मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना शाखा में बचत खाते, FDR और KCC से जुड़ी कथित हेराफेरी की रकम ₹5.15 करोड़ तक पहुंचने के बाद चार बैंक कर्मचारियों को निलंबित किया गया है।

₹90 लाख से शुरू हुई जांच पहुंची ₹5.15 करोड़ तक, मुजफ्फरनगर ग्रामीण बैंक में 250 शिकायतें; चार कर्मचारी निलंबित

Team The420
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मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की बुढ़ाना शाखा में बचत खातों, सावधि जमा रसीदों (एफडीआर) और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) खातों में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। शुरुआत में करीब ₹90 लाख की कथित हेराफेरी की जानकारी सामने आई थी, लेकिन तीन दिनों में करीब 250 शिकायतें मिलने और खातों की जांच आगे बढ़ने के बाद कथित तौर पर प्रभावित रकम बढ़कर ₹5.15 करोड़ तक पहुंच गई है। मामले में बैंक ने पूर्व शाखा प्रबंधक रूपक राणा समेत चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। अब पूरे मामले की विस्तृत जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंपी जाएगी।

बुढ़ाना शाखा में रूपक राणा शाखा प्रबंधक के पद पर तैनात थे। उनका स्थानांतरण होने के बाद विभव कुमार ने नए शाखा प्रबंधक के रूप में कार्यभार संभाला। 19 सितंबर को कई ग्राहक पासबुक में लेनदेन दर्ज कराने और खातों की जानकारी लेने शाखा पहुंचे। इसी दौरान कुछ खाताधारकों को उनके खातों से बिना जानकारी के रकम निकलने की बात पता चली। शिकायतों की संख्या बढ़ने पर क्षेत्रीय कार्यालय की पांच सदस्यीय टीम को जांच के लिए भेजा गया। टीम ने खातों, एफडीआर, केसीसी और संबंधित बैंक रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की।

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प्रारंभिक जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद पूर्व शाखा प्रबंधक रूपक राणा, सहायक प्रबंधक नेहा, कैशियर गौरव और क्लर्क बाबू के निलंबन की संस्तुति की गई। क्षेत्रीय प्रबंधक यूसुफ खान ने चारों कर्मचारियों के निलंबन की पुष्टि की। निलंबित कर्मचारियों को आगे की कार्रवाई तक जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।

शुरुआती शिकायतों में कथित हेराफेरी की रकम करीब ₹90 लाख बताई गई थी। हालांकि, जैसे-जैसे दूसरे खाताधारक शिकायत लेकर सामने आए, मामले का दायरा बढ़ता गया। 23 सितंबर को बैंक की सतर्कता टीम ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जांच की प्रगति की जानकारी दी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब तक करीब ₹5.15 करोड़ की कथित हेराफेरी की जानकारी सामने आई है। रकम बड़ी होने के कारण मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा से कराने की तैयारी है।

खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराने का भी आरोप

जांच के दौरान ग्राहकों से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। कुछ खाताधारकों का आरोप है कि केसीसी या एफडीआर के बदले ऋण लेते समय उनसे खाली या ऐसे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए, जिनकी पूरी जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी। ग्राहकों को आशंका है कि बाद में इन्हीं दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया।

कुछ बचत खातों में दर्ज मोबाइल नंबर बदले जाने की बात भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि मोबाइल नंबर बदलने के बाद खातों से रकम निकाली गई, जिससे वास्तविक खाताधारकों को लेनदेन के संदेश नहीं मिले। कुछ मामलों में ग्राहकों की जानकारी के बिना एफडीआर के बदले ऋण दिखाए जाने और केसीसी खातों में कथित बदलाव किए जाने की शिकायत भी सामने आई है।

तीन दिन में करीब 250 शिकायतें

शिकायतों का सिलसिला लगातार जारी रहा। 23 सितंबर को ही 13 और खाताधारकों ने लिखित शिकायतें दीं। बैंक की जांच टीम के अनुसार, तीन दिनों में करीब 250 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। हालांकि, कुछ शिकायतें एक ही खाते से संबंधित होने की वजह से अब बैंक वास्तविक प्रभावित खातों और रकम का मिलान कर रहा है।

