नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय ‘टीम कल्कि’ नामक ड्रग तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि यह गिरोह जनवरी 2025 से अब तक 1,000 से अधिक ड्रग्स पार्सल अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर भेज चुका है। इस गिरोह ने अवैध कमाई छुपाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का भी इस्तेमाल किया।
एनसीबी के सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में नेटवर्क के मुख्य संचालक अनुराग ठाकुर और उसका साथी विकास राठी शामिल हैं। गिरोह का संचालन विशेष तौर पर डार्क वेब के माध्यम से किया जाता था। आरोपियों ने ग्राहक तक ड्रग्स पहुंचाने के लिए ‘डेड ड्रॉप’ नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तरीके में ड्रग्स से भरे पार्सल किसी सुरक्षित स्थान पर रखे जाते और ग्राहकों को उस स्थान की जानकारी दी जाती। ग्राहक खुद जाकर पार्सल प्राप्त करते थे।
जांच में सामने आया कि आरोपी इस तकनीक का इस्तेमाल खासकर उन ग्राहकों के लिए करते थे जिन्होंने पहले भी कई ऑर्डर किए थे। इसके अलावा, पार्सल भेजने के लिए उन्होंने स्पीड पोस्ट और अन्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कुरियर सेवाओं का भी इस्तेमाल किया।
बरामदगी की विस्तृत जानकारी
एनसीबी ने कार्रवाई के दौरान कुल 15 पार्सल जब्त किए। इनमें से 13 पार्सल घरेलू थे और 2 नीदरलैंड से आए थे। बरामद सामग्री में शामिल हैं:
- 2,338 एलएसडी ब्लॉटर्स
- 160 एमडीएमए (एक्स्टेसी) गोलियां weighing 77.517 ग्राम
- 73.612 ग्राम चरास
- 3.642 ग्राम एम्फेटामिन
- 3.6 किलो लिक्विड एमडीएमए
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की अनुमानित कीमत ₹5 करोड़ आंकी गई है। एनसीबी अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई भारत में डार्क वेब के जरिए चल रहे ड्रग नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक मानी जा रही है।
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गिरोह की कार्यप्रणाली और जांच
जांच में पता चला कि टीम कल्कि नेटवर्क में ग्राहक पहले ऑनलाइन संपर्क करते और गिरोह की ओर से भेजे गए संकेतों के अनुसार पार्सल डिलीवरी की जाती। आरोपी अपने ट्रांजेक्शन को छिपाने के लिए डिजिटल मुद्रा और गुप्त तरीके अपनाते थे।
प्रो. त्रिवेणी सिंह, वरिष्ठ साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी, इस मामले पर बताते हैं, “इस तरह के नेटवर्क सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों और डेड ड्रॉप जैसे गुप्त डिलीवरी मॉडल का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे गिरोह आसानी से पकड़ में नहीं आते, इसलिए नियमित खुफिया निगरानी और डिजिटल फोरेंसिक की आवश्यकता है।”
एनसीबी की जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ड्रग्स का नेटवर्क बनाया था। नीदरलैंड और अन्य यूरोपीय देशों से ड्रग्स की खेप को भारत में ग्राहक तक पहुँचाने के लिए जटिल लॉजिस्टिक योजना बनाई गई थी।
आगे की कार्रवाई
एनसीबी अधिकारियों ने बताया कि गिरोह के अन्य चार सक्रिय सदस्य फिलहाल फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग किया जा रहा है। साथ ही, ग्राहक और स्थानीय नेटवर्क के अन्य हिस्सों की पहचान करने के लिए विस्तृत फोरेंसिक और डिजिटल डेटा विश्लेषण किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डार्क वेब आधारित ड्रग्स नेटवर्क आज भी तेजी से बढ़ रहे हैं और ऐसे मामलों में लगातार तकनीकी निगरानी और सख्त कार्रवाई ही बड़े पैमाने पर सफलता दिला सकती है।
यह कार्रवाई भारतीय ड्रग नियंत्रण एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इसने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और स्थानीय लॉजिस्टिक को एक साथ पकड़ने में सफलता प्राप्त की है।
