमाने पर भुगतान किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया शासनादेश के स्पष्ट उल्लंघन में थी, क्योंकि पंचायत विभाग से जुड़े कर्मियों द्वारा स्वयं या परिजनों के नाम से फर्म बनाकर काम कराना प्रतिबंधित है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने फर्म के माध्यम से कराए गए 10 बड़े कार्यों की अलग से जांच कराने के आदेश दिए हैं। इन कार्यों में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण, नाली, सड़क, खड़ंजा और आरआरसी सेंटर जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं, जो स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त से संचालित योजनाओं के तहत किए गए थे।

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जांच टीम ने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल और जीएसटी विवरण के आधार पर वित्तीय लेनदेन का विस्तृत परीक्षण किया। इसमें स्पष्ट हुआ कि पंचायतों से जारी किए गए भुगतान सीधे फर्म के खाते में पहुंचे। जांच में यह भी संकेत मिले कि इस पूरे नेटवर्क में अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है, हालांकि अभी तक किसी सचिव पर सीधी कार्रवाई नहीं की गई है।

प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही और निगरानी में कमी को देखते हुए 25 ग्राम पंचायत सचिवों का फरवरी माह का वेतन रोक दिया गया है। इसके अलावा राहा और बीबीपुर ग्राम पंचायत के सचिव जयप्रकाश और दिव्यांशु पांडेय के खिलाफ विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की गई है। यह कदम साफ संकेत देता है कि जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया अब और सख्त होगी।

सूत्रों के अनुसार, मामले में पारिवारिक मिलीभगत के भी संकेत मिले हैं। आरोप है कि खंड प्रेरक के भाई, जो दूसरे ब्लॉक में इसी पद पर कार्यरत हैं, और उनकी भाभी, जो ग्राम पंचायत सचिव हैं, ने आपसी समन्वय से योजनाओं में ठेकेदारी कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। इस तरह की संरचना के जरिए योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता खत्म कर दी गई और नियमों को दरकिनार किया गया।

प्रशासन का मानना है कि इस तरह के मामलों से न केवल सरकारी धन का नुकसान होता है, बल्कि विकास योजनाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं। इसलिए इस मामले को एक उदाहरण बनाकर आगे की कार्रवाई की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।

जिला स्तर पर गठित जांच टीम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया था, जिन्होंने भुगतान प्रक्रिया, कार्यों की गुणवत्ता और फर्म के संचालन से जुड़े पहलुओं की गहन पड़ताल की। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह सख्त कार्रवाई की गई है।

फिलहाल प्रशासन अन्य संबंधित कर्मचारियों और संभावित लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि आगे की जांच में और नाम सामने आते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत स्तर पर किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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