CBI ने उत्तराखंड LUCC चिट फंड घोटाले में 18 आरोपियों और एक संस्था के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

उत्तराखंड LUCC चिट फंड घोटाला: CBI ने ₹800 करोड़ जमा घोटाले में 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

Team The420
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नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) चिट फंड घोटाले में 18 आरोपियों और एक संस्था के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी का आरोप है कि अनियमित जमा योजनाओं के माध्यम से लगभग ₹800 करोड़ जुटाए गए और इस कथित पोंजी नेटवर्क से एक लाख से अधिक निवेशकों को प्रभावित किया गया। जांच के अनुसार, कथित धोखाधड़ी की राशि ₹400 करोड़ से अधिक है।

CBI ने चार्जशीट में समीर अग्रवाल, शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत, सानिया अग्रवाल, माया सिंह राजपूत, जितेंद्र सिंह निरंजन, दिनेश सिंह, गिरीश चंद सिंह बिष्ट, उर्मिला बिष्ट, जगमोहन बिष्ट, ममता भंडारी, तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन, पंकज कुशल सिंह जैन, राजेंद्र सिंह बिष्ट तथा LUCC को आरोपी बनाया है। आरोप भारतीय दंड संहिता (IPC), भारतीय न्याय संहिता (BNS), उत्तराखंड जमाकर्ताओं के हित संरक्षण अधिनियम तथा बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स (BUDS) अधिनियम, 2019 के तहत लगाए गए हैं।

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मामले की जांच वर्ष 2025 में उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद CBI को सौंपी गई थी। इसके बाद एजेंसी ने राज्य के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज 18 एफआईआर अपने हाथ में लेकर विस्तृत जांच शुरू की।

जांच में सामने आया कि LUCC का पंजीकरण वर्ष 2012 में एक बहु-राज्य सहकारी समिति के रूप में हुआ था। CBI के अनुसार, 2016 में समीर अग्रवाल ने संस्था का प्रबंधन अपने नियंत्रण में लेकर नया निदेशक मंडल गठित किया और उत्तराखंड में 50 से अधिक शाखाओं के माध्यम से कथित रूप से अनियमित जमा योजनाएं संचालित कीं। एजेंसी का आरोप है कि उत्तराखंड में संचालन की औपचारिक अनुमति 2017 में मिली, जबकि गतिविधियां उससे पहले ही शुरू कर दी गई थीं।

CBI का कहना है कि LUCC के पास कोई वास्तविक व्यावसायिक आय नहीं थी और पुराने निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से प्राप्त धन से किया जाता था। जांच एजेंसी के अनुसार, यह मॉडल कथित तौर पर पोंजी स्कीम की तरह संचालित किया गया, जिसके जरिए आम लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया गया।

एजेंसी का आरोप है कि समीर अग्रवाल इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था और उसने किशनलाल उदयलाल जैन तथा पंकज कुशल सिंह जैन के साथ मिलकर 10 शेल कंपनियों के बैंक खाते खुलवाए। इन खातों के माध्यम से निवेशकों की धनराशि का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया और लेयर्ड बैंकिंग लेन-देन के जरिए धन को विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया गया। CBI के अनुसार, समीर अग्रवाल और उनकी पत्नी सानिया अग्रवाल विदेश फरार हैं, जिनकी वापसी के लिए आवश्यक नोटिस और सर्कुलर जारी किए गए हैं।

जांच के दौरान CBI ने तरुण कुमार मौर्य, ममता भंडारी, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, राजेंद्र सिंह बिष्ट, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।

एजेंसी ने बताया कि आरोपियों से जुड़ी 39 संपत्तियों की पहचान कर उन्हें उत्तराखंड की सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अटैचमेंट की कार्रवाई के लिए भेजा गया। इनमें से 29 संपत्तियों पर अस्थायी अटैचमेंट आदेश जारी किए जा चुके हैं, जबकि शेष संपत्तियों के संबंध में कार्रवाई जारी है। CBI ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया तथा अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगी।

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