रमनाथपुरम। तमिलनाडु के रमनाथपुरम जिले में सक्रिय एक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। साइबर अपराध जांच के दौरान सात सदस्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया गया, जो कथित तौर पर ऑनलाइन ठगी से जुटाई गई रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशी साइबर सिंडिकेट तक पहुंचाने का काम कर रहा था।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह गिरोह जिले के सथिराकुडी और परमाकुडी गांवों से संचालित हो रहा था। लंबे समय से साइबर स्पेस में निगरानी और तकनीकी जांच के बाद अधिकारियों को इस संगठित नेटवर्क के बारे में अहम सुराग मिले। इसके बाद विशेष टीम गठित कर कार्रवाई की गई और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
यह पूरा मामला एक ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें एक पीड़ित से करीब ₹1.36 करोड़ की ठगी की गई थी। इसी मामले की जांच के दौरान यह पता चला कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को व्यवस्थित तरीके से इकट्ठा कर उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलने का काम किया जा रहा था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वर्ष 2025 और 2026 के दौरान इस गिरोह ने साइबर अपराध से प्राप्त लगभग ₹100 करोड़ की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित किया। इसके बाद यह राशि विभिन्न डिजिटल वॉलेट के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।
जांचकर्ताओं का कहना है कि यह मॉड्यूल बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट के लिए काम कर रहा था। स्थानीय स्तर पर मौजूद सदस्य ठगी से प्राप्त पैसे को इकट्ठा करने, उसे डिजिटल माध्यमों से छिपाने और अंततः विदेशी वॉलेट्स में भेजने की भूमिका निभाते थे।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “आजकल अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह कई देशों में छोटे-छोटे मॉड्यूल बनाकर काम करते हैं। ये मॉड्यूल स्थानीय स्तर पर ठगी की रकम को इकट्ठा करते हैं और फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशों में बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचाते हैं, जिससे पैसे के स्रोत का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल से साइबर अपराधियों को धन के लेनदेन को छिपाने में मदद मिलती है। कई मामलों में पैसा पहले कई डिजिटल वॉलेट्स के बीच घुमाया जाता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए ट्रांजैक्शन का पूरा ट्रेल पकड़ना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
जांच के दौरान यह भी संकेत मिले हैं कि गिरोह के सदस्य न सिर्फ निवेश से जुड़ी ठगी में शामिल थे, बल्कि वे अन्य साइबर अपराध गतिविधियों से प्राप्त धन को भी ट्रांसफर करने का काम कर रहे थे।
मामले की जांच अभी जारी है और अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान भी जल्द हो सकती है। साथ ही उस बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भी पता लगाया जा रहा है, जिसके लिए यह स्थानीय गिरोह काम कर रहा था।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में निवेश से जुड़े साइबर फ्रॉड तेजी से बढ़े हैं। सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को जल्दी मुनाफे का लालच देकर बड़ी रकम ठगी जा रही है।
प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, “निवेश से जुड़ी ऑनलाइन स्कीमों में अत्यधिक मुनाफे का वादा अक्सर साइबर ठगी का संकेत होता है। यदि कोई प्लेटफॉर्म या व्यक्ति बहुत कम समय में असामान्य लाभ का दावा करता है, तो उससे सावधान रहना चाहिए।”
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी विश्वसनीयता की पूरी तरह जांच कर लें। अनजान वेबसाइट, मोबाइल ऐप या सोशल मीडिया पर भेजे गए लिंक के माध्यम से निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
इसके अलावा संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि या साइबर ठगी के मामलों की तुरंत शिकायत दर्ज कराना भी बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में पीड़ित राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत कर सकते हैं या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार के साथ साइबर अपराध के तरीके भी जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे में जागरूकता, सतर्कता और समय पर रिपोर्टिंग ही इस तरह की ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
