विशाखापट्टनम में विदेशी नौकरी का झांसा देकर युवाओं को थाईलैंड और कंबोडिया भेजकर साइबर ठगी में धकेलने वाले रैकेट के मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी।

विदेशी नौकरी का झांसा, साइबर गुलामी का जाल: विशाखापट्टनम से मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Team The420
5 Min Read

विशाखापट्टनम। विदेश में नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर युवाओं को साइबर अपराध में धकेलने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। शहर में चलाए गए अभियान के दौरान पुलिस ने साइबर गुलामी रैकेट के मास्टरमाइंड बोंगु मुरली को गिरफ्तार किया है, जो बेरोजगार युवाओं को उच्च वेतन वाली नौकरी का लालच देकर विदेश भेजता था और वहां उन्हें जबरन साइबर ठगी में शामिल कराया जाता था।

जांच में सामने आया कि आरोपी शहर के आई टाउन क्षेत्र के प्रसाद गार्डन्स का रहने वाला है और ‘कनका दुर्गा’ नाम से एक संस्थान चलाता था। इसी संस्थान के जरिए वह युवाओं को डेटा एंट्री और अन्य आकर्षक नौकरियों का झांसा देता था। भरोसा जीतने के बाद उनसे मोटी रकम वसूल कर उन्हें थाईलैंड, म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों में भेज दिया जाता था।

लेकिन विदेश पहुंचने के बाद सच्चाई बिल्कुल अलग होती थी। पीड़ितों को कथित जॉब की जगह साइबर फ्रॉड नेटवर्क में झोंक दिया जाता था, जहां उनसे ऑनलाइन ठगी, फिशिंग और अन्य साइबर अपराध करवाए जाते थे। विरोध करने पर उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता था।

FutureCrime Summit 2026 Calls for Speakers From Government, Industry and Academia

मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित, जिसे कंबोडिया भेजा गया था, किसी तरह वापस भारत लौटा और शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि वहां उसे जबरन साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया गया और मना करने पर उसे प्रताड़ित किया गया। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया और जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच के दौरान आरोपी ने अपराध कबूल कर लिया। उसने स्वीकार किया कि वह युवाओं से पैसे लेकर उनकी फ्लाइट बुक करता था और उन्हें विदेश भेजता था, जहां पहले से सक्रिय साइबर गैंग्स के हवाले कर दिया जाता था। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ पहले से ही धोखाधड़ी और ठगी के नौ मामले दर्ज हैं, जो इस नेटवर्क के लंबे समय से सक्रिय होने की ओर इशारा करते हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए लुक आउट सर्कुलर भी जारी किया गया है, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को पकड़ा जा सके। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस गिरोह के तार किन-किन देशों और संगठनों से जुड़े हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला “साइबर स्लेवरी” के बढ़ते खतरे को उजागर करता है, जिसमें युवाओं को बेहतर भविष्य का लालच देकर अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध में धकेल दिया जाता है। इस तरह के नेटवर्क खासतौर पर बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाते हैं, जो जल्दी पैसा कमाने के अवसर तलाश रहे होते हैं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “ऐसे मामलों में अपराधी सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर भरोसा जीतते हैं और फिर पीड़ितों को जाल में फंसा लेते हैं। विदेश में नौकरी के नाम पर होने वाले ऑफर्स की पूरी जांच जरूरी है, वरना यह सीधे साइबर अपराध और मानव तस्करी से जुड़ सकता है।”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि साइबर अपराध अब सीमाओं से परे हो चुका है और इसके नेटवर्क कई देशों में फैले होते हैं, जिससे पीड़ितों के लिए बच निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है।

इस मामले के सामने आने के बाद आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से युवाओं को विदेश में नौकरी के प्रस्तावों को लेकर पूरी जांच-पड़ताल करने, अधिकृत एजेंसियों से ही संपर्क करने और संदिग्ध ऑफर्स से बचने की हिदायत दी गई है।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह मामला अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध और मानव तस्करी के खतरनाक गठजोड़ की एक और कड़ी के रूप में सामने आ रहा है, जो कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

हमसे जुड़ें

Share This Article