लखनऊ। उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल में 139 फार्मासिस्ट और डी-फार्मा के अभ्यर्थियों ने फर्जी मार्कशीट लगाकर रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया। काउंसिल को प्राप्त आवेदनों की जांच में यह खुलासा हुआ कि इनमें से अधिकांश अभ्यर्थियों ने कृष्णा विश्वविद्यालय, छतरपुर, मध्य प्रदेश के नाम से बनाई गई जाली मार्कशीट का इस्तेमाल किया।
काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार त्रिपाठी के अनुसार, इन फर्जी दस्तावेजों की मदद से अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया। जांच में यह भी पता चला कि कुल 139 में से 65 फार्मासिस्ट और 37 डी-फार्मा अभ्यर्थियों ने जाली अंकपत्र अपलोड किए थे। यह मामला फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद के सहयोग से उजागर हुआ।
सूत्रों के मुताबिक, सबसे पहले 31 दिसंबर 2025 को 74 फार्मासिस्टों और 40 डी-फार्मा अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि के लिए पत्राचार किया गया था। प्राविधिक शिक्षा परिषद की रिपोर्ट में पाया गया कि इनमें से अधिकांश उम्मीदवारों ने जाली मार्कशीट का सहारा लिया।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि फर्जी मार्कशीट के माध्यम से पंजीकरण कराने वाले अभ्यर्थियों ने काउंसिल की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रणाली का उपयोग किया। इस पूरे मामले की जानकारी काउंसिल ने तत्काल प्रमुख सचिव, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को भेजी।
मामले के खुलासे के बाद, रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने गाजीपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। इंस्पेक्टर राजेश मौर्या ने पुष्टि की कि तहरीर में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल डिप्लोमा में डिग्री धारक फार्मेसी छात्रों का पंजीकरण करता है। बीते कुछ महीनों में कुल 65 फार्मासिस्ट और 75 डी-फार्मा अभ्यर्थियों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किए, जिनकी जांच में जाली दस्तावेज पाए गए।
गाजीपुर थाने में दर्ज मुकदमे की तफ्तीश चल रही है। पुलिस और काउंसिल अधिकारियों का कहना है कि सभी मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी और जिम्मेदार अभ्यर्थियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जाली मार्कशीट तैयार करने वाले किसी भी संस्था या व्यक्ति की पहचान करने के लिए भी जांच जारी है।
फार्मेसी काउंसिल ने बताया कि जाली मार्कशीट का इस्तेमाल करने वाले अभ्यर्थियों के पंजीकरण रद्द किए जा सकते हैं और उन्हें भविष्य में फार्मेसी पेशे में शामिल होने से रोका जा सकता है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन सबमिशन प्रणाली के माध्यम से इस तरह के फर्जीवाड़े पर अब कड़ी नजर रखी जाएगी।
मामले की जांच में यह पाया गया कि कई अभ्यर्थियों ने केवल जाली अंकपत्र अपलोड करके रजिस्ट्रेशन कर लिया था, जबकि उनके वास्तविक दस्तावेज सत्यापित नहीं थे। फार्मेसी काउंसिल ने इस तरह की फर्जीवाड़े की घटनाओं को रोकने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों स्तरों पर सत्यापन प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया है।
काउंसिल के सूत्रों का कहना है कि अब इस मामले में और कई स्तरों पर पड़ताल की जा रही है। जांच में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी अभ्यर्थियों का पंजीकरण वैध है या नहीं और अगर किसी ने जाली दस्तावेज का इस्तेमाल किया है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि फार्मेसी पेशे में अनुशासन और सत्यापन प्रक्रिया का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष और कड़ी निगरानी के तहत की जा रही है।