वरिष्ठ शाखा प्रबंधक नितिन वर्मा ने ग्राहकों को भरोसा दिया है कि बैंकिंग प्रक्रिया के कारण जिन ग्राहकों को वास्तविक आर्थिक नुकसान हुआ पाया जाएगा, जांच के बाद नियमानुसार उनकी रकम वापस की जाएगी। शाखा के मुख्य द्वार पर इस संबंध में सूचना भी चस्पा की गई है।

पासबुक में एंट्री कराने पहुंची थीं, तब सामने आया मामला

बड़ा बाजार निवासी संतोष रानी ने आरोप लगाया कि वह अपने खाते में लेनदेन की जानकारी दर्ज कराने के लिए बैंक पहुंची थीं। उनके अनुसार, तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने उनकी पासबुक अपने पास रख ली और प्रिंटर खराब होने की बात कही। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि उनके खाते से लाखों रुपये की कथित निकासी हो चुकी है।

मास्टर कॉलोनी निवासी अर्चित कुमार ने आरोप लगाया कि उनके बचत खाते से ₹11 लाख निकाले गए। इसके अलावा उनकी एफडीआर पर कथित तौर पर ₹8 लाख का ऋण दिखाकर रकम निकाली गई। बुढ़ाना निवासी मुजक्किर ने अपने बचत खाते से ₹7 लाख की कथित निकासी की शिकायत की। एक अन्य ग्राहक सतीश ने भी अपने खाते से ₹5 लाख निकाले जाने का आरोप लगाया है।

बैंक ने विदेशी लेनदेन की बात से किया इनकार

वरिष्ठ शाखा प्रबंधक नितिन वर्मा ने स्पष्ट किया कि पूर्व शाखा प्रबंधक रूपक राणा के खाते से किसी विदेशी देश में लेनदेन सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बैंक में सीधे विदेशी देशों से रकम भेजने या प्राप्त करने की सुविधा नहीं है। फिलहाल जांच का केंद्र ग्राहकों के खातों में कथित धोखाधड़ी और बैंकिंग रिकॉर्ड में हुई अनियमितताएं हैं।

19 सितंबर से शुरू हुआ विवाद

मामला 19 सितंबर को उस समय सामने आया, जब नए शाखा प्रबंधक के कार्यभार संभालने के बाद ग्राहक अपने खातों की जानकारी लेने पहुंचे और कथित रूप से रकम गायब होने की शिकायत करने लगे। शुरुआत में करीब 25 शिकायतें मिलीं, जिसके बाद क्षेत्रीय कार्यालय की टीम ने जांच शुरू की।

20 सितंबर को पांच सदस्यीय टीम ने जांच तेज की और शाखा की सुरक्षा के लिए पुलिस तथा प्रशासन से सहयोग मांगा गया। 21 सितंबर को बड़ी संख्या में ग्राहक शाखा पहुंच गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। 200 से अधिक शिकायतें मिलने के बाद पुलिस सुरक्षा बढ़ाई गई। 22 सितंबर को भी ग्राहकों का विरोध जारी रहा और बुढ़ाना थाने में शिकायत दी गई। उस समय कथित हेराफेरी की रकम करीब ₹90 लाख बताई गई थी।

23 सितंबर को बैंकिंग कामकाज सामान्य हुआ और ग्राहकों को जांच के बाद रकम लौटाने का भरोसा दिया गया। इसी दौरान जांच में कथित रकम ₹3 करोड़ से ऊपर पहुंची और बाद में ₹5.15 करोड़ तक पहुंचने की जानकारी सामने आई। अब ईओडब्ल्यू पूरे लेनदेन की कड़ियों, वास्तविक नुकसान और कथित हेराफेरी में जिम्मेदारी तय करने के लिए मामले की विस्तृत जांच करेगी।

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