सूरत में ₹6.28 करोड़ के बड़े वित्तीय घोटाले में एक दंपती की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले में नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। पहले से धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे इस कपल को अब जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर विदेश यात्रा करने और कथित रूप से फर्जी तरीके से नया पासपोर्ट हासिल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
निवेशकों को अधिक रिटर्न का झांसा देने का आरोप
आरोपी घनश्याम पाम्भर और उनकी पत्नी अश्मिता पाम्भर, गुजरात के राजकोट जिले के लोधिका क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। आरोप है कि दोनों ने 2021 में ‘धनंजय फाइनेंस’ नाम से एक कंपनी शुरू की और लोगों को कम समय में अधिक रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित किया। शुरुआती जांच के अनुसार, कई निवेशकों से करोड़ों रुपये जुटाने के बाद कंपनी अचानक बंद कर दी गई और दंपती सूरत के मोटा वराछा इलाके में स्थानांतरित हो गए।
मामला तब दर्ज हुआ जब कई निवेशकों ने शिकायत की कि उन्हें तय रिटर्न या मूलधन वापस नहीं मिला। इसके बाद राजकोट में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया और जांच शुरू हुई। जांच के दौरान दोनों ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत हासिल कर ली थी, लेकिन शर्तों में स्पष्ट रूप से पासपोर्ट जमा करना और बिना अनुमति देश न छोड़ना शामिल था।
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जमानत पर थे, पासपोर्ट जमा करने की थी शर्त
जांच एजेंसियों के अनुसार, बाद में यह सामने आया कि जमानत की शर्तों के बावजूद दंपती ने विदेश यात्रा की और दुबई सहित कई देशों में देखे गए। यह खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद पूरे मामले की जांच फिर से तेज कर दी गई।
‘पासपोर्ट खो गया’ बताकर नए दस्तावेज लेने का आरोप
तफ्तीश में सामने आया कि आरोपियों ने अपने असली पासपोर्ट पुलिस को जमा कर दिए थे, लेकिन बाद में सूरत में “पासपोर्ट खो गया” बताते हुए एक झूठी शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत के आधार पर उन्होंने नए पासपोर्ट के लिए आवेदन किया और कथित तौर पर नया ट्रैवल डॉक्यूमेंट हासिल कर लिया। जांच में यह भी पुष्टि हुई कि इन्हीं नए पासपोर्ट का इस्तेमाल कर विदेश यात्रा की गई, जबकि वे कानूनी रूप से देश छोड़ने के लिए अधिकृत नहीं थे।
नए केस में जालसाजी और पासपोर्ट अधिनियम की धाराएं
मामला सामने आने के बाद पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने नए जारी किए गए पासपोर्ट जब्त कर लिए और विस्तृत जांच शुरू कर दी। इसके बाद दंपती के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया गया, जिसमें धोखाधड़ी, झूठी जानकारी देना, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का उपयोग और पासपोर्ट अधिनियम के तहत गंभीर धाराएं शामिल की गई हैं।
इसके बाद पुलिस टीमों ने सूरत स्थित उनके आवास पर दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेशी के बाद उन्हें हिरासत में भेज दिया गया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नए पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही और क्या किसी एजेंट या संगठित नेटवर्क ने इसमें मदद की।
पासपोर्ट नेटवर्क और धन के प्रवाह की जांच
अधिकारियों को आशंका है कि इस पूरे मामले के पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जो फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और विदेश यात्रा में सहायता करता है। इसी दिशा में पासपोर्ट कार्यालय और पुलिस रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी गिरफ्तारी से पहले भी निवेशकों से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय थे, जिससे धन के अन्य माध्यमों से हेराफेरी की आशंका और गहरी हो गई है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और निवेशकों को हुए कुल नुकसान तथा धन के प्रवाह का पूरा ब्योरा जुटाया जा रहा है। आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ जारी है, जबकि पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश की जा रही है।
