तेलंगाना के मेडक में को-ऑपरेटिव बैंक मैनेजर पर फर्जी गोल्ड लोन और 16 खातों के जरिए ₹1.80 करोड़ की हेराफेरी का आरोप।

₹1.80 करोड़ का बैंक घोटाला: मैनेजर ने फर्जी गोल्ड लोन और 16 खातों से की हेराफेरी, जांच में बड़ा खुलासा

Team The420
5 Min Read

तेलंगाना के मेडक जिले में स्थित आदर्श को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक में एक बड़े वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है, जहां एक बैंक मैनेजर पर अपने ही संस्थान को करोड़ों रुपये का चूना लगाने का आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार आरोपी मैनेजर अनिल ने फर्जी गोल्ड लोन और अवैध बैंक खातों के जरिए लगभग ₹1.80 करोड़ की हेराफेरी की है। घटना सामने आने के बाद बैंक और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के अनुसार, आरोपी मैनेजर वर्तमान में फरार है और उसकी तलाश में विशेष टीमें गठित की गई हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अनिल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 16 अलग-अलग बैंक खाते खोले, जिनमें उसने अपनी पत्नी, करीबी दोस्तों और परिचितों के आधार और पैन कार्ड विवरण का इस्तेमाल किया। इन खातों का उपयोग कथित तौर पर अवैध लेनदेन और धन को इधर-उधर करने के लिए किया गया।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने बेहद छोटे 1-ग्राम के गहनों को बड़ी कीमत वाले सोने के आभूषण के रूप में दिखाकर फर्जी गोल्ड लोन पास करवाए। इस तरीके से उसने बैंक से लगभग ₹1.49 करोड़ के लोन हासिल कर लिए, जबकि वास्तविक सोने का मूल्य बहुत कम था। यह पूरी प्रक्रिया बैंकिंग रिकॉर्ड में हेरफेर कर अंजाम दी गई।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

इसके अलावा, आरोपी पर यह भी आरोप है कि उसने एटीएम के माध्यम से किए गए नकद जमा को भी गलत तरीके से अपने निजी उपयोग में मोड़ दिया। जांच में पाया गया कि करीब ₹31.35 लाख की राशि, जो ग्राहकों द्वारा जमा की गई थी, उसे बैंक खाते में सही तरीके से क्रेडिट नहीं किया गया और उसका दुरुपयोग किया गया।

कुल मिलाकर इस पूरे मामले में अनुमानित धोखाधड़ी राशि ₹1.80 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। बैंक प्रबंधन को जब लेनदेन में गड़बड़ी का संदेह हुआ तो आंतरिक जांच शुरू की गई, जिसके बाद इस बड़े घोटाले का खुलासा हुआ। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और औपचारिक एफआईआर दर्ज की गई।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अनिल का नाम पहले भी एक अन्य धोखाधड़ी मामले में आ चुका है। बताया जा रहा है कि उसे ऑनलाइन बेटिंग की लत थी और भारी वित्तीय नुकसान के चलते उसने बैंक में धोखाधड़ी की योजना बनाई। पुलिस का मानना है कि उसने अपनी स्थिति और पहुंच का फायदा उठाकर लंबे समय तक यह घोटाला छिपाए रखा।

इस मामले में पुलिस ने आरोपी की पत्नी और एक करीबी सहयोगी सुभ्रमण्यम को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार इन दोनों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है और उनसे पूछताछ जारी है।

बैंक प्रशासन ने कहा है कि आंतरिक ऑडिट और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के बाद कई अनियमितताएं सामने आई हैं। फिलहाल सभी संदिग्ध खातों को फ्रीज कर दिया गया है और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि और कितनी राशि प्रभावित हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला एक बार फिर को-ऑपरेटिव बैंकिंग सिस्टम में आंतरिक निगरानी की कमजोरी को उजागर करता है। डिजिटल बैंकिंग और तेजी से बढ़ते लेनदेन के बीच यदि नियंत्रण तंत्र मजबूत न हो तो ऐसे घोटाले आसानी से अंजाम दिए जा सकते हैं।

फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश में जुटी है और उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने पर और भी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। इस घटना ने बैंकिंग सेक्टर में सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हमसे जुड़ें

Share This Article