मोतिहारी/फरीदाबाद: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में मोबाइल ऐप के जरिए बड़े रिटर्न का लालच देकर की गई करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है। मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी संगम कुमार को हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर ‘अग्नि’ नाम से फर्जी एंड्रॉइड ऐप बनाकर युवाओं और निवेशकों को झांसे में लेने का आरोप है। शुरुआती जांच में एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी सामने आई है, जबकि वास्तविक रकम इससे कहीं ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, रक्सौल क्षेत्र के एक युवक की शिकायत पर साइबर थाने में मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में बताया गया कि ‘अग्नि’ ऐप के माध्यम से मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल भुगतान और विज्ञापन देखने जैसे कार्यों पर आकर्षक रिटर्न देने का दावा किया जाता था। युवाओं को कम समय में दोगुना-तिगुना लाभ का भरोसा दिलाया जाता था।
शुरुआती मुनाफा दिखाकर बढ़ाया भरोसा
जांच में सामने आया है कि गिरोह पहले निवेशकों को छोटे-छोटे भुगतान कर भरोसा कायम करता था। ऐप के भीतर डिजिटल वॉलेट की सुविधा दी गई थी, जिसमें रकम जमा कराई जाती थी। शुरुआती ट्रांजैक्शन सफल दिखाकर लोगों को अधिक पूंजी लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था।
इसके बाद बड़े निवेश पर कार, बाइक और अन्य आकर्षक उपहार देने का लालच दिया जाता था। जैसे ही बड़ी संख्या में लोगों ने मोटी रकम निवेश की, ऐप अचानक बंद कर दिया गया और आरोपी संपर्क से बाहर हो गए।
खुद को बताता था कंपनी का CEO
गिरफ्तार आरोपी संगम कुमार खुद को ‘अग्नि ऐप’ का सीईओ बताकर लोगों के बीच अपनी साख बनाता था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरोह ने अलग-अलग शहरों में सेमिनार और प्रेजेंटेशन आयोजित कर युवाओं को जोड़ा। इन आयोजनों में ऐप को तेजी से बढ़ते डिजिटल स्टार्टअप के रूप में पेश किया जाता था।
बताया जा रहा है कि आरोपी पेशेवर अंदाज में पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन, फर्जी रजिस्ट्रेशन दस्तावेज और बनावटी सफलता की कहानियां दिखाकर लोगों को निवेश के लिए तैयार करता था। कई लोगों ने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी जोड़ दिया, जिससे ठगी का दायरा बढ़ता गया।
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तकनीकी सर्विलांस से मिला सुराग
पुलिस ने बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की जांच के आधार पर आरोपी की लोकेशन हरियाणा के फरीदाबाद में ट्रेस की। इसके बाद विशेष टीम गठित कर छापेमारी की गई और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
अब उससे पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, पेमेंट गेटवे और सर्वर की जानकारी जुटाई जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि ठगी की रकम किन खातों में ट्रांसफर की गई और क्या उसे अन्य माध्यमों में परिवर्तित किया गया।
कई राज्यों में फैले नेटवर्क की आशंका
अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह का नेटवर्क बिहार से बाहर भी फैला हो सकता है। अन्य राज्यों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आने की संभावना है। यदि नेटवर्क व्यापक पाया गया तो जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा।
पुलिस अब ऐप के तकनीकी डेवलपमेंट, सर्वर लोकेशन और डेटा बैकअप की फॉरेंसिक जांच करा रही है, ताकि ठगी की कुल राशि और पीड़ितों की संख्या का सटीक आंकड़ा सामने आ सके।
पीड़ितों में न्याय की उम्मीद
कार्रवाई के बाद ठगी के शिकार लोगों में राहत की उम्मीद जगी है। कई पीड़ितों ने आगे आकर अपने निवेश और ट्रांजैक्शन का ब्यौरा पुलिस को देना शुरू कर दिया है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मोबाइल ऐप में निवेश करने से पहले उसकी वैधता, कंपनी का पंजीकरण और नियामक मंजूरी की जांच जरूरी है। अत्यधिक और असामान्य रिटर्न का दावा अक्सर ठगी का संकेत होता है।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी पर जोर दे रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
