नई दिल्ली। देशभर में पेट्रोल पंप पर होने वाली छोटी दिखने वाली गड़बड़ियां अब एक बड़े आर्थिक खतरे का रूप लेती जा रही हैं। ‘जंप ट्रिक’ नाम की यह चालाकी भरी धोखाधड़ी आम उपभोक्ताओं को बिना शक हुए नुकसान पहुंचा रही है। हर दिन कुछ रुपये की ठगी भले ही छोटी लगे, लेकिन जब इसे लाखों ग्राहकों और हजारों लेन-देन से जोड़ा जाता है, तो यह नुकसान करोड़ों तक पहुंच सकता है।
अक्सर देखा गया है कि ग्राहक पेट्रोल भरवाते समय मशीन पर ‘0’ देखकर संतुष्ट हो जाते हैं और आगे की प्रक्रिया पर ध्यान नहीं देते। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर यह फ्रॉड किया जाता है। पेट्रोल भरते समय शुरुआती कुछ सेकंड में ही पूरा खेल हो जाता है और ग्राहक को इसका एहसास तक नहीं होता।
क्या है ‘जंप ट्रिक’ का पूरा खेल?
इस तरीके में पेट्रोल पंप की मशीन शुरुआत में तो ‘0’ दिखाती है, लेकिन जैसे ही फ्यूल भरना शुरू होता है, मीटर अचानक तेजी से आगे बढ़ जाता है। सामान्य तौर पर मीटर की रीडिंग धीरे-धीरे बढ़नी चाहिए, लेकिन इस ट्रिक में यह सीधे ₹10, ₹20 या उससे ज्यादा पर छलांग लगा देता है।
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असल में, स्क्रीन पर दिखाई देने वाला यह उछाल वास्तविक ईंधन की मात्रा को नहीं दर्शाता। यानी ग्राहक जितना भुगतान करता है, उतना पेट्रोल उसे नहीं मिलता। यही इस धोखाधड़ी का मूल तरीका है, जिसमें कुछ सेकंड में ही ग्राहक को चूना लगा दिया जाता है।
तकनीकी छेड़छाड़ और अंदरूनी भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की धोखाधड़ी बिना मशीन में छेड़छाड़ के संभव नहीं होती। पेट्रोल डिस्पेंसर की सेटिंग्स में बदलाव या कैलिब्रेशन के साथ छेड़छाड़ कर रीडिंग को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है।
कुछ मामलों में मशीन की शुरुआती रीडिंग को जानबूझकर तेज कर दिया जाता है, ताकि ग्राहक को लगे कि सब कुछ सामान्य है। लेकिन वास्तव में नोजल से निकलने वाले ईंधन की मात्रा कम होती है। इस तरह की गड़बड़ी में अंदरूनी जानकारी और कर्मचारियों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
ध्यान भटकाने की रणनीति भी अहम
इस फ्रॉड का एक अहम हिस्सा है ग्राहक का ध्यान भटकाना। कई बार कर्मचारी बातचीत में उलझाकर, मोबाइल पर कुछ दिखाकर या अन्य तरीकों से ग्राहक का ध्यान मशीन से हटाते हैं। इसी दौरान ‘जंप ट्रिक’ को अंजाम दिया जाता है।
यह एक तरह की मनोवैज्ञानिक चाल है, जिसमें ग्राहक की सतर्कता कम कर दी जाती है और धोखाधड़ी आसानी से हो जाती है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पेट्रोल भरते समय पूरा ध्यान मशीन की रीडिंग पर ही रखें।
नॉर्मल और संदिग्ध रीडिंग में फर्क समझें
पेट्रोल पंप मशीन में ₹4 से ₹5 तक का शुरुआती उछाल सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर यह उछाल इससे ज्यादा हो या रीडिंग बहुत तेजी से बढ़े, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।
ग्राहकों को चाहिए कि वे केवल ‘0’ देखने तक सीमित न रहें, बल्कि पेट्रोल भरने की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखें। शुरुआती कुछ सेकंड सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं और यहीं सबसे ज्यादा धोखाधड़ी होती है।
कैसे बचें इस तरह की ठगी से?
इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए सबसे जरूरी है जागरूकता और सतर्कता। पेट्रोल भरवाते समय मोबाइल फोन या अन्य चीजों में ध्यान लगाने के बजाय मशीन पर नजर रखें।
अगर ‘0’ के बाद मीटर में कोई असामान्य उछाल दिखे, तो तुरंत कर्मचारी को रोकें और सवाल करें। जरूरत पड़ने पर पंप मैनेजर से शिकायत करें और रसीद लेना न भूलें।
इसके अलावा, अपने वाहन के माइलेज पर नजर रखना भी एक अच्छा तरीका है, जिससे आप समझ सकते हैं कि आपको सही मात्रा में ईंधन मिल रहा है या नहीं।
छोटी ठगी से बड़ा नुकसान—सावधानी ही समाधान
‘जंप ट्रिक’ जैसे मामले यह दिखाते हैं कि अब धोखाधड़ी केवल बड़े लेन-देन तक सीमित नहीं रही। छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन में भी बड़े स्तर पर फ्रॉड किया जा रहा है।
हर दिन कुछ रुपये की ठगी मिलकर एक बड़ा आर्थिक नुकसान बन जाती है, जिसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि ग्राहक सतर्क रहें और किसी भी तरह की गड़बड़ी को नजरअंदाज न करें।
जागरूकता ही इस तरह के फ्रॉड से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
