घर-घर जनगणना के दौरान अब रियल-टाइम QR वेरिफिकेशन अनिवार्य; फर्जी सरकारी कर्मचारियों और बढ़ते ‘इम्पर्सनेशन स्कैम’ पर कसा जाएगा शिकंजा

“जनगणना 2027 में QR कोड सुरक्षा पर जोर: फर्जी पहचान और साइबर ठगी रोकने के लिए डिजिटल सत्यापन सिस्टम लागू”

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By Roopa
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नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड और पहचान से जुड़े फर्जीवाड़े के मामलों को देखते हुए सरकार ने जनगणना 2027 की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। अब घर-घर जाकर डेटा एकत्र करने वाले एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर के लिए QR कोड आधारित डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू कर दी गई है। इस कदम का उद्देश्य फर्जी सरकारी अधिकारियों की आड़ में होने वाली ठगी और डेटा दुरुपयोग की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है।

यह नई व्यवस्था 16 मई से दिल्ली नगर निगम (MCD) क्षेत्रों में शुरू होने वाले डोर-टू-डोर जनगणना कार्य से लागू की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि जनगणना कार्य में तैनात सभी एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर को अब नियुक्ति पत्र और आधिकारिक पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा, जिसे संबंधित चार्ज ऑफिसर द्वारा जारी किया जाएगा। इन दोनों दस्तावेजों में QR कोड शामिल होंगे, जिन्हें कोई भी नागरिक अपने मोबाइल से स्कैन कर तुरंत सत्यता की जांच कर सकेगा।

QR कोड स्कैन करने पर संबंधित कर्मचारी की जानकारी सीधे जनगणना डिप्लॉयमेंट डेटाबेस से जुड़कर सामने आएगी। इससे घर-घर आने वाले किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पहचान तुरंत सत्यापित हो सकेगी और फर्जी अधिकारियों की एंट्री लगभग असंभव हो जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में “इम्पर्सनेशन फ्रॉड” यानी फर्जी पहचान बनाकर ठगी के मामलों में तेज वृद्धि हुई है। कई घटनाओं में अपराधियों ने खुद को सरकारी सर्वे टीम, पुलिस अधिकारी या नगर निगम कर्मचारी बताकर लोगों से व्यक्तिगत डेटा, बैंक जानकारी और यहां तक कि पैसे भी ऐंठ लिए हैं।

इसके अलावा “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम और फर्जी जनगणना मैसेज के मामलों ने भी लोगों के बीच भ्रम और डर पैदा किया है। साइबर अपराधी अब नकली दस्तावेजों और तकनीकी हेरफेर का इस्तेमाल कर इतने वास्तविक दिखने वाले फॉर्म और आईडी तैयार कर रहे हैं कि आम नागरिकों के लिए असली और नकली में अंतर करना मुश्किल हो गया है।

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साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि QR आधारित सत्यापन सिस्टम इस खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर Triveni Singh ने कहा, “आज के समय में साइबर अपराधी सबसे ज्यादा भरोसे का फायदा उठाते हैं। जब कोई व्यक्ति खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर घर पर आता है, तो नागरिक बिना जांच के जानकारी साझा कर देते हैं। QR आधारित रियल-टाइम वेरिफिकेशन सिस्टम इस भरोसे के दुरुपयोग को रोकने में बेहद प्रभावी साबित हो सकता है, क्योंकि इससे पहचान तुरंत डिजिटल डेटाबेस से सत्यापित हो जाएगी और फर्जीवाड़े की गुंजाइश काफी कम रह जाएगी।”

सूत्रों के अनुसार, यह प्रणाली केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि इससे जनगणना प्रक्रिया की कार्यकुशलता भी बढ़ेगी। QR कोड आधारित सत्यापन से मैनुअल जांच का समय कम होगा और डेटा संग्रह अधिक तेज़ी से पूरा किया जा सकेगा, खासकर घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में।

अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में चल रही सेल्फ-एन्यूमरेशन प्रक्रिया के तहत एक दिन में 93,521 प्रविष्टियां दर्ज की गईं, जिनमें से 77,372 मामलों को पूरा किया गया और 16,149 मामलों की शुरुआत हुई। कुल मिलाकर प्रगति दर 82.73 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

इसके साथ ही, जहां घरों का जियो-टैगिंग संभव नहीं होगा, वहां नागरिक नजदीकी स्थान टैग कर सकेंगे और एन्यूमरेटर पहले से डाउनलोड किए गए मैप डेटा के आधार पर सत्यापन कार्य पूरा करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा बदलाव है, जहां तकनीक को सीधे जमीनी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में शामिल कर सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों को मजबूत किया जा रहा है।

जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच आने वाले समय में और भी डिजिटल सुरक्षा उपाय लागू किए जाने की संभावना है, ताकि डेटा की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके और नागरिकों का भरोसा पूरी प्रक्रिया पर कायम रहे।

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