हैदराबाद में विदेश में नौकरी और वीजा दिलाने के नाम पर ₹35.5 लाख की बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने 65 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जबकि उसका बेटा अभी फरार बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा था, जिसमें झूठे वादों और फर्जी दावों के जरिए पीड़ित को भरोसे में लेकर मोटी रकम वसूली गई।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान कोडाली रवि कुमार के रूप में हुई है, जो टर्कयामजल स्थित श्रीराम नगर कॉलोनी का निवासी और पेशे से सेल्समैन है। वहीं, उसका बेटा कोडाली श्री साई उर्फ कार्तिक (26) अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
पुराने परिचय का इस्तेमाल कर जीता भरोसा
पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता अनुमकोंडा चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उनके बेटे को यूनाइटेड किंगडम में नौकरी और वीजा दिलाने का झांसा दिया। आरोप है कि रवि कुमार ने भरोसा जीतने के लिए पीड़ित की मां के साथ अपने पुराने कार्य संबंधों का इस्तेमाल किया और धीरे-धीरे संपर्क बढ़ाया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने खुद को प्रभावशाली संपर्कों वाला व्यक्ति बताया और यह झूठा दावा किया कि उसका बेटा भारतीय सेना में कार्यरत है। इसके अलावा उसने यह भी कहा कि उसके बेटे के परिचित विदेश में होटल व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, जिससे उसकी बातों पर भरोसा और मजबूत हो गया।
FCRF Academy Launches Premier Anti-Money Laundering Certification Program
किस्तों में वसूले ₹35.5 लाख
इन्हीं दावों के आधार पर पीड़ित ने लगभग ₹35.5 लाख अलग-अलग किस्तों में आरोपी को दिए, यह उम्मीद करते हुए कि उनके बेटे को जल्द ही विदेश में नौकरी मिल जाएगी और वीजा प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। हालांकि, लंबे समय तक कोई कार्रवाई न होने और बार-बार आश्वासन मिलने के बाद पीड़ित को संदेह हुआ और मामला पुलिस तक पहुंचा।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इस ठगी में पिता-पुत्र दोनों की भूमिका संदिग्ध है और दोनों मिलकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे। पुलिस का मानना है कि दोनों ने मिलकर योजनाबद्ध तरीके से फर्जी कहानियां गढ़ीं और भरोसा कायम रखते हुए पैसे ऐंठे।
पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
सूचना के आधार पर पुलिस ने रवि कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने कथित रूप से अपनी भूमिका स्वीकार कर ली। इसके बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस अब फरार बेटे कार्तिक की तलाश कर रही है और कई स्थानों पर दबिश दी जा रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि वह इस पूरे नेटवर्क के संचालन और संपर्कों को संभालने में अहम भूमिका निभा रहा था।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को निशाना बनाता था और भरोसा जीतने के लिए फर्जी दस्तावेज और झूठे दावे इस्तेमाल करता था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस मामले में और लोग भी शामिल हैं या पहले भी इसी तरह की ठगी की गई है।
वित्तीय लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे
अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि पैसे के पूरे प्रवाह का पता लगाया जा सके। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर छिपाने की कोशिश तो नहीं की गई।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि विदेश नौकरी या वीजा से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें, ताकि ऐसे धोखाधड़ी के मामलों से बचा जा सके। जांच अभी जारी है और पूरे नेटवर्क के खुलासे की संभावना जताई जा रही है।
