वडोदरा। फर्जी अमेरिकी खरीदारों की ऑनलाइन प्रोफाइल और वर्चुअल फोन नंबरों के जरिए सूरत के हीरा कारोबारियों से ₹4.80 करोड़ के सात हीरे मंगाने के कथित मामले में आरोपी हरेकृष्ण उर्फ हरी कमलेशभाई रावल को गुजरात हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उसे जमानत की शेष राशि जमा करने के लिए एक महीने का अंतिम समय दिया है। आरोपी ने अदालत में दलील दी कि लंबे समय तक जेल में रहने के कारण उसका हीरा कारोबार पूरी तरह ठप हो गया और वह निर्धारित अवधि में जमानत की पूरी राशि नहीं जुटा सका।
रावल को जुलाई में नियमित जमानत देते हुए अदालत ने दो महीने के भीतर ट्रायल कोर्ट में ₹10 लाख जमा करने की शर्त रखी थी। जमानत की यह शर्त पूरी करने के लिए उसके भाई ने भी अदालत के समक्ष लिखित आश्वासन दिया था। निर्धारित समय सीमा तक आरोपी केवल ₹5 लाख ही जमा कर सका। इसके बाद उसने बाकी ₹5 लाख जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगते हुए हाईकोर्ट का रुख किया।
FCRF Launches India-Focused BFSI Compliance Certification for Emerging Governance Professionals
अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उसकी मांग स्वीकार कर ली, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह अंतिम मोहलत होगी। आरोपी को अब 30 दिनों के भीतर बची हुई ₹5 लाख की राशि जमा करनी होगी। इसके बाद किसी और विस्तार की अनुमति नहीं दी जाएगी।
रावल को 25 मार्च को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर अमेरिका स्थित वास्तविक कंपनियों की पहचान से मिलती-जुलती फर्जी खरीदार प्रोफाइल तैयार कीं। इन प्रोफाइल का इस्तेमाल ऑनलाइन हीरा कारोबार से जुड़े मंच पर किया गया। कथित नेटवर्क ने स्थानीय कारोबारियों से संपर्क बढ़ाने के लिए वर्चुअल फोन नंबर और मैसेजिंग ऐप का सहारा लिया।
आरोप के मुताबिक, जालसाजों ने पहले कारोबारियों का विश्वास हासिल किया और फिर उनसे महंगे हीरे विदेश भेजने को कहा। हीरों को दुबई और बैंकॉक भेजे जाने के बाद उनका भुगतान नहीं किया गया। शिकायत के अनुसार, इस तरह कुल सात हीरे आरोपियों के नेटवर्क तक पहुंचे, जिनकी कुल कीमत करीब ₹4.80 करोड़ बताई गई है।
मामले में सूरत डिटेक्शन ऑफ क्राइम ब्रांच में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता नीलकंठ सॉलिटेयर के संचालक संजयभाई जादवभाई गोती ने आरोप लगाया कि फर्जी खरीदारों ने वैध अमेरिकी कंपनियों से जुड़े कारोबारी होने का भरोसा दिलाकर हीरे हासिल किए। जांच में फर्जी पहचान, वर्चुअल नंबर और ऑनलाइन संपर्क के जरिए कारोबारियों को विश्वास में लेने के आरोपों की पड़ताल की गई।
जुलाई में रावल की नियमित जमानत याचिका का अभियोजन पक्ष ने विरोध किया था। जांच पक्ष की ओर से अदालत में दावा किया गया कि रावल की भूमिका पहले से जमानत पा चुके कुछ सह-आरोपियों से अलग थी। यह भी आरोप लगाया गया कि कथित रकम का लेनदेन रावल तक पहुंचा था और उसने बरामद नहीं हुए एक हीरे को बेचकर करीब ₹20 लाख हासिल किए थे।
हालांकि, हाईकोर्ट ने जमानत पर विचार करते समय यह भी देखा कि सात में से छह हीरे सह-आरोपियों से बरामद किए जा चुके हैं। जांच पूरी होने और आरोपपत्र दाखिल होने के अलावा अदालत ने रावल के खिलाफ पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं होने की बात को भी ध्यान में रखा। इसके साथ ही कथित तौर पर उसके हिस्से में आई रकम के करीब आधे के बराबर ₹10 लाख जमा करने की पेशकश को जमानत की शर्त का आधार बनाया गया।
अब रावल के सामने जमानत की शर्त पूरी करने की अंतिम समय सीमा है। अदालत ने बची ₹5 लाख की राशि जमा करने के लिए 30 दिन दिए हैं। समय पर रकम जमा नहीं करने की स्थिति में जमानत की शर्त के उल्लंघन से जुड़ी कार्रवाई हो सकती है।
मामले में फर्जी खरीदारों की पहचान, वर्चुअल नंबरों के इस्तेमाल, विदेश भेजे गए हीरों और कथित भुगतान न किए जाने की पूरी कड़ी जांच के दायरे में है। अदालत के ताजा आदेश से आरोपी को फिलहाल रकम जुटाने के लिए समय मिल गया है, लेकिन जमानत की शेष शर्त पूरी करने की जिम्मेदारी अब उसके ऊपर है।
