ब्रिटिश पुलिस द्वारा जब्त डिजिटल संपत्ति की बढ़ी कीमत पर विवाद; पीड़ित चाहते हैं पूरी राशि लौटाई जाए, ट्रेजरी पर मूल्य वृद्धि पर दावा करने का आरोप

₹31,000 करोड़ के बिटकॉइन पर कानूनी जंग तेज: चीनी क्रिप्टो ठगी के पीड़ितों ने ब्रिटेन सरकार के दावे को दी चुनौती

Team The420
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ब्रिटेन में पुलिस द्वारा जब्त किए गए लगभग ₹31,000 करोड़ मूल्य के बिटकॉइन को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। चीन से जुड़े एक बड़े क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड के पीड़ित अब अदालत में लड़ाई लड़ रहे हैं, ताकि ब्रिटेन की सरकार इस डिजिटल संपत्ति के बढ़े हुए मूल्य पर कब्जा न कर सके और पूरी राशि उन्हें लौटाई जा सके।

यह मामला उन बिटकॉइन से जुड़ा है जिन्हें ब्रिटिश जांच एजेंसियों ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय घोटाले की जांच के दौरान जब्त किया था। शुरुआती जांच में यह डिजिटल संपत्ति कथित तौर पर चीन में हुए एक बड़े क्रिप्टो निवेश घोटाले से जुड़ी बताई गई थी, जिसमें हजारों निवेशकों से भारी रकम ठगी गई थी।

जांच के दौरान जब बिटकॉइन जब्त किए गए थे, उस समय उनकी कीमत अपेक्षाकृत कम थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में क्रिप्टोकरेंसी बाजार में तेजी के कारण उनकी कीमत कई गुना बढ़ गई और अब उनकी कुल कीमत लगभग ₹31,000 करोड़ तक पहुंच चुकी है। इसी बढ़ी हुई कीमत को लेकर अब कानूनी विवाद गहरा गया है।

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पीड़ितों का कहना है कि यह डिजिटल संपत्ति मूल रूप से उनसे ठगी गई थी, इसलिए वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर पूरी राशि उन्हें लौटाई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि ब्रिटेन का ट्रेजरी विभाग इस जब्त संपत्ति की कीमत में हुई वृद्धि पर दावा कर रहा है, जिससे पीड़ितों को पूरा मुआवजा मिलने में बाधा आ सकती है।

कानूनी दस्तावेजों के अनुसार, कई निवेशकों ने अदालत में याचिका दायर कर कहा है कि यह धनराशि सीधे तौर पर धोखाधड़ी से हासिल की गई थी और इसका वास्तविक मालिकाना हक पीड़ितों का ही है। उनका तर्क है कि सरकार की भूमिका केवल अपराध की जांच और जब्त संपत्ति की सुरक्षा तक सीमित होनी चाहिए, न कि उस पर अधिकार जताने तक।

दूसरी ओर, ब्रिटेन सरकार का कहना है कि जब किसी आपराधिक जांच के दौरान डिजिटल संपत्ति जब्त की जाती है, तो उसके प्रबंधन और वितरण की प्रक्रिया अदालत के निर्देशों के तहत ही तय होती है। अधिकारियों का तर्क है कि अंतिम फैसला अदालत ही करेगी कि यह संपत्ति किसे और किस आधार पर दी जाएगी।

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक यह मामला क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अपराधों और डिजिटल संपत्तियों के स्वामित्व से जुड़े विवादों में एक अहम मिसाल बन सकता है। यदि अदालत पीड़ितों के पक्ष में फैसला देती है, तो भविष्य में जब्त की गई क्रिप्टो संपत्तियों के वितरण की प्रक्रिया पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के वर्षों में दुनिया भर में साइबर ठगी और क्रिप्टो निवेश घोटालों के मामलों में तेजी आई है। कई मामलों में अपराधी डिजिटल संपत्ति को अलग-अलग देशों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए धन का पता लगाना और पीड़ितों को पैसा लौटाना बेहद जटिल हो जाता है।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में अदालत आने वाले महीनों में विस्तृत सुनवाई कर सकती है। इस दौरान यह तय किया जाएगा कि जब्त किए गए बिटकॉइन का असली हकदार कौन है और उसकी मौजूदा कीमत के आधार पर पीड़ितों को किस प्रकार मुआवजा दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुकदमा वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो संपत्तियों की जब्ती, स्वामित्व और पीड़ितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया को लेकर नई कानूनी दिशा तय कर सकता है। यदि पीड़ितों को पूरी राशि मिलती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय साइबर वित्तीय अपराधों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है।

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