वाराणसी। राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) की जांच में रेलवे ठेकेदार से जुड़ी भागीरथी कंस्ट्रक्शन में 4.25 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का मामला सामने आया है। जांच के दौरान बिना वास्तविक खरीद के 2.88 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा किए जाने और 36 लाख रुपये की आईटीसी फर्जी बिलों के आधार पर हासिल करने का खुलासा हुआ है। विभाग अब यह भी जांच कर रहा है कि कहीं इस मामले में शेल कंपनियों और फर्जी बिलिंग करने वाली अन्य फर्मों का नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।
जांच में सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि फर्म के टेंट हाउस कारोबार का जीएसटी पंजीकरण मार्च 2026 में निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच भागीरथी कंस्ट्रक्शन को करीब 5.50 करोड़ रुपये का सरकारी भुगतान जारी होता रहा। जांच अधिकारियों के अनुसार, इस कारोबार से संबंधित लगभग एक करोड़ रुपये का कर सरकारी खजाने में जमा नहीं कराया गया। पंजीकरण रद्द होने के बावजूद सरकारी भुगतान और बिलों के लगातार निपटारे ने विभागीय जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं।
भागीरथी कंस्ट्रक्शन सिविल निर्माण कार्य के अलावा सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) के जरिये मैनपॉवर की आपूर्ति भी कर रही थी। जांच में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के रिटर्न में फर्म ने मैनपॉवर सप्लाई से संबंधित कारोबार का पूरा विवरण नहीं दिखाया। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल के बाद से कोई जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किया गया। इसके बावजूद फर्म की कारोबारी गतिविधियां और सरकारी भुगतान जारी रहे।
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एसआईबी की जांच में आईटीसी से जुड़ी अनियमितताएं भी सामने आईं। विभाग के अनुसार, फर्म ने वास्तविक खरीद किए बिना 2.88 करोड़ रुपये की आईटीसी का दावा किया। इसके अलावा 36 लाख रुपये की आईटीसी ऐसे बिलों के आधार पर ली गई, जिन्हें जांच में फर्जी पाया गया। विभाग अब संबंधित लेनदेन और बिल जारी करने वाली फर्मों की भी पड़ताल कर रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि मैनपॉवर और सफाई सेवाओं से जुड़ी अन्य फर्मों की व्यापक जांच में भी बड़े पैमाने पर कर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
जांच में टेंट हाउस कारोबार से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। विभाग के अनुसार, पंजीकरण रद्द किए जाने के बावजूद फर्म का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हुआ। वर्ष 2022-23 से अब तक करीब 2.50 करोड़ रुपये की अघोषित बिक्री का पता लगाया गया है। विभाग इस कारोबार से जुड़े दस्तावेज, लेनदेन और कर देनदारी की जांच कर रहा है।
एसआईबी की कार्रवाई के दौरान ठेकेदार की ओर से 46.64 लाख रुपये जमा कराए गए हैं। फर्म की ओर से शेष बकाया राशि भी जल्द जमा कराने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, विभाग की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और आईटीसी के स्रोत तथा संबंधित फर्मों के बीच लेनदेन की कड़ियों की पड़ताल जारी है।
संयुक्त आयुक्त, एसआईबी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रकार की फर्मों की जांच चल रही है। उनके अनुसार, भागीरथी कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था, लेकिन टेंट कारोबार से संबंधित रिटर्न कई महीनों से दाखिल नहीं किया गया था। इसी आधार पर मार्च में पंजीकरण निरस्त किया गया। उन्होंने बताया कि पंजीकरण बहाल कराने के लिए प्रोपराइटर की ओर से कोई आवेदन नहीं आया था।
दूसरी ओर, बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (बीएलडब्ल्यू) के जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने कहा कि संबंधित फर्मों में पाई गई जीएसटी संबंधी गड़बड़ियों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी जीएसटी विभाग की है और बीएलडब्ल्यू का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
मामले में अब जांच का दायरा केवल एक फर्म तक सीमित रहने के बजाय उससे जुड़े आपूर्तिकर्ताओं, बिल जारी करने वाली कंपनियों और आईटीसी के पूरे लेनदेन तक बढ़ने की संभावना है। यदि जांच में फर्जी बिलिंग या कागजी कंपनियों का नेटवर्क सामने आता है, तो सरकारी भुगतान और कर क्रेडिट की पूरी श्रृंखला की भी जांच की जा सकती है।
