टाटा पावर की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर सुरक्षा राशि के नाम पर रकम वसूलने का आरोप; 11 मोबाइल, लैपटॉप, फर्जी पहचान पत्र और संदिग्ध दस्तावेज बरामद

फर्जी इंस्टाग्राम सौदे, व्हाट्सऐप पर पार्सल के वीडियो और 114 बैंक खाते; अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क के पांच आरोपी गिरफ्तार

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By Roopa
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मुंबई। उल्हासनगर अपराध शाखा ने फर्जी ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए देशभर में खरीदारों को निशाना बनाने वाले कथित अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने कथित तौर पर बाजार कीमत से काफी कम दाम पर आईफोन, अन्य स्मार्टफोन और फर्नीचर बेचने का लालच देकर लोगों को फंसाया। भुगतान ऑनलाइन लेने के बाद आरोपी कथित तौर पर संपर्क तोड़ देते थे और सामान की डिलीवरी नहीं करते थे।

जांच के अनुसार, कथित ठगी की शुरुआत फर्जी इंस्टाग्राम खातों के जरिए पोस्ट किए गए विज्ञापनों से होती थी। इन खातों को इस तरह तैयार किया गया था कि ऑफर वास्तविक दिखाई दें और महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान तथा फर्नीचर सस्ते दाम में खरीदने की चाह रखने वाले लोग आकर्षित हों। जैसे ही कोई संभावित खरीदार रुचि दिखाता, आरोपी कथित तौर पर बातचीत को व्हाट्सऐप पर ले जाते और ऑर्डर तथा डिलीवरी की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देने लगते थे।

फर्जी पार्सल वीडियो से बढ़ाते थे भरोसा

जांचकर्ताओं के मुताबिक, भुगतान लेने से पहले आरोपियों ने भरोसा कायम करने के लिए कई तरीके अपनाए। खरीदारों को कथित तौर पर फर्जी पार्सल बारकोड और पैक किए जा रहे सामान के वीडियो भेजे जाते थे। इसका उद्देश्य खरीदार को यह विश्वास दिलाना था कि उसका सामान तैयार हो चुका है और जल्द ही भेज दिया जाएगा।

इसके बाद आरोपी कथित तौर पर खरीदारों से ऑनलाइन भुगतान कराने के लिए कहते थे। रकम खाते में पहुंचने के बाद वे पीड़ितों को जवाब देना बंद कर देते थे और वादा किया गया सामान कभी नहीं पहुंचता था। पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी इंस्टाग्राम खाते किसने बनाए और उनका संचालन कैसे किया जाता था। साथ ही, गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं, इसकी भी जांच की जा रही है।

उल्हासनगर में पांच आरोपी गिरफ्तार

गिरफ्तारी उल्हासनगर अपराध शाखा को मिली सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई के बाद हुई। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने उल्हासनगर में एक ठिकाने पर छापा मारा और कथित नेटवर्क में अहम भूमिका निभाने वाले पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

कार्रवाई के दौरान जांचकर्ताओं ने करीब ₹1.20 लाख कीमत के मोबाइल फोन भी जब्त किए। इन उपकरणों की जांच की जा रही है। इनमें पीड़ितों के साथ बातचीत, सामाजिक माध्यमों पर गतिविधियों, भुगतान से जुड़ी जानकारी और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में सुराग मिलने की संभावना है।

जब्त मोबाइल उपकरणों से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आरोपी संभावित खरीदारों से कैसे संपर्क करते थे और कथित लेनदेन को किस तरह संचालित करते थे। जांचकर्ता अन्य फर्जी खातों और इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की भी पहचान कर रहे हैं।

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114 बैंक खातों से जुड़ा वित्तीय नेटवर्क

जांच में कथित ठगी का वित्तीय दायरा भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, नेटवर्क द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कम से कम 75 शिकायतों से जुड़े मिले हैं।

जांचकर्ताओं को यह भी पता चला कि कथित गिरोह ने ठगी से हासिल रकम के लेनदेन के लिए 114 बैंक खातों का इस्तेमाल किया। पुलिस इन खातों की जांच कर रही है ताकि पीड़ितों से रकम मिलने के बाद उसके प्रवाह का पता लगाया जा सके। साथ ही उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने रकम प्राप्त करने, दूसरे खातों में भेजने या निकालने में कथित तौर पर मदद की हो।

इतनी बड़ी संख्या में बैंक खातों और साइबर अपराध शिकायतों से संकेत मिलता है कि गिरफ्तार आरोपी किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। जांचकर्ता वित्तीय दस्तावेजों और डिजिटल संवादों की पड़ताल कर कथित गिरोह के वास्तविक दायरे का पता लगा रहे हैं।

अन्य पीड़ितों और सहयोगियों की तलाश

उल्हासनगर थाने में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस जब्त मोबाइल फोन, बैंक खातों, संवाद और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। इसका उद्देश्य नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करना और यह पता लगाना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में कितने और लोगों को निशाना बनाया गया।

साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ठग अब सामाजिक माध्यमों पर विज्ञापन के साथ फर्जी डिलीवरी प्रमाण का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतते हैं। उनके मुताबिक, सस्ता सामान दिखाकर पीड़ित को आकर्षित किया जाता है और पार्सल वीडियो, बारकोड तथा लगातार व्हाट्सऐप बातचीत के जरिए उसे यह विश्वास दिलाया जाता है कि सौदा वास्तविक है। भुगतान होते ही ठग संपर्क तोड़ देते हैं।

जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या आरोपियों ने कई इंस्टाग्राम खातों और अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल किया था। पुलिस की कार्रवाई से कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उसके वित्तीय ढांचे तक पहुंचने में अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।

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