ठाणे। महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ₹20 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। कल्याण निवासी 27 वर्षीय महिला की शिकायत पर विठ्ठलवाड़ी पुलिस ने मराठी लोकगायिका निशा भगत और अनिल आहिरे के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों ने महिला और उसके पति को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर वर्ष 2023 में अलग-अलग चरणों में कुल ₹20 लाख लिए, लेकिन नौकरी नहीं लगवाई और बाद में रकम लौटाने से भी इनकार कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। दोनों आरोपियों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किया गया है। फिलहाल किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित नौकरी दिलाने के इस नेटवर्क में उल्हासनगर सेंट्रल हॉस्पिटल के किसी कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं।
परिवार से पुराने संबंधों का उठाया भरोसा
शिकायतकर्ता सायली चव्हाण ने पुलिस को बताया कि उनके माता-पिता गायक और कलाकार हैं। इसी वजह से निशा भगत और अनिल आहिरे का उनके परिवार के घर आना-जाना था और दोनों परिवार के साथ कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेते थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, इसी परिचय और विश्वास का फायदा उठाकर आरोपियों ने दावा किया कि सरकारी विभागों में उनके मजबूत संपर्क हैं और वे सरकारी नौकरी लगवा सकते हैं।
आरोप है कि दोनों ने सायली और उनके पति को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसी दौरान उल्हासनगर सेंट्रल हॉस्पिटल में दो पद खाली होने की बात कही गई और दावा किया गया कि पैसे देने पर इन पदों पर नियुक्ति कराई जा सकती है।
मार्च से सितंबर 2023 तक लिए ₹20 लाख
शिकायत के अनुसार, मार्च 2023 से सितंबर 2023 के बीच आरोपियों ने नौकरी दिलाने के नाम पर महिला से कुल ₹20 लाख लिए। रकम देने के बावजूद जब नौकरी नहीं मिली तो महिला ने आरोपियों से संपर्क कर पैसे वापस करने की मांग की। आरोप है कि बार-बार मांग के बावजूद रकम वापस नहीं की गई।
इसके बाद महिला ने पुलिस से शिकायत की और कथित लेन-देन से संबंधित साक्ष्य भी उपलब्ध कराने की बात कही। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उनके पास आरोपियों को किए गए वित्तीय भुगतान के रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिनकी जांच पुलिस कर रही है।
नौकरी के बदले पैसे की बातचीत का वीडियो होने का दावा
शिकायतकर्ता ने पुलिस को यह भी बताया है कि उनके पास एक वीडियो मौजूद है, जिसमें कथित तौर पर आरोपी नौकरी दिलाने के लिए पैसों की बातचीत करते दिखाई देते हैं। पुलिस अब इस वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें दिखाई देने वाली बातचीत वास्तविक है या नहीं और उसका मामले से क्या संबंध है।
पुलिस वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड के साथ आरोपियों और शिकायतकर्ता के बीच हुई बातचीत तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का भी परीक्षण करेगी। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि रकम वास्तव में किस उद्देश्य से ली गई थी और क्या इसके पीछे कोई संगठित नौकरी के बदले पैसे लेने का नेटवर्क सक्रिय था।
सेंट्रल हॉस्पिटल के कर्मचारियों की भूमिका भी जांच में
मामले में पुलिस केवल आरोपियों तक जांच सीमित नहीं रख रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या उल्हासनगर सेंट्रल हॉस्पिटल के किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति ने नौकरी दिलाने के कथित वादे में मदद की थी। यदि अस्पताल से जुड़े किसी व्यक्ति के साथ आरोपियों के संपर्क या वित्तीय लेन-देन के साक्ष्य मिलते हैं तो जांच का दायरा बढ़ सकता है।
शिकायतकर्ता ने कथित नौकरी के बदले पैसे के लेन-देन की जांच की मांग को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री से भी संपर्क किया है। इससे मामले में विभागीय स्तर पर भी जांच की संभावना बनी है।
BNS की धाराओं में दर्ज हुआ मामला
विठ्ठलवाड़ी पुलिस ने शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 406 और 420 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब आरोपियों के बयान दर्ज करने के साथ शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच करेगी।
पुलिस के अनुसार, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। आरोपियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष दर्ज किया जा रहा है। जांच में यदि वित्तीय लेन-देन, वीडियो और अन्य साक्ष्यों से लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस का फोकस ₹20 लाख के कथित लेन-देन की पुष्टि, नौकरी दिलाने के दावे की वास्तविकता और अस्पताल से जुड़े संभावित संपर्कों की भूमिका का पता लगाने पर है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित नौकरी ठगी केवल दो लोगों तक सीमित थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।
