वाराणसी। आईपीएल में कथित सट्टेबाजी के बड़े मामले में गिरफ्तार आरोपियों पर अब जमानत हासिल करने के लिए भी फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगा है। वाराणसी की कैंट पुलिस और एसओजी ने जांच के दौरान पाया कि मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों ने अदालत में दो-दो ऐसे जमानतदार पेश किए, जिनका बताए गए पते पर कोई अस्तित्व नहीं मिला। सत्यापन में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पुलिस ने चारों सट्टेबाजी के आरोपियों और आठ कथित फर्जी जमानतदारों के खिलाफ अलग से मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपियों की जमानत निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू करने के साथ उनकी दोबारा गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है।
मामला उस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें कैंट पुलिस और एसओजी ने 1 जून की देर रात टकटकपुर स्थित सिद्धी हाइट के एक फ्लैट पर छापा मारा था। पुलिस ने फ्लैट से आईपीएल में कथित तौर पर सट्टेबाजी करने वाले 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 17 मोबाइल फोन, 10 लैपटॉप और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा डिजिटल वॉलेट बरामद किया था।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह करीब एक वर्ष से वाराणसी में सक्रिय था और इस दौरान कम से कम 200 करोड़ रुपये का कथित सट्टा लगवाए जाने की जानकारी सामने आई थी। मामले में कपसेठी निवासी रितेश दिवाकर शुक्ला को गिरोह का कथित मास्टरमाइंड बताया गया था। चोलापुर के करमा निवासी रवि यादव को उसका प्रमुख सहयोगी बताया गया। जांच में गिरोह के संचालन, पैसों के लेन-देन और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल से जुड़े कई पहलुओं की जांच की जा रही थी।
इसी मामले में गिरफ्तार नवी मुंबई के अलकापुरी रोड स्थित साईं लीला अपार्टमेंट निवासी जियाउलहक, जयपुर ग्रामीण के मानसरोवर स्थित सचिवालय विहार विस्तार निवासी सचिन सिंह और देवेश चौहान तथा इटावा के रमिकावर निवासी सौरभ चौहान को करीब एक माह पहले जिला जेल से जमानत पर रिहा किया गया था। अब पुलिस जांच में उनकी जमानत प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस के अनुसार, इन चारों आरोपियों ने अदालत में जमानत हासिल करने के लिए दो-दो जमानतदार पेश किए थे। जमानत दस्तावेजों में गुलाब, अनिल, मुख्तार, अमरनाथ, राजनाथ, चौथी राम, शिवशंकर और शिवपूजन के नाम दर्ज किए गए थे। सभी कथित जमानतदारों का पता चंदौली जिले के सैयदराजा क्षेत्र स्थित एलही गांव का बताया गया था।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
कोर्ट में जमानत आवेदन के साथ जमानतदारों का विवरण मिलने के बाद कैंट पुलिस ने उनके पते और पहचान का सत्यापन कराया। पुलिस टीम जब बताए गए गांव पहुंची तो वहां इनमें से कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं मिला। इसके बाद मामले की पुष्टि के लिए सैयदराजा थाने, एलही के ग्राम प्रधान, चंदौली के तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी से औपचारिक रिपोर्ट ली गई।
अलग-अलग स्तरों से कराए गए सत्यापन में कथित जमानतदारों के बताए गए पते पर नहीं मिलने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने इसे जमानत हासिल करने के लिए किया गया कथित फर्जीवाड़ा मानते हुए अलग से कानूनी कार्रवाई शुरू की। मामले में साइबर अपराध थाने के विवेचक निरीक्षक योगेंद्र प्रसाद की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
नए मुकदमे में आईपीएल सट्टेबाजी के मामले में जमानत पर बाहर आए चारों आरोपियों के साथ सभी आठ कथित फर्जी जमानतदारों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जमानतदारों के नाम और पते किसने उपलब्ध कराए थे तथा अदालत में दाखिल दस्तावेजों को तैयार कराने में किन लोगों की भूमिका रही।
पुलिस की अगली कार्रवाई अब आरोपियों की जमानत निरस्त कराने पर केंद्रित है। सत्यापन रिपोर्ट और नए मुकदमे के आधार पर अदालत में जमानत निरस्तीकरण की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। साथ ही नए मामले में चारों आरोपियों की दोबारा गिरफ्तारी की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने कथित आईपीएल सट्टेबाजी मामले की जांच को एक नया मोड़ दे दिया है। अब पुलिस सट्टेबाजी नेटवर्क के साथ-साथ आरोपियों को जमानत दिलाने के लिए कथित तौर पर तैयार किए गए फर्जी दस्तावेजों और जमानतदारों के नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
