बेंगलुरु। कर्नाटक राज्य वाणिज्यिक कर विभाग ने GST फर्जीवाड़े के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹2,384 करोड़ के कथित फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह रैकेट फर्जी कंपनियों, नकली बिलिंग और कागजी कारोबार के जरिए चलाया जा रहा था। मामले में दो प्रमुख आरोपियों को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया है।
यह कार्रवाई राज्य वाणिज्यिक कर विभाग के प्रवर्तन विंग (साउथ जोन) और सर्विस एनालिसिस एंड इंटेलिजेंस विंग की संयुक्त जांच के दौरान सामने आई। अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से संचालित हो रहा था और इसमें स्क्रैप ट्रेडिंग, ई-वेस्ट और टंगस्टन कार्बाइड स्क्रैप कारोबार का इस्तेमाल किया जा रहा था।
जांच के अनुसार, आरोपी सलीमुल्ला बेग, जो SKS Traders से जुड़ा बताया जा रहा है, ने कथित तौर पर 72 फर्जी सप्लायर इकाइयों के जरिए लगभग ₹2,172 करोड़ के संदिग्ध कारोबार को अंजाम दिया। एजेंसियों का दावा है कि इसके जरिए करीब ₹382 करोड़ का फर्जी ITC हासिल किया गया।
दूसरे आरोपी हस्सैन बेग, जो नयनदहल्ली स्थित K.H. E-Waste Recycler से जुड़ा बताया गया है, पर 55 बोगस सप्लायर फर्मों के जरिए लगभग ₹212 करोड़ के संदिग्ध कारोबार और करीब ₹38 करोड़ के फर्जी ITC क्लेम का आरोप है।
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अब तक की जांच में कुल 127 फर्जी संस्थाओं की पहचान की गई है, जिनके जरिए कथित तौर पर ₹2,384 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन और लगभग ₹420 करोड़ के नकली ITC दावों का नेटवर्क संचालित किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और कई स्तरों पर फर्जी दस्तावेजों और बिलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कई फर्में केवल कागजों पर मौजूद थीं और उनके पास वास्तविक कारोबार, गोदाम, स्टाफ या माल परिवहन का कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं मिला। कई कंपनियों में अचानक कारोबार में असामान्य उछाल भी देखा गया। एक प्रमुख फर्म का टर्नओवर तीन वित्तीय वर्षों के भीतर ₹50 करोड़ से बढ़कर ₹945 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि उसके पास वास्तविक व्यापारिक गतिविधियों का पर्याप्त आधार नहीं था।
अधिकारियों का मानना है कि यह वृद्धि वास्तविक व्यापार के बजाय फर्जी टैक्स इनवॉइस और कागजी ट्रांजैक्शन के जरिए दिखाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि टंगस्टन कार्बाइड स्क्रैप से जुड़े सौदों के जरिए ही लगभग ₹217 करोड़ का संदिग्ध कारोबार और करीब ₹39 करोड़ का फर्जी ITC क्लेम किया गया।
सूत्रों के अनुसार, जब भी विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जाते या ITC ब्लॉक करने जैसी कार्रवाई शुरू होती, आरोपी नए नामों से फर्जी फर्में बनाकर नेटवर्क को दोबारा सक्रिय कर देते थे। इससे जांच एजेंसियों को ट्रांजैक्शन ट्रेल ट्रैक करने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा।
वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी ITC नेटवर्क देशभर में टैक्स प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे मामलों में कागजी कंपनियों, नकली खरीद-बिक्री रिकॉर्ड और डिजिटल बिलिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर टैक्स क्रेडिट हासिल किया जाता है। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि आर्थिक अपराधी अब टेक्नोलॉजी और शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर टैक्स फ्रॉड को संगठित अपराध के रूप में संचालित कर रहे हैं, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होता है।
फिलहाल दोनों आरोपियों को GST कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, संभावित फर्जी कंपनियों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां तथा संपत्ति जब्ती की कार्रवाई भी हो सकती है।
