फर्जी ऐप में दिखाए गए नकली मुनाफे, SEBI सर्टिफिकेट का सहारा लेकर बढ़वाते रहे निवेश; निकासी के समय ‘टैक्स’ के नाम पर खुला खेल

व्हाट्सऐप ग्रुप से शुरू हुआ ‘ट्रेडिंग जाल’: मुंबई के प्रोजेक्ट मैनेजर से ₹1.23 करोड़ की ठगी

Team The420
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मुंबई। देश में तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन निवेश घोटालों के बीच मुंबई के प्रभादेवी इलाके से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 49 वर्षीय प्रोजेक्ट मैनेजर को फर्जी शेयर ट्रेडिंग स्कीम के जरिए ₹1.23 करोड़ का चूना लगा दिया गया। ठगों ने व्हाट्सऐप ग्रुप, नकली मोबाइल एप और बनावटी दस्तावेजों के जरिए ऐसा जाल बुना कि पीड़ित को लंबे समय तक ठगी का एहसास ही नहीं हुआ।

शिकायत के अनुसार, पीड़ित को 29 दिसंबर 2025 को एक अज्ञात नंबर से “W1001-ACME Wealth Private Limited Group” नामक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया। इस ग्रुप में शेयर बाजार में “पेयर ट्रेडिंग” और हाई रिटर्न वाले निवेश की बातें लगातार साझा की जाती थीं। कुछ ही दिनों में, 9 जनवरी 2026 को उसे एक और ग्रुप “ACME Wealth-VIPW72” में शामिल किया गया, जहां खुद को ‘प्रियांका चिकहलकर’ बताने वाली महिला ने उसे ट्रेडिंग के गुर सिखाने शुरू किए।

ठगों ने विश्वास जीतने के लिए 12 जनवरी को एक लिंक भेजकर “ACME Wealth Private Limited Group” नाम का मोबाइल एप डाउनलोड कराया। एप पर रजिस्ट्रेशन के लिए इनवाइट कोड दिया गया, जिससे पीड़ित का ट्रेडिंग अकाउंट बनाया गया। शुरुआत में उसने ₹1 लाख निवेश किए, जो एप में तुरंत दिखने लगे और उसी दिन 10% मुनाफा भी दर्शाया गया। यही वह मोड़ था, जहां से ठगी का सिलसिला तेज हो गया।

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धीरे-धीरे पीड़ित को बड़े निवेश के लिए उकसाया गया। जनवरी से फरवरी के बीच उसने अलग-अलग बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर और RTGS के जरिए लाखों रुपये जमा कर दिए। हर बार एप पर बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता रहा, जिससे उसे भरोसा होता गया कि उसका पैसा तेजी से बढ़ रहा है।

विश्वास को और मजबूत करने के लिए ठगों ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नाम से एक कथित प्रमाणपत्र भी साझा किया, जिस पर आधिकारिक मुहर जैसी दिखने वाली डिज़ाइन थी। इस दस्तावेज ने पीड़ित को यह यकीन दिला दिया कि वह किसी वैध और अधिकृत प्लेटफॉर्म में निवेश कर रहा है।

मामले ने तब मोड़ लिया जब 23 फरवरी 2026 को पीड़ित ने अपने खाते में दिख रहे ₹9.03 करोड़ निकालने की कोशिश की। ठगों ने निकासी प्रक्रिया पूरी करने के लिए 5% “टैक्स” जमा करने की मांग कर दी। पीड़ित ने सुझाव दिया कि यह राशि उसके मुनाफे से ही काट ली जाए, लेकिन ठगों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और भुगतान पर जोर देते रहे।

यहीं से उसे शक हुआ। आगे की जांच में सामने आया कि न तो कंपनी असली थी और न ही SEBI का प्रमाणपत्र। पूरा प्लेटफॉर्म एक सुनियोजित फर्जीवाड़ा था, जिसमें केवल नकली आंकड़े दिखाकर निवेशकों को फंसाया जा रहा था।

इसके बाद पीड़ित ने 10 मार्च को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कई मोबाइल नंबरों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया, जिससे पैसों के ट्रांजैक्शन को ट्रेस करना जटिल हो गया है।

जांच एजेंसियां अब उन खातों की पहचान करने में जुटी हैं, जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे, साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह गिरोह देश के भीतर सक्रिय है या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “ऐसे मामलों में ठग सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेते हैं। पहले छोटे मुनाफे दिखाकर भरोसा बनाया जाता है, फिर बड़े निवेश के लिए उकसाया जाता है। फर्जी ऐप और दस्तावेज इस ठगी को और विश्वसनीय बना देते हैं।”

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि ऑनलाइन निवेश के नाम पर तेजी से फैल रहे साइबर जाल में आम लोग ही नहीं, बल्कि पेशेवर वर्ग भी आसानी से फंस सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक, ऐप या व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए निवेश करने से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच जरूरी है, अन्यथा एक क्लिक में मेहनत की कमाई साफ हो सकती है।

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