उच्च रिटर्न का लालच देकर निवेशकों को फंसाया, क्रिप्टो में मिलती थी सैलरी; ₹97.70 लाख की ठगी का मामला उजागर

फर्जी शेयर स्कीम का ‘ग्लोबल जाल’: लोणावला से ऑपरेशन, हांगकांग से निगरानी

Team The420
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पुणे। महाराष्ट्र के लोणावला में एक विला से संचालित हो रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जहां से फर्जी शेयर ट्रेडिंग स्कीम के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा था। इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि शुरुआती जांच में ₹97.70 लाख की ठगी का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुल लेनदेन ₹1 करोड़ से अधिक का हो सकता है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोनिल अतुलकुमार मोदी (24), रवि गोकल प्रसाद जाट (21), रुद्रपाल सिंह गजेंद्रसिंह चौहान (22) और हंष कैलाश वर्मा (19) के रूप में हुई है। ये सभी अलग-अलग राज्यों—गुजरात, मध्य प्रदेश और मुंबई—से जुड़े हैं। सूचना के आधार पर लोणावला क्षेत्र में कई विला की तलाशी के बाद इन आरोपियों को पकड़ा गया, जिससे एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ।

मामले की शुरुआत एक पीड़ित की शिकायत से हुई, जिसमें बताया गया कि उसे शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर ₹97.70 लाख की ठगी की गई। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन चैनलों के जरिए लोगों से संपर्क करते थे और उन्हें आकर्षक निवेश योजनाओं में फंसाते थे।

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गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद संगठित थी। मुख्य आरोपी मोनिल मोदी लोणावला स्थित विला के एक कमरे से पूरे ऑपरेशन को संचालित करता था। यहां वेब कैमरों के जरिए बाकी सदस्यों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी। ठगी से प्राप्त रकम पहले चुनिंदा बैंक खातों में जमा कराई जाती, जिसके बाद अन्य आरोपी तुरंत उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते थे, ताकि जांच एजेंसियों के लिए पैसे का ट्रेल पकड़ना मुश्किल हो जाए।

छापेमारी के दौरान एक लैपटॉप, सात मोबाइल फोन, 14 डेबिट कार्ड, दो वेब कैमरा, पांच बैंक अकाउंट किट और एक रबर स्टैंप बरामद किया गया है। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने अलग-अलग राज्यों के नौ बैंक खातों के जरिए लेनदेन किया और इन खातों में ₹1 करोड़ से अधिक की रकम जमा की गई थी।

जांच में इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन के भी संकेत मिले हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इस गिरोह की गतिविधियों की निगरानी हांगकांग से की जा रही थी। बताया जा रहा है कि मुख्य फरार आरोपी ने अपने साथियों को चीन आधारित कंपनी ‘किंग पेमेंट ग्लोबल’ के नाम पर नौकरी का लालच देकर इस नेटवर्क से जोड़ा था। उन्हें ऑफर लेटर और आईडी कार्ड दिए गए और ₹30,000 तक की सैलरी का वादा किया गया।

सबसे अहम खुलासा यह है कि आरोपियों को कमीशन और सैलरी क्रिप्टोकरेंसी, विशेष रूप से यूएसडीटी (USDT), में दी जाती थी। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह गिरोह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जहां धन के लेनदेन को छिपाने के लिए डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा था।

जांच एजेंसियों ने अब तक ₹18 लाख की ठगी गई राशि को फ्रीज कर लिया है। साथ ही, अन्य संदिग्ध खातों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। यह भी जांच का विषय है कि इस गिरोह ने देश के किन-किन हिस्सों में कितने लोगों को अपना शिकार बनाया।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह के अनुसार, ऐसे मामलों में साइबर अपराधी “हाई रिटर्न इन्वेस्टमेंट” के झांसे के जरिए लोगों को फंसाते हैं। उनका कहना है, “यह सोशल इंजीनियरिंग का एक क्लासिक उदाहरण है, जहां लालच और भरोसे का फायदा उठाकर लोगों से पैसा निकलवाया जाता है और फिर उसे कई खातों में ट्रांसफर कर ट्रैकिंग से बचने की कोशिश की जाती है।”

फिलहाल मामले की जांच जारी है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क के और भी अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और शामिल लोगों का खुलासा हो सकता है।

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