लखनऊ: वाणिज्य कर विभाग के पूर्व अपर आयुक्त केशवलाल की आय से कई गुना अधिक संपत्ति का बड़ा खुलासा हुआ है। सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की जांच में सामने आया है कि उन्होंने अपनी वैध आय से लगभग 1700 गुना अधिक संपत्ति अर्जित की। जांच में उनकी कुल संपत्ति करीब ₹25 करोड़ आंकी गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश के कई बड़े शहरों में मकान और भूखंड शामिल हैं।
विजिलेंस के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी केशवलाल (अब सेवानिवृत्त) के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की विस्तृत जांच जारी है। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही प्रारंभिक जांच और साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद की गई है, जिसमें उनकी आय और संपत्तियों के बीच भारी अंतर पाया गया।
जांच में यह सामने आया कि निर्धारित जांच अवधि के दौरान केशवलाल की कुल वैध आय करीब ₹1 करोड़ थी, जबकि उसी अवधि में संपत्तियों के अर्जन और उनके रखरखाव पर लगभग ₹18.27 करोड़ खर्च किए गए। इस भारी अंतर ने विजिलेंस अधिकारियों को चौंका दिया और इसे स्पष्ट रूप से आय से अधिक संपत्ति का मामला माना गया।
विजिलेंस द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों के अनुसार, केशवलाल के पास लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद और प्रयागराज जैसे शहरों में कई आवासीय संपत्तियां और भूखंड हैं। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य मिलाकर करीब ₹25 करोड़ आंका गया है। जांच एजेंसियां अब इन संपत्तियों के स्रोत और उनके अधिग्रहण के तरीके की गहराई से जांच कर रही हैं।
इस मामले में एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि वर्ष 2017 में आयकर विभाग ने केशवलाल के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान कानपुर और नोएडा सहित अन्य स्थानों पर की गई कार्रवाई में करीब ₹11 करोड़ नकद और लगभग ₹3.5 करोड़ के जेवर बरामद किए गए थे। इसके अलावा संपत्तियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए गए थे, जिन्होंने बाद की जांच में अहम भूमिका निभाई।
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सूत्रों के मुताबिक, इन बरामदियों के बाद ही केशवलाल की संपत्तियों और आय के बीच असमानता को लेकर संदेह गहराया था। इसी के आधार पर शासन ने सितंबर 2023 में विजिलेंस को खुली जांच करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद से ही विजिलेंस की टीम लगातार वित्तीय लेन-देन, संपत्ति खरीद और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच कर रही थी।
जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस कथित अवैध संपत्ति अर्जन में किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भी भूमिका रही है। अधिकारियों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर संपत्ति अर्जित करना अकेले संभव नहीं होता, इसलिए मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।
विजिलेंस ने कानपुर सेक्टर में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और अब कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, संबंधित विभागों से भी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि आरोपी की संपत्तियों और आय के सभी स्रोतों का पूरा ब्यौरा तैयार किया जा सके।
यह मामला एक बार फिर सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करता है। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में सख्त कार्रवाई की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है, ताकि भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
फिलहाल जांच एजेंसियां इस मामले की गहराई तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले समय में इस प्रकरण में और खुलासे होने की संभावना है, जो यह स्पष्ट करेंगे कि अवैध संपत्ति अर्जन का पूरा तंत्र कैसे काम करता रहा।
