टाटा पावर की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर सुरक्षा राशि के नाम पर रकम वसूलने का आरोप; 11 मोबाइल, लैपटॉप, फर्जी पहचान पत्र और संदिग्ध दस्तावेज बरामद

फर्जी ईवी चार्जिंग स्टेशन फ्रेंचाइजी के नाम पर ठगी, किराए के मकान से पांच आरोपी गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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हजारीबाग। हजारीबाग पुलिस ने टाटा पावर के ईवी चार्जिंग स्टेशन की फर्जी फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर कथित ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों को ईवी चार्जिंग स्टेशन की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देते थे और इसके बदले सुरक्षा राशि के नाम पर रकम वसूलते थे।

पुलिस को 15 सितंबर को सूचना मिली थी कि हजारीबाग के बाबा पथ, हुरहुरू इलाके में एक किराए के मकान से कुछ लोग संदिग्ध गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस ने कार्रवाई के लिए विशेष टीम गठित की। टीम ने बताए गए ठिकाने पर छापा मारकर पांच लोगों को हिरासत में लिया।

पूछताछ के दौरान कथित फ्रेंचाइजी ठगी का मामला सामने आया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी टाटा पावर के ईवी चार्जिंग स्टेशन की फ्रेंचाइजी दिलाने का दावा करते थे। इसके लिए वे इच्छुक लोगों को विभिन्न दस्तावेज और फ्रेंचाइजी से संबंधित जानकारी दिखाकर भरोसे में लेते थे। इसके बाद सुरक्षा राशि या अन्य शुल्क के नाम पर उनसे रकम मांगी जाती थी।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, फर्जी पहचान पत्र और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए। पुलिस ने सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप की तकनीकी जांच की जा रही है, ताकि कथित ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए संपर्कों, खातों और डिजिटल गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

मामले में सदर (बड़ा बाजार) थाने में कांड संख्या 226/26 के तहत विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमरजीत कुमार, संजीव कुमार, संजू कुमार, प्रवीन कुमार और राजू कुमार के रूप में हुई है। पुलिस उनसे पूछताछ कर गिरोह के काम करने के तरीके और कथित ठगी से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

जांच में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने फर्जी फ्रेंचाइजी के नाम पर कितने लोगों से संपर्क किया और कितनी रकम कथित तौर पर वसूली गई। इसके अलावा, यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी दस्तावेज कहां तैयार किए जाते थे और गिरोह में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।

पुलिस की तकनीकी शाखा बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप में मौजूद डेटा की जांच कर रही है। इसके जरिए आरोपियों के संभावित पीड़ितों, बैंक लेनदेन, संपर्क नंबरों और ऑनलाइन गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने एक से अधिक लोगों को फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर निशाना बनाया हो सकता है।

कार्रवाई में सदर थाना पुलिस के साथ तकनीकी शाखा की टीम शामिल रही। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद मामले में ठगी की कुल रकम और नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

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