फर्जी बिल-बाउचर और आईटीसी क्लेम के जाल में फंसे सद्दाम हुसैन और मो. समद, फरजान हाशमी समेत अन्य की तलाश जारी

बोगस फर्म से 59.17 लाख का जीएसटी फर्जीवाड़ा: दो आरोपियों की गिरफ्तारी, मुख्य आरोपी फरार

Team The420
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बोगस फर्म बनाकर फर्जी बिल-बाउचर के माध्यम से 59.17 लाख रुपये का जीएसटी क्लेम करने के मामले में एसआईटी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपी सद्दाम हुसैन और मो. समद उर्फ शाहरुख ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने फरजान हाशमी व अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर कई वर्षों से फर्जी फर्म और फर्जी इनवॉइस के माध्यम से आईटीसी क्लेम किया और नेटवर्क का संचालन किया।

राज्यकर अधिकारी अनूप कुमार ने चार सितंबर 2025 को थाना किला में बड़ा बाजार गरइया स्थित एफएस ट्रेडर्स के प्रोपराइटर फरजान हाशमी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि एफएस ट्रेडर्स नामक यह फर्म अस्तित्वहीन थी। आरोप है कि फरजान हाशमी ने बोगस कंपनी और व्यवसायियों के साथ मिलकर 59,17,093 रुपये का आईटीसी क्लेम कर जीएसटी फर्जीवाड़ा किया।

स्थानीय एसआईटी के निर्देश पर गठित टीम ने इस मामले की जांच की। किला के मोहल्ला जखीरा निवासी सद्दाम हुसैन और खन्नू मोहल्ला निवासी मो. समद उर्फ शाहरुख को मुख्य अभियुक्तों के रूप में चिन्हित किया गया। सोमवार को दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। फरजान हाशमी और कुछ अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं।

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मोबाइल और व्हाट्सएप ने खोले फर्जीवाड़े के राज

जांच में सद्दाम हुसैन के मोबाइल से महत्वपूर्ण सुराग मिले। व्हाट्सएप पर सात अक्टूबर 2025 को मो. समद ने वॉयस मैसेज भेजा था, जिसमें फर्म की लॉगिन आईडी-पासवर्ड चेक करने के लिए मांगी गई थी। मोबाइल जांच में अन्य कई वॉइस कॉल्स और कंपनी का जीएसटी डिटेल भी सामने आया। सद्दाम ने बताया कि उसने फर्जी आईडी का सिम लेकर एफएस ट्रेडर्स का रिटर्न भरा और उसकी डिटेल्स फरजान हाशमी को भेज दी। बाद में फोन और सिम फरजान हाशमी ले गया।

शाहरुख और समद ने स्वीकार किया नेटवर्क संचालन

पूछताछ में शाहरुख ने बताया कि उसने फरजान हाशमी के कहने पर फर्जी फर्म बनवाई और समद ने इसका संचालन किया। दोनों ने कहा कि फरजान हाशमी ने उन्हें इस काम के बदले नकद भुगतान किया। आरोपी नेटवर्क के माध्यम से अन्य फर्मों को भी आईटीसी उपलब्ध कराता था।

राज्यस्तरीय एसआईटी के मुख्य विवेचक ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और सभी आरोपी जल्द पकड़ में आने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि यह मामला फर्जी फर्मों और इनवॉइस के माध्यम से होने वाले जीएसटी फर्जीवाड़े की जटिल संरचना को उजागर करता है।

सिद्धांत रूप में, इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि फर्जी आईटीसी क्लेम और बोगस फर्म नेटवर्क अब भी कई राज्यों में सक्रिय हैं, और ऐसे मामलों की समय-समय पर जांच और खुलासे की आवश्यकता है।

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