आगरा। दीवानी अदालत में जमानत कराने के लिए दस्तावेजों में कथित हेराफेरी और सरकारी सत्यापन रिपोर्ट तैयार करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि धोखाधड़ी के मुकदमे में जेल गए विष्णु को जमानत दिलाने के लिए दो महिलाओं के वास्तविक आधार कार्ड और अन्य कागजात का इस्तेमाल किया गया, लेकिन उनमें कंप्यूटर के जरिए बदलाव कर दूसरी महिलाओं की तस्वीरें लगा दी गईं। इसके अलावा जमानतदारों के सत्यापन के नाम पर थाने और तहसील की कथित कूटरचित रिपोर्ट भी अदालत में दाखिल की गई। जमानत मिलने के बाद विष्णु अदालत में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया। गैर-जमानती वारंट जारी होने पर पुलिस जब जमानतदारों के पते पर पहुंची, तब दोनों महिलाओं ने किसी की जमानत लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद थाना न्यू आगरा में अधिवक्ता समेत चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
अदालत में चल रहा था ‘राज्य बनाम विष्णु’ मुकदमा
मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या-19 की अदालत में विचाराधीन ‘राज्य बनाम विष्णु’ मुकदमे से जुड़ा है। न्यायालय के पेशकार/रीडर सुनील गोयल की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें सौरभ कुमार, अधिवक्ता जसवीर सिंह और दो महिलाओं को आरोपी बनाया गया है।
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तहरीर के अनुसार, शाहदरा, थाना ट्रांस यमुना निवासी विष्णु को धोखाधड़ी के एक मामले में करीब तीन साल पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। वर्ष 2023 में अदालत से उसे जमानत मिली थी। उसकी जमानत के लिए तुलसा देवी और विमला देवी के आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज अदालत में लगाए गए। कागजात के आधार पर दोनों महिलाओं को जमानतदार के तौर पर प्रस्तुत किया गया था।
वारंट लेकर घर पहुंची पुलिस तो खुला राज
जमानत मिलने के बाद विष्णु अदालत में निर्धारित तारीख पर पेश नहीं हुआ। इसके बाद उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। पुलिस ने जमानतदारों की तस्दीक शुरू की और तुलसा देवी तथा विमला देवी के बताए पते पर पहुंची। वहां दोनों महिलाओं ने पुलिस को बताया कि उन्होंने विष्णु या किसी अन्य आरोपी की जमानत नहीं ली है।
इसके बाद 19 अगस्त को दोनों महिलाओं ने अदालत में शपथ-पत्र दाखिल कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संबंधित मुकदमे में उन्होंने किसी व्यक्ति की जमानत नहीं ली और न ही जमानत से जुड़े दस्तावेजों पर अपनी सहमति दी। महिलाओं ने अपने मूल आधार कार्ड अदालत में पेश किए और उन्हें इस मामले में जमानतदार के रूप में दर्ज किए जाने से मुक्त करने का अनुरोध किया।
आधार कार्ड में बदला नंबर, दूसरी महिलाओं की तस्वीर लगाई
दस्तावेजों की जांच में कथित फर्जीवाड़े की कई परतें सामने आईं। आरोप है कि तुलसा देवी और विमला देवी के वास्तविक आधार कार्ड से नाम और पता तो वही रखा गया, लेकिन आधार नंबर बदल दिए गए। इसके साथ ही जमानत के दौरान अदालत में पेश की गईं दूसरी महिलाओं की तस्वीरें इन दस्तावेजों पर चस्पा कर दी गईं।
इस तरह वास्तविक महिलाओं के पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर दूसरी महिलाओं को जमानतदार के तौर पर अदालत में पेश किए जाने का आरोप है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दस्तावेजों में बदलाव किस स्तर पर किया गया और तैयार किए गए कागजात अदालत तक कैसे पहुंचे।
थाने और तहसील की कथित रिपोर्ट भी बनाई
मामले में केवल आधार कार्ड तक ही कथित हेराफेरी सीमित नहीं रही। जमानतदारों के दस्तावेजों के सत्यापन के लिए तहसीलदार एत्मादपुर और थानाध्यक्ष के नाम से कथित रिपोर्ट तैयार कर अदालत में दाखिल किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में थाना एत्माद्दौला के उपनिरीक्षक के तौर पर रामगोपाल का नाम दर्ज था।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि जनवरी 2023 में थाना एत्माद्दौला से अलग होकर थाना ट्रांस यमुना बनाया जा चुका था। इसके बावजूद विष्णु की जमानत से संबंधित कागजात अक्टूबर 2023 में एत्माद्दौला थाने के नाम से तैयार किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि जिस रामगोपाल के नाम से कथित रिपोर्ट लगाई गई थी, वह उस समय संबंधित थाने में तैनात नहीं थे।
इसी तरह तहसील की ओर से भेजी गई कथित सत्यापन रिपोर्ट में राजस्व निरीक्षक रामेश्वर प्रसाद का नाम दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस इन दस्तावेजों की वास्तविकता और उन्हें तैयार करने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
सौरभ की भूमिका पर जांच, फोटो वाली महिलाओं की तलाश
जमानतनामा दाखिल करने की प्रक्रिया में सौरभ कुमार की ओर से अधिवक्ता प्रतिभा आर्या, एके गौतम और राम अवतार को नियुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, जमानतनामा किसी अन्य अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। पेशकार की तहरीर में पूरे घटनाक्रम को संगठित तरीके से किए गए फर्जीवाड़े की आशंका से जोड़ा गया है।
पुलिस अब उन महिलाओं की भी तलाश कर रही है, जिनकी तस्वीरें आधार कार्ड पर लगाकर उन्हें जमानतदार के रूप में अदालत में पेश किए जाने का आरोप है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, सरकारी सत्यापन रिपोर्ट कैसे तैयार हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि दीवानी अदालत में फर्जी प्रपत्र लगाकर जमानत लेने का मामला सामने आया है। प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। जमानत के लिए दस्तावेज किस अधिवक्ता ने लगाए, इसकी पड़ताल की जाएगी और संबंधित लोगों से पूछताछ होगी। फरार आरोपी की तलाश भी पुलिस टीम द्वारा की जा रही है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे फर्जीवाड़े
अदालत में फर्जी जमानतदार और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए जमानत कराने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में गिरोह के पकड़े जाने और संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज होने की घटनाएं सामने आई हैं। हाल में वाहन की जमानत छुड़ाने के लिए भी एक महिला के कथित फर्जी प्रपत्र लगाए जाने का मामला पकड़ा गया था। मौजूदा प्रकरण के बाद पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं इसी तरीके से अन्य मामलों में भी फर्जी जमानत तो नहीं कराई गई। साथ ही अदालत में पहले दाखिल किए गए संदिग्ध जमानत दस्तावेजों की कड़ियां भी खंगाली जा सकती हैं।
