ED ने Raheja Developers से जुड़े दिल्ली-NCR के सात ठिकानों पर छापेमारी की। जांच Raheja Revanta प्रोजेक्ट, घर खरीदारों से कथित धोखाधड़ी, फंड डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर केंद्रित है।

दिल्ली-NCR में ED का एक्शन मोड: Raheja Developers के दफ्तरों पर एक साथ रेड

Team The420
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नई दिल्ली:    रियल एस्टेट सेक्टर में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए Raheja Developers के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एजेंसी ने दिल्ली-एनसीआर में कंपनी से जुड़े कम से कम सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की, जिससे पूरे डेवलपर नेटवर्क में हड़कंप मच गया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी के आरोपों की जांच के तहत की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, जांच का केंद्र कंपनी का प्रमुख प्रोजेक्ट “Raheja Revanta” है, जिसमें निवेशकों से फ्लैट बुकिंग के नाम पर भारी रकम लिए जाने के बावजूद समय पर कब्जा न देने और धन के कथित दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इसी शिकायत के आधार पर एजेंसी ने वित्तीय लेन-देन की गहन जांच शुरू की थी।

एक साथ सात ठिकानों पर ED की दबिश

ED की टीमों ने दिल्ली और एनसीआर में स्थित कंपनी के मुख्य कार्यालयों, प्रमोटरों से जुड़े परिसरों और अन्य संबंधित ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और प्रॉपर्टी से जुड़े महत्वपूर्ण कागजात जब्त और जांच के लिए खंगाले गए।

जांच एजेंसियों का फोकस उन लेन-देन पर है, जिनमें फंड डायवर्जन और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के संकेत मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कोई अचानक कार्रवाई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।

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Raheja Revanta प्रोजेक्ट पर सबसे बड़ा विवाद

इस पूरे मामले का केंद्र “Raheja Revanta” प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जहां सैकड़ों घर खरीदारों ने वर्षों पहले फ्लैट बुक किए थे। आरोप है कि समय पर न तो उन्हें फ्लैट दिए गए और न ही कई मामलों में उनकी रकम वापस की गई।

कई निवेशकों ने शिकायत में दावा किया है कि उन्हें लगातार आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन प्रोजेक्ट की प्रगति बेहद धीमी रही। इसी वजह से मामला धीरे-धीरे वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग जांच तक पहुंच गया।

धन के प्रवाह की गहन जांच

ED अब इस पूरे नेटवर्क में पैसे के स्रोत और उसके उपयोग की बारीकी से जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घर खरीदारों से जुटाई गई भारी रकम किन-किन खातों में गई और उसका उपयोग किन अन्य परियोजनाओं या कंपनियों में किया गया।

सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा केवल एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी के अन्य रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और वित्तीय संरचना को भी खंगाला जा रहा है।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

यह पहला मौका नहीं है जब Raheja Developers जांच एजेंसियों के रडार पर आई हो। इससे पहले भी जून 2025 में इसी मामले से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जिसमें महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज सामने आए थे।

लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और निवेशकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की जांचें सेक्टर में सख्त रेगुलेटरी निगरानी की दिशा में संकेत देती हैं।

रियल एस्टेट बाजार पर असर

ED की इस कार्रवाई के बाद रियल एस्टेट इंडस्ट्री में हलचल देखी जा रही है। निवेशकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जबकि डेवलपर्स पर निगरानी और कड़ी होने की आशंका जताई जा रही है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में प्रोजेक्ट फंडिंग, ग्राहक सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़े नियम और सख्त हो सकते हैं। इससे जहां एक ओर निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, वहीं डेवलपर्स पर अनुपालन का दबाव भी बढ़ेगा।

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