सूरत के कारोबारी को ऑनलाइन पोस्ट लाइक और समीक्षा के छोटे कामों का लालच देकर जाल में फंसाया; फर्जी निवेश मंच पर मुनाफे और रकम निकालने का भरोसा देकर लगातार कराया भुगतान

पहले ₹150 देकर जीता भरोसा, फिर ₹26.12 लाख की ठगी; टेलीग्राम निवेश घोटाले में 20 वर्षीय युवक गिरफ्तार

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By Roopa
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अहमदाबाद। गुजरात पुलिस की सूरत साइबर सेल ने ऑनलाइन निवेश ठगी के एक मामले में 20 वर्षीय युवक आदित्य पांडेय को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह टेलीग्राम के जरिए चलाए जा रहे साइबर ठगी नेटवर्क में लेनदेन के लिए अपने बैंक खाते का इस्तेमाल कराता था। पुलिस अब इस मामले के कथित मुख्य आरोपी आरिफ की तलाश कर रही है, जो फरार बताया जा रहा है।

मामला सूरत के एक कारोबारी से जुड़ा है, जिसे सोशल मीडिया के जरिए आसान कमाई का लालच दिया गया था। ठगों ने शुरुआत में उसे ऑनलाइन छोटे-छोटे काम करने के बदले ₹150 का भुगतान किया। इनमें पोस्ट को लाइक करना और उसकी समीक्षा करना जैसे काम शामिल थे। कारोबारी को जब शुरुआती काम के बदले वास्तव में रकम मिली तो उसे योजना पर भरोसा हो गया। इसके बाद ठगों ने उसे निवेश आधारित काम और ज्यादा मुनाफे का लालच देना शुरू किया।

पुलिस के मुताबिक, ठगी की शुरुआत टेलीग्राम से हुई थी। शुरुआती भुगतान का उद्देश्य कारोबारी का भरोसा हासिल करना था। इसके बाद उसे एक कथित निवेश मंच पर रकम लगाने के लिए तैयार किया गया। मुनाफे और निवेश की रकम आसानी से निकालने का भरोसा देकर उससे लगातार भुगतान कराया गया।

छोटे भुगतान से बनाया भरोसा, फिर बढ़ाई निवेश की रकम

जांच में सामने आया कि कारोबारी ने अलग-अलग चरणों में कुल ₹26.12 लाख आरोपियों के बताए खातों में स्थानांतरित किए। काफी रकम निवेश करने के बाद जब उसने अपना पैसा वापस निकालने की कोशिश की तो लेनदेन नहीं हो सका। बार-बार प्रयास के बावजूद रकम नहीं मिलने पर उसे ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।

साइबर सेल के मुताबिक, ठगों ने शुरुआत में ₹150 जैसे छोटे भुगतान इसलिए किए ताकि पीड़ित को यह विश्वास हो जाए कि ऑनलाइन काम और निवेश से वास्तव में कमाई की जा सकती है। इसके बाद निवेश की रकम धीरे-धीरे बढ़ाई गई और कारोबारी को अधिक मुनाफे का लालच दिया गया।

पुलिस ने बताया कि आदित्य पांडेय की पहचान रकम के लेनदेन की जांच के दौरान सामने आई। आरोप है कि वह टेलीग्राम के माध्यम से आरिफ के संपर्क में आया था। उसने कथित तौर पर तीन प्रतिशत कमीशन के बदले अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया। इसी खाते के जरिए ठगी की रकम को आगे भेजे जाने का आरोप है।

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खाते से जुड़े मिले करोड़ों रुपये के लेनदेन

जांच के दौरान साइबर सेल ने रकम के प्रवाह का पीछा करते हुए आदित्य पांडेय के बैंक खाते तक पहुंच बनाई। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, इस बैंक खाते के जरिए अब तक ₹3.51 करोड़ से अधिक के लेनदेन का पता चला है। इससे आशंका बढ़ गई है कि खाते का इस्तेमाल केवल सूरत के कारोबारी से जुड़ी ठगी में ही नहीं, बल्कि अन्य साइबर अपराधों में भी किया गया हो सकता है।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी की जांच के दौरान पुलिस को इस खाते से जुड़े अन्य राज्यों के मामलों की भी जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, खाते से संबंधित चार साइबर अपराध शिकायतें सामने आई हैं। इन मामलों में जुड़े कथित अपराध की रकम करीब ₹1.97 करोड़ बताई गई है।

साइबर अपराध विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे निवेश घोटालों में अपराधी सीधे बड़ी रकम मांगने के बजाय पहले छोटे भुगतान करके पीड़ित का भरोसा जीतते हैं। शुरुआती भुगतान वास्तविक होने से पीड़ित को लगता है कि सामने वाला व्यक्ति या मंच विश्वसनीय है। इसके बाद निवेश, कर, निकासी शुल्क या अतिरिक्त लाभ जैसे अलग-अलग बहानों से बड़ी रकम जमा कराई जाती है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, छोटे भुगतान के जरिए भरोसा कायम करना साइबर ठगी के ऐसे नेटवर्क की महत्वपूर्ण रणनीति है। जब पीड़ित को शुरुआती स्तर पर वास्तविक भुगतान मिल जाता है तो वह बाद में बड़ी रकम लगाने में कम संकोच करता है। ऐसे मामलों में किसी भी निवेश मंच की स्वतंत्र जांच किए बिना रकम भेजना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

मुख्य आरोपी की तलाश, नेटवर्क की जांच जारी

आदित्य पांडेय की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का केंद्र कथित मुख्य आरोपी आरिफ और उससे जुड़े अन्य लोगों पर है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक खाते और कितने साइबर अपराधों में इस्तेमाल किए गए तथा इस नेटवर्क से कितने पीड़ित जुड़े हैं।

साइबर सेल यह भी जांच कर रही है कि टेलीग्राम पर निवेश का झांसा देने वाले इस गिरोह ने अन्य लोगों को किस तरह निशाना बनाया और ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई। खाते से जुड़े करोड़ों रुपये के लेनदेन सामने आने के बाद मामले का दायरा बढ़ने की संभावना है। पुलिस फरार आरोपी की तलाश के साथ-साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य बैंक खातों और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है।

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