नई दिल्ली। चीन की स्मार्टफोन कंपनी Xiaomi के भारतीय कारोबार से जुड़ी नियामकीय मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। भारत के गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) ने Xiaomi Technology India Private Limited के खिलाफ विस्तृत जांच की सिफारिश की है। प्रस्तावित जांच में कंपनी के कारोबार के तरीके, विदेशी निवेश संबंधी नियमों के पालन, धन के प्रवाह और भारतीय कारोबार से जुड़े विदेशी निवेशकों तथा समूह कंपनियों के वास्तविक स्वामित्व की पड़ताल की जाएगी। यह सिफारिश फिलहाल कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के पास लंबित है, जिसे इसे मंजूर करने, खारिज करने या किसी अन्य एजेंसी से मामले की जांच कराने का अधिकार है।
सरकारी दस्तावेज के अनुसार, SFIO की प्रस्तावित जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना होगा कि Xiaomi और उससे जुड़े विदेशी निवेशकों ने भारत में निवेश के लिए जरूरी सरकारी मंजूरियां हासिल की थीं या नहीं। खास तौर पर 2020 में भारत-चीन सीमा पर तनाव के बाद चीनी निवेश को लेकर कड़े किए गए नियमों के तहत किए गए निवेश की जांच की जा सकती है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कंपनी के विदेशी निवेशकों और समूह की अन्य इकाइयों का वास्तविक लाभार्थी स्वामित्व किसके पास था तथा स्वामित्व या नियंत्रण में किसी बदलाव की जानकारी सरकार को सही तरीके से दी गई थी या नहीं।
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SFIO ने जांच के लिए 21 बिंदुओं वाला एक ढांचा प्रस्तावित किया है। इसके तहत कंपनी के अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाने, वित्तीय विवरणों की जांच करने और सरकार के समक्ष दाखिल की गई लेखा-परीक्षा रिपोर्ट की पड़ताल जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। जांच का दायरा केवल निवेश तक सीमित नहीं रहने की संभावना है, बल्कि कंपनी के भारतीय कारोबार की संरचना और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी समीक्षा की जा सकती है।
प्रस्तावित जांच पर Xiaomi ने कहा है कि उसे SFIO की ओर से अब तक कोई नोटिस या आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। कंपनी ने अपने पक्ष में कहा कि वह भारत के कानूनों को सर्वोच्च महत्व देती है और सभी लागू कानूनी प्रावधानों का पूरी तरह पालन करती है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और SFIO की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जांच प्रस्ताव में Xiaomi के ई-कॉमर्स कारोबार और भारतीय विक्रेताओं के साथ उसके संबंधों की भी समीक्षा किए जाने की बात है। इसमें यह पता लगाने की कोशिश हो सकती है कि क्या कंपनी ने कुछ भारतीय विक्रेताओं या उत्पाद लॉन्च करने वाले साझेदारों पर वास्तविक नियंत्रण रखा था, जबकि दस्तावेजों में इन संबंधों को स्वतंत्र कारोबारी व्यवस्था के रूप में दिखाया गया। कुछ ई-कॉमर्स मंचों पर Xiaomi के उत्पादों की प्राथमिकता या विशेष लॉन्च व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ सकती है।
भारत में विदेशी निवेश के नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों और विक्रेताओं के बीच विशेष या तरजीही कारोबारी व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी नियामकीय सवाल उठते रहे हैं। 2024 में प्रतिस्पर्धा संबंधी जांच में Xiaomi समेत कुछ स्मार्टफोन कंपनियों और बड़े ई-कॉमर्स मंचों के बीच विशेष ऑनलाइन लॉन्च व्यवस्था का मुद्दा सामने आया था। Xiaomi ने उस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की थी।
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब Xiaomi पहले से ही भारत में कई वित्तीय और नियामकीय विवादों का सामना कर रही है। वित्तीय अपराधों की जांच करने वाली एजेंसी ने 2022 में कंपनी की भारतीय बैंक परिसंपत्तियों में लगभग ₹5,551 करोड़ की राशि पर रोक लगाई थी। यह कार्रवाई कथित अवैध धन प्रेषण से जुड़े मामले में हुई थी, जबकि Xiaomi ने किसी गलत काम से इनकार किया है। कंपनी को कर मांगों और रॉयल्टी भुगतान से जुड़े विवादों का भी सामना करना पड़ा है।
कभी भारत के स्मार्टफोन बाजार में शीर्ष स्थान पर रही Xiaomi की बाजार हिस्सेदारी भी पिछले कुछ वर्षों में घटी है। 2025 में भारत में कंपनी का राजस्व करीब ₹21,000 करोड़ रहा, जो तीन साल पहले के स्तर से लगभग 40 प्रतिशत कम बताया गया है। प्रस्तावित SFIO जांच अब कंपनी के भारतीय कारोबार की वित्तीय संरचना, विदेशी निवेश और ई-कॉमर्स व्यवस्था पर एक और नियामकीय परीक्षा की शुरुआत कर सकती है। हालांकि, जांच शुरू करने पर अंतिम निर्णय अभी कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय को लेना है।
